साल की पहली सोमवती अमावस्या पर हरियाणा के जींद स्थित पिंडारा तीर्थ में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान कर पिंडदान और तर्पण किया। शुभ योगों के संयोग ने इस धार्मिक अवसर के महत्व को और बढ़ा दिया।
जींद: साल की पहली सोमवती अमावस्या के अवसर पर पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ में श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह से ही हजारों श्रद्धालु तीर्थ स्थल पर पहुंचने लगे और पवित्र सरोवर में स्नान कर पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान एवं तर्पण किया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किए गए पुण्य कार्यों का विशेष महत्व माना जाता है।
पिंडारा तीर्थ में श्रद्धालुओं का लगा तांता
सोमवती अमावस्या के अवसर पर जींद के प्रसिद्ध पिंडारा तीर्थ में सोमवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हरियाणा के अलावा पंजाब, राजस्थान, दिल्ली और अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचे। श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवर में स्नान कर धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए और अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया।
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तीर्थ परिसर में सुबह से ही पूजा-अर्चना और धार्मिक गतिविधियों का सिलसिला चलता रहा। श्रद्धालुओं ने मंदिरों में दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और पितरों के मोक्ष की कामना की।
शुभ योगों ने बढ़ाया धार्मिक महत्व
इस बार सोमवती अमावस्या पर मृगशिरा नक्षत्र, सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का विशेष संयोग बना, जिसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ऐसे योगों में किए गए दान, स्नान और पूजा-पाठ का विशेष फल प्राप्त होता है।
धार्मिक विद्वानों का मानना है कि सोमवती अमावस्या पर पितरों के निमित्त किए गए तर्पण और दान से पूर्वजों की कृपा प्राप्त होती है तथा परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। इसी वजह से इस दिन तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ जाती है।
महाभारत काल से जुड़ी है पिंडतारक तीर्थ की मान्यता
पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ का संबंध महाभारत काल से जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने अपने पूर्वजों और युद्ध में मारे गए परिजनों की आत्मा की शांति के लिए यहां तपस्या की थी। सोमवती अमावस्या के दिन उन्होंने पिंडदान और तर्पण कर आत्मिक शांति की कामना की थी।
तभी से यह स्थान पितृ कर्मों और पिंडदान के लिए विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि यहां विधि-विधान से पिंडदान करने पर पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के चलते देश के विभिन्न हिस्सों से लोग यहां पहुंचते हैं।
सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर प्रशासन की नजर
श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए थे। तीर्थ परिसर और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
धार्मिक गुरुओं ने श्रद्धालुओं को स्नान, दान, तर्पण और ईश्वर स्मरण का महत्व बताया। साथ ही लोगों से पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता बनाए रखने की भी अपील की गई। पूरे दिन तीर्थ क्षेत्र में भक्ति और आस्था का माहौल बना रहा, जहां श्रद्धालु धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होकर आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते नजर आए।









