उत्तर प्रदेश के मेरठ के चर्चित सांप कांड में फांसी की सजा पाने वाली रविता और उसके कथित प्रेमी अमरदीप को इलाहाबाद हाईकोर्ट से सुनवाई का मौका मिल गया है। हाईकोर्ट ने दोनों की ओर से दाखिल अपील को स्वीकार कर लिया है। दोनों ने मेरठ की सत्र अदालत के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें पति अमित कश्यप की हत्या का दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई गई थी। अब इस मामले में 14 दिसंबर को सुबह 10 बजे अंतिम सुनवाई होगी। न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति पदम नारायण मिश्र की खंडपीठ इस अपील पर सुनवाई करेगी।
मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के अकबरपुर सादात गांव का यह मामला अप्रैल 2025 में सामने आया था। अमित कश्यप की मौत को शुरुआत में सांप के काटने से हुई घटना बताया गया था। उनके शव के पास सांप मिलने के कारण परिवार के लोगों को भी पहले सर्पदंश की आशंका हुई थी। हालांकि, बाद में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच में हत्या की बात सामने आई। जांच के मुताबिक अमित की गला दबाकर हत्या की गई थी और घटना को सांप के काटने से हुई मौत दिखाने की कोशिश की गई थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, रविता का गांव के ही अमरदीप के साथ प्रेम संबंध था। अमित को इस संबंध की जानकारी हो गई थी और वह इसका विरोध कर रहे थे। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद होने लगा था। पुलिस के मुताबिक, अमित को रास्ते से हटाने के लिए रविता और अमरदीप ने मिलकर हत्या की साजिश रची थी। आरोप था कि 12 अप्रैल 2025 की रात दोनों ने घर के अंदर अमित की गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद हत्या को प्राकृतिक मौत या सांप के काटने की घटना दिखाने के लिए उनके शव के पास एक जिंदा सांप छोड़ दिया गया।
अगले दिन अमित का शव बिस्तर पर मिला था। शव के पास सांप होने के कारण शुरुआत में परिजनों ने इसे सर्पदंश का मामला समझा, लेकिन शरीर पर कुछ निशान देखकर परिवार के लोगों को संदेह हुआ। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण गला दबाने से दम घुटना बताया गया। जांच में यह भी सामने आया कि शव के पास मिला सांप जहरीला नहीं था। इसके बाद पुलिस ने मामले को हत्या के एंगल से जांचना शुरू किया।
पुलिस जांच के दौरान रविता और अमरदीप की भूमिका सामने आई। दोनों को 16 अप्रैल 2025 को गिरफ्तार किया गया था। जांच में उनके बीच फोन पर बातचीत और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की भी पड़ताल की गई। अभियोजन पक्ष ने अदालत में दावा किया कि हत्या की योजना बनाकर वारदात को सांप के काटने से हुई मौत का रूप देने की कोशिश की गई थी। पुलिस ने मामले से जुड़े साक्ष्य जुटाकर आरोपपत्र दाखिल किया और इसके बाद अदालत में मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई।
मेरठ की अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद 7 अक्टूबर 2026 को रविता और अमरदीप को दोषी करार दिया था। इसके बाद 16 अक्टूबर को दोनों को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई। अदालत ने इस अपराध को दुर्लभ से दुर्लभतम श्रेणी का मामला माना था। इस फैसले के बाद दोनों को फांसी की सजा के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील करने का अधिकार था।
अब रविता और अमरदीप की ओर से अधिवक्ता आदेश कुमार तथा अधिवक्ता बरखा चौधरी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में पैरवी की है। दोनों ने निचली अदालत के फैसले में दोषसिद्धि और मृत्युदंड के आदेश को चुनौती दी है। उनकी ओर से सजा रद्द करने की मांग की गई है। हाईकोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए मामले की अंतिम सुनवाई के लिए 14 दिसंबर की तारीख तय की है।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि हाईकोर्ट द्वारा अपील स्वीकार किए जाने का मतलब फांसी की सजा रद्द होना नहीं है। इसका अर्थ है कि अदालत ने दोनों की अपील को सुनवाई के लिए स्वीकार किया है। अब हाईकोर्ट निचली अदालत के फैसले, अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और बचाव पक्ष की दलीलों पर विचार करेगा। मृत्युदंड के मामलों में हाईकोर्ट को सजा की पुष्टि के प्रश्न पर भी विचार करना होता है। इसलिए 14 दिसंबर की सुनवाई इस मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण होगी।
इस चर्चित मामले में अब सबकी नजर इलाहाबाद हाईकोर्ट की सुनवाई पर है। रविता और अमरदीप ने अपनी दोषसिद्धि तथा फांसी की सजा को चुनौती दी है। वहीं, निचली अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोनों को दोषी मानते हुए मृत्युदंड सुनाया था। हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा कि निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा जाता है या उसमें कोई बदलाव किया जाता है।









