शिमला स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा, हर 10 में से एक बच्चा हाई बीपी के खतरे में

शिमला के अध्ययन में 10% बच्चों में प्री-हाइपरटेंशन और 2.33% में हाई बीपी पाया गया। विशेषज्ञों ने मोटापा, जंक फूड और स्क्रीन टाइम को प्रमुख कारण बताया।

शिमला में स्कूली बच्चों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि हर 10 में से एक बच्चा प्री-हाइपरटेंशन की स्थिति में है। विशेषज्ञों ने बढ़ते वजन, जंक फूड और स्क्रीन टाइम को इसके प्रमुख कारणों में शामिल बताया है।

Himachal Pradesh: शिमला में बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर किए गए एक अध्ययन ने चिंता बढ़ा दी है। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) के शोध में बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों में उच्च रक्तचाप के शुरुआती संकेत पाए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बदलती जीवनशैली और शारीरिक गतिविधियों में कमी बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रही है।

अध्ययन में सामने आए चिंताजनक आंकड़े

आईजीएमसी शिमला के बाल रोग विभाग द्वारा किए गए अध्ययन में 6 से 16 वर्ष आयु वर्ग के 300 स्कूली बच्चों को शामिल किया गया। शोधकर्ताओं ने निर्धारित चिकित्सकीय मानकों के अनुसार बच्चों का रक्तचाप मापा और जिन बच्चों का रक्तचाप पहली जांच में अधिक पाया गया, उनकी चार सप्ताह बाद दोबारा जांच की गई।

शिमला स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा, हर 10 में से एक बच्चा हाई बीपी के खतरे में

अंतिम रिपोर्ट के अनुसार 87.67 प्रतिशत बच्चे सामान्य श्रेणी में पाए गए, जबकि 10 प्रतिशत बच्चों में उच्च रक्तचाप की पूर्व अवस्था (प्री-हाइपरटेंशन) दर्ज की गई। वहीं 2.33 प्रतिशत बच्चों में स्थायी उच्च रक्तचाप की पुष्टि हुई।

बढ़ता वजन बना सबसे बड़ा जोखिम कारक

अध्ययन में सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह सामने आया कि बढ़ता वजन बच्चों में हाई बीपी का प्रमुख कारण बन रहा है। हालांकि अध्ययन में केवल पांच प्रतिशत बच्चे अधिक वजन वाले पाए गए, लेकिन स्थायी उच्च रक्तचाप से प्रभावित बच्चों में आधे से अधिक इसी श्रेणी के थे।

विशेषज्ञों का मानना है कि बचपन में बढ़ता मोटापा भविष्य में हृदय रोग, मधुमेह और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है। इसलिए बच्चों के वजन और खानपान पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।

मोबाइल और जंक फूड का बढ़ता प्रभाव

शोधकर्ताओं के अनुसार बच्चों की दिनचर्या में तेजी से बदलाव आया है। मोबाइल फोन, वीडियो गेम, इंटरनेट और टेलीविजन पर अधिक समय बिताने के कारण बच्चे खेलकूद और शारीरिक गतिविधियों से दूर हो रहे हैं।

इसके साथ ही जंक फूड, पैकेटबंद खाद्य पदार्थ और मीठे पेय पदार्थों का बढ़ता सेवन भी स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। यही वजह है कि पहले केवल वयस्कों में दिखाई देने वाली जीवनशैली संबंधी बीमारियां अब बच्चों में भी देखने को मिल रही हैं।

पारिवारिक इतिहास भी बढ़ाता है जोखिम

अध्ययन में यह भी पाया गया कि जिन बच्चों के परिवार में पहले से उच्च रक्तचाप की समस्या मौजूद थी, उनमें इस बीमारी का खतरा अपेक्षाकृत अधिक था। हालांकि शोध में उम्र और लिंग का उच्च रक्तचाप से कोई महत्वपूर्ण संबंध नहीं पाया गया।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि परिवार में हाई बीपी का इतिहास है तो बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच और रक्तचाप की निगरानी करना और भी जरूरी हो जाता है।

विशेषज्ञों ने दिए बचाव के सुझाव

शोधकर्ताओं ने स्कूलों में नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, रक्तचाप जांच और वजन की निगरानी की व्यवस्था को मजबूत करने की सिफारिश की है। साथ ही बच्चों को खेल गतिविधियों में अधिक भाग लेने और सक्रिय जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, सीमित स्क्रीन टाइम और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच के माध्यम से बच्चों में उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं को शुरुआती स्तर पर पहचाना और नियंत्रित किया जा सकता है। इससे भविष्य में हृदय संबंधी गंभीर बीमारियों के खतरे को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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