तृणमूल कांग्रेस के 20 लोकसभा सांसदों ने NCPI में विलय की घोषणा कर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। बागी गुट ने NDA को समर्थन देने की बात कही, जबकि महुआ मोइत्रा ने सुदीप बंद्योपाध्याय पर पार्टी से गद्दारी का आरोप लगाया।
नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) को उस समय बड़ा झटका लगा जब पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों ने खुद को अलग गुट बताते हुए त्रिपुरा स्थित नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय का दावा किया। इस घटनाक्रम ने न केवल बंगाल की राजनीति को हिला दिया है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।
बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपकर अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की है। उनका कहना है कि उनके पास पार्टी के दो-तिहाई से अधिक सांसदों का समर्थन है और वे आगे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ मिलकर काम करेंगे।
बागी सांसदों का दावा- NDA के साथ करेंगे काम
बागी गुट की ओर से सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि सांसदों के इस समूह ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत नया राजनीतिक रास्ता चुना है। उनके अनुसार, यह फैसला लंबे विचार-विमर्श के बाद लिया गया है और अब यह गुट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली NDA सरकार को समर्थन देगा।
उन्होंने यह भी कहा कि संसद में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की गई है ताकि नए राजनीतिक समीकरण को औपचारिक रूप से दर्शाया जा सके। यदि यह मांग स्वीकार होती है तो लोकसभा में TMC की संख्या और प्रभाव दोनों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
ममता बनर्जी खेमे की तीखी प्रतिक्रिया
इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद TMC नेतृत्व ने कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि यह कदम जनता के जनादेश के साथ विश्वासघात है और इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए बागी नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने विशेष रूप से वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय को निशाने पर लेते हुए कहा कि उन्होंने पार्टी और नेतृत्व के भरोसे को तोड़ा है। महुआ की टिप्पणी से स्पष्ट है कि पार्टी के भीतर असंतोष और नाराजगी का स्तर काफी बढ़ चुका है।
लोकसभा अध्यक्ष के सामने पहुंचा मामला
बागी सांसदों और ममता बनर्जी गुट के बीच संघर्ष अब संसदीय प्रक्रिया का हिस्सा बन चुका है। एक ओर बागी गुट ने लोकसभा अध्यक्ष से अलग पहचान और बैठने की व्यवस्था की मांग की है, वहीं दूसरी ओर TMC नेतृत्व ने अध्यक्ष को पत्र लिखकर इस गुट को मान्यता नहीं देने का अनुरोध किया है।
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राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में लोकसभा अध्यक्ष की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी क्योंकि उनके फैसले से संसदीय स्थिति स्पष्ट होगी। हालांकि अंतिम कानूनी और राजनीतिक निर्णय लंबी प्रक्रिया के बाद ही सामने आ सकता है।
दल-बदल कानून से बचने की रणनीति?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बागी सांसदों द्वारा किसी अन्य पार्टी में विलय का दावा करने के पीछे दल-बदल विरोधी कानून से बचने की रणनीति भी हो सकती है। भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुसार यदि किसी दल के कम से कम दो-तिहाई सांसद किसी दूसरे राजनीतिक दल में विलय का निर्णय लेते हैं तो उन्हें अयोग्यता से राहत मिल सकती है।
बागी नेताओं का दावा है कि उनके पास आवश्यक संख्या मौजूद है और इसलिए उनकी कार्रवाई संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप है। हालांकि इस दावे की वैधता पर अंतिम फैसला संसदीय और न्यायिक प्रक्रियाओं के बाद ही होगा।
असली TMC कौन? अब अदालत तक पहुंच सकता है विवाद
राजनीतिक संकट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि दोनों पक्ष खुद को असली TMC बताने की तैयारी कर रहे हैं। बागी नेताओं का कहना है कि उनके पास पार्टी के अधिकांश सांसदों का समर्थन है, इसलिए भविष्य में वे पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर भी दावा पेश कर सकते हैं।
दूसरी ओर, ममता बनर्जी और उनके समर्थक इस दावे को पूरी तरह खारिज कर रहे हैं। ऐसे में मामला चुनाव आयोग और अदालतों तक पहुंच सकता है। यदि विवाद लंबा खिंचता है तो पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए शक्ति समीकरण उभर सकते हैं।
NCPI क्या है और अचानक चर्चा में कैसे आई?
जिस पार्टी में TMC सांसदों के विलय का दावा किया गया है, वह नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) है। यह त्रिपुरा की एक पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी है। अब तक इसका प्रभाव सीमित रहा है और यह राष्ट्रीय राजनीति में लगभग अज्ञात रही है।
पार्टी ने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में कुछ सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन उसे उल्लेखनीय सफलता नहीं मिली थी। चुनावी प्रदर्शन भी बेहद कमजोर रहा था और पार्टी राज्य स्तर पर भी कोई बड़ा राजनीतिक प्रभाव स्थापित नहीं कर सकी थी।
यही कारण है कि अचानक राष्ट्रीय स्तर के सांसदों के इस पार्टी में विलय के दावे ने राजनीतिक हलकों को चौंका दिया है।
NCPI नेताओं ने भी जताई हैरानी
दिलचस्प बात यह है कि NCPI से जुड़े कुछ स्थानीय नेताओं ने भी इस घटनाक्रम पर आश्चर्य व्यक्त किया है। रिपोर्टों के अनुसार पार्टी से जुड़े कई लोगों को इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की पहले से जानकारी नहीं थी।
इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि आने वाले दिनों में NCPI की संगठनात्मक संरचना और नेतृत्व में क्या बदलाव होंगे। यदि बड़ी संख्या में सांसद वास्तव में इस पार्टी का हिस्सा बनते हैं, तो यह पार्टी अचानक राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान हासिल कर सकती है।
बंगाल और राष्ट्रीय राजनीति पर संभावित असर
TMC में संभावित विभाजन का असर केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं रहेगा। लोकसभा में विपक्षी राजनीति की रणनीति, INDIA गठबंधन की ताकत और NDA की संख्या पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।
यदि बागी सांसद NDA का समर्थन जारी रखते हैं, तो केंद्र सरकार को संसदीय स्तर पर अतिरिक्त मजबूती मिल सकती है। वहीं पश्चिम Bengal में विपक्ष और सत्तारूढ़ दल दोनों के लिए राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।








