UN में ईरानी राष्ट्रपति पजशकियान का पलटवार, दिखाईं मारे गए बच्चों की तस्वीरें; बोले- ‘हम आतंक के शिकार’

राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने UN महासभा में अमेरिका और इजराइल पर निशाना साधा। उन्होंने अयातुल्लाह खामेनेई और मारे गए बच्चों की तस्वीरें दिखाईं। हम आतंक का शिकार

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने UN महासभा में अमेरिका और इजराइल पर निशाना साधा। उन्होंने अयातुल्लाह खामेनेई और मारे गए बच्चों की तस्वीरें दिखाईं। पजशकियान ने ईरान को आतंक का पीड़ित बताया और शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम का अधिकार बरकरार रखने की बात कही।

न्यूयोर्क: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने 23 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में अमेरिका और इजराइल के खिलाफ तीखा बयान दिया। उन्होंने ईरान को आतंकवाद का शिकार बताया, दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की तस्वीर उठाई और मिनाब स्कूल हमले में मारे गए बच्चों की तस्वीरें दिखाईं। उनका भाषण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक दिन पहले दिए गए भाषण के सीधे जवाब के तौर पर देखा गया।

पजशकियान ने UN में क्या कहा?

पजशकियान ने अपने भाषण में कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति ईरान को आतंकवादी बताते हैं, लेकिन ईरानी जनता खुद आतंकवाद की पीड़ित रही है। उन्होंने कहा कि ईरान ने पिछले दो सदियों से किसी दूसरे देश या क्षेत्र पर हमला नहीं किया और उसका सैन्य रुख मुख्य रूप से रक्षा पर केंद्रित रहा है। ईरानी राष्ट्रपति ने अपने भाषण के दौरान अयातुल्लाह अली खामेनेई की तस्वीर भी दिखाई। उन्होंने खामेनेई की हत्या को अमेरिका की कार्रवाई बताते हुए इसे आतंकवाद करार दिया। साथ ही उन्होंने मिनाब में एक स्कूल पर हुए हमले में मारे गए बच्चों की तस्वीरें भी सदन में दिखाईं।

मिनाब स्कूल हमले को लेकर संयुक्त राष्ट्र की एक स्वतंत्र जांच में कहा गया है कि अमेरिकी हमले के संबंध में युद्ध अपराध के निष्कर्ष के लिए पर्याप्त आधार मिले हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी को शाजारेह तैय्यबेह प्राथमिक स्कूल पर हमले में 150 से अधिक लोग मारे गए, जिनमें लगभग 120 बच्चे शामिल थे।

1. ईरान को ‘आतंक का शिकार’ बताने की कोशिश

पजशकियान के भाषण का पहला प्रमुख संदेश ईरान को हमलावर के बजाय पीड़ित के रूप में पेश करना था। उन्होंने अमेरिका द्वारा लगाए जा रहे आतंकवाद के आरोपों को खारिज किया और ईरान पर हुए सैन्य हमलों तथा नागरिकों की मौतों को सामने रखा।

मिनाब स्कूल की तस्वीरें दिखाना इसी संदेश का हिस्सा था। संयुक्त राष्ट्र की हालिया जांच ने भी स्कूल हमले को लेकर अमेरिकी जिम्मेदारी के संबंध में गंभीर निष्कर्ष दिए हैं। हालांकि, अमेरिका ने इन निष्कर्षों को स्वीकार नहीं किया है। इस तरह पजशकियान ने UNGA के मंच का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों का जवाब देने और युद्ध में नागरिकों की स्थिति को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने रखने के लिए किया।

2. ट्रंप की ‘तबाही’ वाली चेतावनी का जवाब

पजशकियान का भाषण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के UN भाषण के एक दिन बाद आया। ट्रंप ने 22 सितंबर को चेतावनी दी थी कि अगर ईरान के साथ परमाणु समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका उसके खिलाफ बेहद कठोर सैन्य कार्रवाई कर सकता है। Reuters के अनुसार, ट्रंप ने ईरान को लेकर ‘annihilate’ यानी पूरी तरह तबाह करने तक की चेतावनी दी थी।

इसके जवाब में पजशकियान ने कहा कि ईरान दबाव में झुकने वाला नहीं है। हालांकि उन्होंने बातचीत और कूटनीति का रास्ता खुला रखने की बात भी कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान बातचीत, कूटनीति और समझौते के लिए तैयार है, लेकिन सैन्य दबाव या धमकी की भाषा स्वीकार नहीं करेगा।

3. परमाणु कार्यक्रम पर ईरान का रुख साफ

पजशकियान ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी अपना रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि ईरान परमाणु हथियार नहीं चाहता, लेकिन शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक के अधिकार को भी नहीं छोड़ेगा। उन्होंने परमाणु तकनीक को ऊर्जा और विकास से जोड़ा तथा कहा कि परमाणु विवाद का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं हो सकता। उनका संदेश था कि ईरान शांतिपूर्ण परमाणु गतिविधियों पर अपना अधिकार बनाए रखना चाहता है, जबकि परमाणु हथियार बनाने से इनकार करता है।

उन्होंने इजराइल की परमाणु क्षमता को लेकर भी सवाल उठाया और कहा कि अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण का दबाव मुख्य रूप से ईरान पर डाला जाता है। यह ईरान की उस लंबे समय से चली आ रही दलील का हिस्सा है जिसमें वह पश्चिमी देशों पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाता रहा है।

4. गाजा और पश्चिमी देशों की नीतियों पर निशाना

पजशकियान ने गाजा और फिलिस्तीन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि फिलिस्तीन की स्थिति अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की विफलता को दर्शाती है और पश्चिम एशिया में स्थायी शांति फिलिस्तीन के सवाल के समाधान के बिना संभव नहीं होगी।

उन्होंने अमेरिका और पश्चिमी देशों की नीतियों पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब क्षेत्र में आम नागरिक मारे जाते हैं तो अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं कर पातीं। यह बयान ईरान के उस कूटनीतिक प्रयास का हिस्सा था जिसमें वह अपने खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दबाव को गाजा और क्षेत्रीय संघर्ष के व्यापक संदर्भ से जोड़ना चाहता है।

5. प्रतिबंधों और आर्थिक दबाव का मुद्दा

पजशकियान ने अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर भी सवाल उठाए। ईरान लंबे समय से यह दावा करता रहा है कि प्रतिबंधों का असर सरकार के बजाय आम नागरिकों, स्वास्थ्य व्यवस्था और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

ईरान की आर्थिक स्थिति पहले से ही चुनौतीपूर्ण रही है और 2026 के संघर्ष ने दबाव बढ़ाया है। ब्रिटेन की हाउस ऑफ कॉमन्स लाइब्रेरी के अनुसार, अगस्त 2026 में ईरान की सालाना महंगाई दर 84% तक पहुंच गई और ईरानी मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर चली गई।

संघर्ष के शुरुआती महीनों में संयुक्त राष्ट्र की मानवीय रिपोर्ट ने भी बड़े पैमाने पर मानवीय नुकसान दर्ज किया था। 3 अप्रैल तक 2,100 से अधिक नागरिकों के मारे जाने, 27,900 से अधिक लोगों के घायल होने और 38 लाख से अधिक लोगों के प्रभावित होने की रिपोर्ट थी। इसी अवधि में 1.15 लाख से अधिक नागरिक इकाइयों को नुकसान पहुंचने की जानकारी दी गई थी।

6. UN की भूमिका और निष्पक्षता पर सवाल

पजशकियान ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भूमिका पर भी सवाल उठाया। उनका तर्क था कि अगर अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं नागरिकों की रक्षा के लिए बनी हैं तो उन्हें पश्चिम एशिया में लगातार हो रहे संघर्षों और मानवीय संकटों पर अधिक प्रभावी कदम उठाने चाहिए।

उन्होंने गाजा सहित क्षेत्रीय संघर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की विश्वसनीयता तभी बनी रह सकती है जब उसके नियम सभी देशों पर समान रूप से लागू हों।

हालांकि, संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को लेकर यह भी महत्वपूर्ण है कि उसके विभिन्न निकायों ने ईरान में अमेरिकी हमलों के साथ-साथ ईरानी सरकार के खिलाफ मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोपों की भी जांच की है। हालिया UN fact-finding mission ने अमेरिका पर संभावित युद्ध अपराधों के आरोपों के साथ ईरानी अधिकारियों पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोप भी दर्ज किए हैं।

अमेरिका ने भाषण के दौरान क्या किया?

पजशकियान के संबोधन के दौरान अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की सीटें खाली रहीं। यह घटनाक्रम दोनों देशों के बीच मौजूदा तनाव को दर्शाता है।

पजशकियान का भाषण ऐसे समय आया जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के बावजूद कूटनीतिक संपर्क की संभावना बनी हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक, न्यूयॉर्क में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के बीच बैठक भी हुई।

इससे संकेत मिलता है कि सार्वजनिक मंच पर दोनों पक्षों की बयानबाजी तीखी है, लेकिन पर्दे के पीछे बातचीत की संभावना पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी ईरान का संदेश

पजशकियान ने रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ईरान अपने जलक्षेत्र और नौवहन अधिकारों को किसी बाहरी दबाव के अधीन नहीं करेगा।

होर्मुज दुनिया के लिए महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग है। संघर्ष के दौरान इसके आसपास तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल और ऊर्जा बाजारों पर असर पड़ा है। पजशकियान ने क्षेत्रीय सुरक्षा का समाधान बाहरी शक्तियों के बजाय पश्चिम एशियाई देशों के बीच सहयोग से निकालने की वकालत की।

भाषण का व्यापक संदेश क्या रहा?

पजशकियान के UN भाषण को छह प्रमुख संदेशों में समझा जा सकता है—ईरान को पीड़ित के रूप में पेश करना, ट्रंप की सैन्य धमकी का जवाब देना, शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के अधिकार पर जोर देना, इजराइल और पश्चिमी देशों की नीतियों पर सवाल उठाना, प्रतिबंधों के मानवीय असर को सामने रखना और संयुक्त राष्ट्र की प्रभावशीलता पर प्रश्न उठाना।

साथ ही, पजशकियान ने बातचीत का विकल्प खुला रखा। उन्होंने कहा कि ईरान कूटनीति और बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन धमकी और सैन्य दबाव की भाषा स्वीकार नहीं करेगा। ऐसे में उनका भाषण एक तरफ युद्ध के बीच ईरान के कड़े रुख को दिखाता है, तो दूसरी तरफ कूटनीतिक समाधान की संभावना को भी पूरी तरह बंद नहीं करता।

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