सोनिया गांधी की आत्मकथा ‘Belonging: A Journey of Love’ में खुलेंगे जिंदगी के अनकहे पन्ने, दर्द से राजनीति तक का सफर

Sonia Gandhi की 544 पन्नों की आत्मकथा ‘Belonging: A Journey of Love’ 10 नवंबर 2026 को रिलीज होगी। किताब में प्रेम, परिवार, निजी त्रासदी और राजनीति तक के सफर

कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी अपनी आगामी आत्मकथा ‘Belonging: A Journey of Love’ के जरिए अपने जीवन के कई अनछुए पहलुओं को सामने रखने जा रही हैं।

Sonia Gandhi Autobiography: कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी की बहुप्रतीक्षित आत्मकथा ‘Belonging: A Journey of Love’ जल्द ही पाठकों के बीच आने वाली है। 544 पन्नों की यह किताब उनके निजी जीवन, परिवार, राजीव गांधी से मुलाकात, भारतीय राजनीति में प्रवेश और दशकों लंबे सार्वजनिक जीवन के अनुभवों को सामने रखेगी। पुस्तक का प्रकाशन 10 नवंबर 2026 को प्रस्तावित है।

सोनिया गांधी ने अपनी आत्मकथा के बारे में कहा है कि अपने जीवन को शब्दों में ढालना उनके लिए आसान अनुभव नहीं रहा। उनके मुताबिक, किताब लिखने के लिए उन्हें उन यादों, भावनाओं और निजी अनुभवों को फिर से सामने लाना पड़ा, जिन्हें उन्होंने लंबे समय तक अपने भीतर संजोकर रखा था।

अपनों को खोने का दर्द बना राजनीति में आने की वजह

पुस्तक के प्रकाशक अल्फ्रेड ए. नॉफ की ओर से जारी बयान में सोनिया गांधी ने अपने राजनीतिक सफर के पीछे छिपी निजी परिस्थितियों का जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि जीवन में हुए गहरे दुख और प्रियजनों को खोने के अनुभवों ने उन्हें अंततः राजनीति की ओर आने के लिए प्रेरित किया। सोनिया गांधी लंबे समय तक अपने निजी जीवन को सार्वजनिक चर्चा से दूर रखने के लिए जानी जाती रही हैं। 

उनका कहना है कि आत्मकथा लिखना उनके लिए इसलिए भी कठिन था क्योंकि इसमें उन्हें अपनी जिंदगी के ऐसे पहलुओं को साझा करना पड़ा, जिन्हें उन्होंने अब तक निजी रखा था। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पुस्तक उनके जीवन में आई खुशियों, निराशाओं और भावनात्मक उतार-चढ़ाव की कहानी को समझने का अवसर देगी।

पहली बार सामने आएंगे निजी अनुभव

‘Belonging: A Journey of Love’ में सोनिया गांधी के परिवार से जुड़े कई ऐसे पहलुओं पर भी रोशनी पड़ने की उम्मीद है, जिनकी सार्वजनिक चर्चा अपेक्षाकृत कम हुई है। उन्होंने कहा कि उनके परिवार के बारे में बहुत कुछ लिखा जा चुका है, लेकिन परिवार के सदस्यों के फैसलों के पीछे मौजूद भावनाओं और मानवीय कमजोरियों को समझने का प्रयास कम हुआ है।

आत्मकथा में वह अपने परिवार को केवल राजनीतिक विरासत के रूप में नहीं, बल्कि भावनाओं और रिश्तों से जुड़े एक मानवीय परिवार के तौर पर देखने की कोशिश करती हैं।

इटली के बचपन से भारत तक की कहानी

किताब में सोनिया गांधी के शुरुआती जीवन से लेकर भारत में उनके लंबे प्रवास तक का वर्णन किया गया है। आत्मकथा की शुरुआत 1965 में इंग्लैंड के कैंब्रिज से होती है। इसी दौरान उनकी मुलाकात राजीव गांधी से हुई थी। इसके बाद राजीव गांधी के साथ उनका रिश्ता आगे बढ़ा और दोनों ने विवाह किया। भारत आने के बाद सोनिया गांधी का जीवन पूरी तरह बदल गया। उन्हें इंदिरा गांधी की बहू और नेहरू-गांधी परिवार की सदस्य के रूप में एक नई सामाजिक और राजनीतिक दुनिया का सामना करना पड़ा।

किताब में भारत में उनके शुरुआती वर्षों, भारतीय संस्कृति से परिचय, हिंदी सीखने की कोशिश, साड़ी पहनने और भारतीय खान-पान से जुड़ी यादों को भी शामिल किया गया है।

इंदिरा और राजीव गांधी की मौत का दर्द

सोनिया गांधी के जीवन की सबसे त्रासद घटनाओं में परिवार के दो बड़े सदस्यों की हत्या शामिल रही। 1980 में संजय गांधी की विमान दुर्घटना में मृत्यु और 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। इसके बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने। वर्ष 1991 में चुनाव प्रचार के दौरान उनकी हत्या ने सोनिया गांधी के जीवन को एक बार फिर गहरे व्यक्तिगत संकट में डाल दिया। आत्मकथा में इन घटनाओं और उनके प्रभावों पर विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है।

राजनीति में आने से लेकर 2004 के फैसले तक

सोनिया गांधी ने कई वर्षों तक सक्रिय राजनीति में आने के दबाव को टाला। हालांकि बाद में उन्होंने कांग्रेस में सक्रिय भूमिका स्वीकार की और पार्टी के नेतृत्व की जिम्मेदारी संभाली। 2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन की जीत के बाद उनके प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं करने का फैसला भी उनके राजनीतिक जीवन का अहम अध्याय रहा।

सोनिया गांधी के मुताबिक, उनकी कहानी केवल व्यक्तिगत जीवन की कहानी नहीं है। यह पिछले करीब छह दशकों में भारत में हुए सामाजिक और राजनीतिक बदलावों को देखने का एक अलग नजरिया भी प्रस्तुत करती है।

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