रिलायंस इंडस्ट्रीज और Meta ने गुजरात के जामनगर में AI-एनेबल्ड डेटा सेंटर विकसित करने के लिए साझेदारी की है। 168 मेगावाट क्षमता वाली यह परियोजना अगले दो वर्षों में तैयार होगी और Meta की AI तथा बड़े पैमाने की कंप्यूटिंग जरूरतों को पूरा करेगी।
जामनगर: भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में एक बड़ा निवेश सामने आया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और Meta ने गुजरात के जामनगर में अत्याधुनिक AI-एनेबल्ड डेटा सेंटर विकसित करने की योजना की घोषणा की है। यह परियोजना न केवल देश की AI क्षमताओं को मजबूत करेगी, बल्कि जामनगर को वैश्विक स्तर पर उभरते टेक और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर केंद्र के रूप में भी स्थापित कर सकती है।
जामनगर में बनेगा 168 मेगावाट क्षमता वाला डेटा सेंटर
रिलायंस इंडस्ट्रीज और Meta की साझेदारी के तहत गुजरात के जामनगर में 168 मेगावाट क्षमता का आधुनिक AI डेटा सेंटर स्थापित किया जाएगा। कंपनी ने इसे अगले दो वर्षों के भीतर विकसित करने का लक्ष्य रखा है। भविष्य में बढ़ती मांग को देखते हुए इसकी क्षमता का विस्तार भी किया जा सकेगा।
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यह परियोजना भारत में Meta के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए जाने वाले पहले समर्पित डेटा सेंटरों में शामिल होगी। इसे कंपनी की AI, क्लाउड और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा।
रिलायंस निभाएगा इंफ्रास्ट्रक्चर पार्टनर की भूमिका
इस परियोजना में रिलायंस एंड-टू-एंड इंफ्रास्ट्रक्चर पार्टनर के रूप में कार्य करेगा। कंपनी डेटा सेंटर का डिजाइन, निर्माण, बिजली आपूर्ति, नेटवर्क कनेक्टिविटी और संचालन से जुड़ी सभी प्रमुख सेवाओं की जिम्मेदारी संभालेगी।
इसके अलावा रिन्युएबल एनर्जी आधारित बिजली आपूर्ति और अन्य तकनीकी सुविधाएं भी रिलायंस द्वारा उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे Meta को अपने AI प्लेटफॉर्म और डिजिटल सेवाओं के विस्तार के लिए मजबूत आधार मिलेगा।
Meta की AI जरूरतों के अनुसार होगा निर्माण
डेटा सेंटर को Meta की विशेष तकनीकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित किया जाएगा। बढ़ते AI मॉडल, डेटा प्रोसेसिंग और बड़े पैमाने की कंप्यूटिंग जरूरतों को देखते हुए यह सुविधा अत्याधुनिक तकनीकों से लैस होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि AI आधारित सेवाओं की तेजी से बढ़ती मांग को देखते हुए ऐसे बड़े डेटा सेंटर भविष्य के डिजिटल इकोसिस्टम की रीढ़ साबित होंगे।
जामनगर क्यों बना पसंदीदा स्थान?
गुजरात का जामनगर इस परियोजना के लिए कई कारणों से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यहां रिन्युएबल एनर्जी की उपलब्धता, मजबूत नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर और समुद्री इंटरनेट केबल लैंडिंग स्टेशनों की नजदीकी जैसे कई फायदे मौजूद हैं।
जियो के विस्तृत फाइबर नेटवर्क के कारण डेटा ट्रांसमिशन और कनेक्टिविटी भी बेहतर रहेगी। इसके अलावा डेटा सेंटर की कूलिंग जरूरतों के लिए शोधित समुद्री जल का उपयोग करने की योजना है, जिससे पर्यावरणीय प्रभाव को कम किया जा सकेगा।
भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगा बढ़ावा
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक Mukesh Ambani ने कहा कि Meta के साथ यह साझेदारी भारत के डिजिटल भविष्य के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। उनके अनुसार जामनगर आने वाले वर्षों में हाइपरस्केल AI कंप्यूटिंग का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
वहीं Mark Zuckerberg ने इस परियोजना को लेकर उत्साह जताते हुए कहा कि भारत में Meta का पहला AI-एनेबल्ड डेटा सेंटर कंपनी की वैश्विक AI क्षमता को मजबूत करेगा और देश में उसके दीर्घकालिक निवेश को नई दिशा देगा।
AI इकोसिस्टम के लिए अहम कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भारत को वैश्विक AI इंफ्रास्ट्रक्चर मैप पर मजबूत स्थिति दिला सकती है। बड़े डेटा सेंटर न केवल तकनीकी कंपनियों को बेहतर कंप्यूटिंग क्षमता प्रदान करते हैं, बल्कि रोजगार, निवेश और डिजिटल नवाचार को भी बढ़ावा देते हैं।
यदि परियोजना तय समय पर पूरी होती है, तो जामनगर देश के प्रमुख AI और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर केंद्रों में शामिल हो सकता है, जिससे भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।








