क्या AI से कम हो जाएंगी कंप्यूटर वाली नौकरियां? श्रीधर वेम्बू ने बताया आगे क्या बदल सकता है

श्रीधर वेम्बू के मुताबिक AI से एक कर्मचारी 10 लोगों जितना काम कर सकता है। हालांकि, इससे 90 फीसदी नौकरियां खत्म होना जरूरी नहीं। जानें नौकरियों पर क्या असर होगा।

Zoho के को-फाउंडर श्रीधर वेम्बू का कहना है कि AI आने से कंप्यूटर पर होने वाले काम में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इस तकनीक की मदद से एक कर्मचारी 10 लोगों के बराबर काम कर सकेगा। हालांकि, वेम्बू का मानना है कि इससे सभी की नौकरी चली जाएगी, ऐसा जरूरी नहीं है।

AI Jobs Risk: आजकल दफ्तरों में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। पहले जिन कामों को पूरा करने में कई घंटे लगते थे, अब उनमें AI की मदद ली जा रही है। ऐसे में कंप्यूटर पर काम करने वाले लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि आगे उनकी नौकरी का क्या होगा। इसी मुद्दे पर Zoho के को-फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने अपनी राय रखी है। उनका कहना है कि आने वाले समय में AI की मदद से एक व्यक्ति उतना काम कर सकेगा, जितना अभी 10 लोग मिलकर करते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कंपनियों को कर्मचारियों की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।

कंप्यूटर पर काम करने वालों के लिए क्या बोले वेम्बू?

श्रीधर वेम्बू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर AI और नौकरियों को लेकर अपनी राय रखी है। उनका कहना है कि कंप्यूटर की मदद से किए जाने वाले लगभग हर काम में अब बदलाव का जोखिम मौजूद है।

क्या AI से कम हो जाएंगी कंप्यूटर वाली नौकरियां? श्रीधर वेम्बू ने बताया आगे क्या बदल सकता है

उन्होंने बताया कि AI का सही इस्तेमाल करने वाला एक जानकार व्यक्ति ऐसे कई काम अकेले कर सकता है, जिनके लिए पहले 10 कर्मचारियों की जरूरत पड़ती थी।

वेम्बू के मुताबिक, यह संभावना अब पहले से ज्यादा वास्तविक होती जा रही है। ऐसे में कंपनियों के काम करने के तरीके और कर्मचारियों की जरूरतों में बदलाव आ सकता है।

हालांकि, 10 लोगों के बराबर काम करने की बात उनकी भविष्य संबंधी चेतावनी है। इसे सभी नौकरियों में उत्पादकता 10 गुना बढ़ जाने का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।

क्या 90 प्रतिशत लोगों की नौकरी चली जाएगी?

वेम्बू ने इस सवाल पर भी अपनी बात साफ की है। उन्होंने कहा कि यदि AI की मदद से एक व्यक्ति 10 लोगों के बराबर काम करने लगे, तो इसका मतलब यह नहीं कि बाकी 90 प्रतिशत कर्मचारियों के पास कोई काम नहीं बचेगा।

उनके अनुसार, तकनीक के कारण सेवाओं की लागत कम हो सकती है। इससे ऐसे छोटे कारोबार भी विशेषज्ञ कर्मचारियों की सेवाएं ले सकेंगे, जिनके लिए पहले यह खर्च उठाना मुश्किल था।

उदाहरण के तौर पर, जिन कंपनियों के पास सॉफ्टवेयर इंजीनियर या डिजिटल मार्केटिंग विशेषज्ञ रखने का बजट नहीं था, वे भविष्य में इन्हें नियुक्त कर सकती हैं।

नौकरियों के बदलने का दौर आसान नहीं होगा

श्रीधर वेम्बू का मानना है कि AI का असर केवल आईटी कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों में काम और रोजगार का बंटवारा बदल सकता है।

कुछ पुराने कामों की जरूरत कम हो सकती है, जबकि नए तरह की सेवाओं और कारोबार में रोजगार के अवसर सामने आ सकते हैं।

हालांकि, वेम्बू ने चेताया कि इस बदलाव से गुजरना कर्मचारियों और कंपनियों के लिए मुश्किल हो सकता है। उनके मुताबिक, लोगों को इस बदलाव के लिए पहले से तैयार रहना चाहिए।

AI से सॉफ्टवेयर बनाने के काम में कितना बदलाव आया?

श्रीधर वेम्बू ने 13 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखी थी। इसमें उन्होंने बताया कि AI के इस्तेमाल से सॉफ्टवेयर कंपनियों के कामकाज में क्या बदलाव आ रहे हैं। उनका अनुमान है कि फिलहाल AI की मदद से सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट का काम करीब 25 से 50 प्रतिशत तक बढ़ा है।

वेम्बू के मुताबिक, AI से किसी ऐप या सॉफ्टवेयर का शुरुआती मॉडल कम समय में तैयार किया जा सकता है। लेकिन उसे लोगों के इस्तेमाल के लायक बनाने में अभी भी काफी मेहनत लगती है।

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