श्रावणी मेला 2026 इस बार श्रद्धा और आधुनिक तकनीक के अनूठे संगम का गवाह बनेगा। सुल्तानगंज के अजगैबीनाथ धाम से लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम तक पूरी कांवर यात्रा को शिवमय बनाने की तैयारी की जा रही है। मेले के दौरान रात के समय आसमान में ड्रोन के जरिए भगवान शिव, त्रिशूल, डमरू, ओम और कांवर की आकृतियां उभरेंगी, जो श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण होंगी।
बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम (BSTDC) ने श्रावणी मेला 2026 के लिए तकनीक आधारित आकर्षणों की तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत सुल्तानगंज के नमामि गंगे सीढ़ी घाट और मंदिर सीढ़ी घाट को थीम लाइटिंग से सजाया जाएगा। यहां भगवान शिव से जुड़े प्रतीकों—त्रिशूल, डमरू, ओम, गंगा और कांवर—को रोशनी के जरिए प्रदर्शित किया जाएगा।
मेले में इस बार लेजर और वॉटर स्क्रीन शो भी आयोजित होगा। गंगा तट पर होने वाले इस शो में सुल्तानगंज का इतिहास, उत्तरवाहिनी गंगा की महिमा, समुद्र मंथन की कथा, भगवान शिव का महत्व और सुल्तानगंज से देवघर तक की कांवर यात्रा को आधुनिक तकनीक के जरिए दिखाया जाएगा।
ड्रोन शो को इस बार का सबसे बड़ा आकर्षण माना जा रहा है। सैकड़ों ड्रोन मिलकर आसमान में भगवान शिव की विशाल आकृति, त्रिशूल, डमरू, ओम, कांवर और बाबा बैद्यनाथ धाम के प्रतीक चिन्ह बनाएंगे। श्रद्धालुओं को भक्ति संदेश भी इन ड्रोन संरचनाओं के माध्यम से दिखाए जाएंगे।
इसके अलावा, मेले में म्यूजिकल फाउंटेन शो भी लगाया जाएगा, जिसमें भक्ति संगीत की धुनों पर पानी की रंग-बिरंगी धाराएं तालमेल के साथ नृत्य करती नजर आएंगी। अधिकारियों का कहना है कि इसका उद्देश्य श्रावणी मेले को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक आकर्षक बनाना तथा धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना है।
इस वर्ष श्रावणी मेला 30 जुलाई से 28 अगस्त तक आयोजित होगा। सुल्तानगंज से देवघर तक करीब 105 से 108 किलोमीटर की पैदल कांवर यात्रा में हर साल लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं। इस बार कांवर पथ को पूरी तरह शिव थीम पर सजाने और कई नए आकर्षण जोड़ने की तैयारी की जा रही है।
पर्यटन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक तकनीक और धार्मिक आस्था के इस मेल से श्रावणी मेला 2026 को एक नई पहचान मिलेगी। श्रद्धालुओं को न सिर्फ आध्यात्मिक अनुभव मिलेगा, बल्कि वे ड्रोन और लेजर शो के जरिए शिवभक्ति का एक अनोखा दृश्य भी देख सकेंगे।










