श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के आरोपों को खारिज करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है। उन्होंने आरोपों की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने तथा रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है।
मथुरा: श्रीकृष्ण जन्मस्थान में चढ़ावे की कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने आरोपों पर पहली बार सार्वजनिक प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है। उन्होंने आरोपों को निराधार बताते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है।
चढ़ावा विवाद पर सचिव ने दी सफाई
श्रीकृष्ण जन्मस्थान में चढ़ावे और आभूषणों में कथित गड़बड़ी को लेकर हाल ही में लगाए गए आरोपों के बाद संस्थान की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और बिना किसी प्रमाण के सार्वजनिक किए जा रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि पिछले 27 वर्षों से संस्थान से जुड़े रहने के दौरान उन्होंने कभी मानदेय, यात्रा भत्ता या अन्य सुविधाएं नहीं लीं। यहां तक कि संस्थान के कार्यों से संबंधित यात्राओं का खर्च भी स्वयं वहन किया है।
सीएम योगी को पत्र लिखकर मांगी जांच
कपिल शर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे पत्र में पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच निष्पक्ष एजेंसी से कराई जाए और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि श्रद्धालुओं और आम लोगों के बीच किसी प्रकार का भ्रम न रहे।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि आवश्यकता हो तो उनकी व्यक्तिगत संपत्ति और आय के स्रोतों की भी जांच कराई जा सकती है। इससे पूरे मामले की सच्चाई सामने आ जाएगी।
फलाहारी बाबा के आरोपों पर उठाए सवाल
सचिव ने आरोप लगाने वाले दिनेश शर्मा उर्फ फलाहारी महाराज पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि वे लंबे समय से जन्मस्थान प्रबंधन के खिलाफ बयान दे रहे हैं और बिना किसी ठोस साक्ष्य के व्यक्तिगत आरोप लगा रहे हैं।
कपिल शर्मा ने आरोप लगाया कि दिनेश शर्मा के खिलाफ विभिन्न मामलों में मुकदमे दर्ज हैं और कुछ मामलों में चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि आरोप लगाने वाले व्यक्ति जन्मस्थान की व्यवस्थाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की पूरी जानकारी नहीं रखते।
श्रद्धालुओं में भ्रम की स्थिति बनने का दावा
सचिव का कहना है कि लगातार लगाए जा रहे आरोपों से श्रद्धालुओं और आम लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थानों से जुड़े मामलों में तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर ही बात होनी चाहिए।
उनके अनुसार, जांच के बाद जो भी निष्कर्ष सामने आएं, उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि किसी प्रकार की गलतफहमी न रहे और संस्थान की कार्यप्रणाली को लेकर लोगों का विश्वास बना रहे।
जांच रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल चढ़ावे और प्रबंधन से जुड़े आरोपों को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने हैं। एक ओर आरोप लगाए जा रहे हैं तो दूसरी ओर संस्थान की ओर से उन्हें सिरे से खारिज किया जा रहा है। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है और क्या किसी स्वतंत्र जांच की प्रक्रिया शुरू की जाती है।









