शरद पवार की देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात संभव, माणिकराव कोकाटे के इस्तीफे पर बना सकते हैं दबाव

शरद पवार और देवेंद्र फडणवीस की संभावित मुलाकात से पहले महाराष्ट्र में सियासी हलचल तेज, कोकाटे विवाद और छावा संगठन की चेतावनी चर्चा में।

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट देखने को मिल रही है। नगर निगम चुनावों से पहले शरद पवार और देवेंद्र फडणवीस के बीच संभावित मुलाकात को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। सूत्रों की मानें तो एनसीपी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार बुधवार को उपमुख्यमंत्री फडणवीस से मिल सकते हैं। इस अहम बैठक में कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे के इस्तीफे की मांग के साथ नितिन देशमुख पर कथित हमले समेत कई संवेदनशील राजनीतिक मुद्दों पर बात हो सकती है।

कोकाटे के बयान और वीडियो ने बढ़ाई मुश्किलें

शरद पवार की देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात संभव, माणिकराव कोकाटे के इस्तीफे पर बना सकते हैं दबाव

कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे पर इस्तीफे का दबाव तब बढ़ा जब विधानसभा सत्र के दौरान उनका एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह मोबाइल पर 'रम्मी' खेलते दिखे। यह वीडियो सामने आते ही विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने उन पर निशाना साधा। छावा संगठन ने उनके इस्तीफे की मांग करते हुए प्रदर्शन किया, जिसके चलते लातूर में शरद पवार गुट और छावा संगठन के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प भी हो गई। इस दौरान छावा संगठन के नेता विजय घाडगे और अन्य कार्यकर्ताओं से मारपीट की गई, जिससे विवाद और गहरा गया।

अजित पवार ने दी प्रतिक्रिया

शरद पवार की देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात संभव, माणिकराव कोकाटे के इस्तीफे पर बना सकते हैं दबाव

उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह मंत्री कोकाटे से मिलकर पूरी स्थिति की समीक्षा करेंगे। उन्होंने लातूर की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पवार ने यह भी बताया कि पार्टी नेता सूरज चव्हाण, जिनका नाम झड़प में सामने आया है, से इस्तीफा ले लिया गया है। साथ ही उन्होंने पुलिस अधीक्षक से बात कर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

छावा संगठन की चेतावनी

इस पूरे प्रकरण में छावा संगठन ने तीखा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि अगर मंगलवार तक कोकाटे के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो वे शरद पवार के खिलाफ भी विरोध प्रदर्शन करेंगे। संगठन के नेता विजय घाडगे ने कहा कि उन्होंने पुणे में पवार से मुलाकात कर अपनी बात रखी है, लेकिन अगर मांगें पूरी नहीं होतीं, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

यह मुलाकात महाराष्ट्र की राजनीति में आने वाले समीकरणों को गहराई से प्रभावित कर सकती है।

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