इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी UNGA 2026 की हाई-लेवल बैठक में शामिल नहीं हुईं। उन्होंने व्यस्त कार्यक्रम को वजह बताया। उनकी जगह विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने इटली का प्रतिनिधित्व किया। मेलोनी की गैरमौजूदगी ऐसे समय हुई है जब ट्रंप से उनके मतभेद चर्चा में हैं।
रोम: इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी इस साल संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की हाई-लेवल बैठक में शामिल नहीं हुईं। मेलोनी ने अपनी गैरमौजूदगी के लिए व्यस्त कार्यक्रम और घरेलू मामलों में ध्यान देने की जरूरत बताई है। उनकी जगह इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी न्यूयॉर्क में देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। यह घटनाक्रम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि मेलोनी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हाल के महीनों में कई मुद्दों पर सार्वजनिक मतभेद सामने आए हैं।
15 साल बाद UNGA में नहीं पहुंचा इटली का प्रधानमंत्री
मेलोनी की गैरमौजूदगी ने इटली के लिए एक लंबे सिलसिले को तोड़ा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 15 वर्षों बाद पहली बार इटली का कोई प्रधानमंत्री संयुक्त राष्ट्र महासभा की वार्षिक हाई-लेवल जनरल डिबेट में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हुआ। हालांकि, कोविड-19 महामारी के दौरान 2020 की UNGA मुख्य रूप से वर्चुअल प्रारूप में हुई थी, इसलिए उस वर्ष की परिस्थितियां अलग थीं।
मेलोनी ने कहा है कि हाल के हफ्तों में उनका कार्यक्रम बेहद व्यस्त रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने साढ़े तीन सप्ताह में छह शिखर सम्मेलनों में हिस्सा लिया और इटली में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर काम करना बाकी है। इटली के प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़े सूत्रों ने भी कहा कि यह फैसला घरेलू जिम्मेदारियों और व्यस्त अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के संदर्भ में लिया गया है।
एंटोनियो ताजानी ने संभाली इटली की प्रतिनिधित्व की जिम्मेदारी
मेलोनी की अनुपस्थिति में विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी न्यूयॉर्क में इटली के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। इटली के विदेश मंत्रालय के अनुसार, ताजानी 21 से 24 सितंबर तक न्यूयॉर्क में UNGA के विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। उन्होंने महासभा के उद्घाटन में इटली का प्रतिनिधित्व किया और कई देशों के विदेश मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कीं।
ताजानी ने मेलोनी की अनुपस्थिति को संयुक्त राष्ट्र के प्रति इटली की प्रतिबद्धता में कमी के तौर पर देखने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि इटली संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक शांति हासिल करने के लिए एक महत्वपूर्ण संस्था मानता है और संगठन को मजबूत भूमिका देने का समर्थन करता है।
23 सितंबर को ताजानी ने UNGA में इटली की ओर से बयान भी दिया। इटली के विदेश मंत्रालय के अनुसार, उनकी न्यूयॉर्क यात्रा के दौरान यूक्रेन, पश्चिमी बाल्कन, शिक्षा, मध्य पूर्व और अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर कई बैठकें निर्धारित थीं।
मेलोनी और ट्रंप के बीच क्यों बढ़ा तनाव?
मेलोनी और ट्रंप के संबंध पहले अपेक्षाकृत करीबी माने जाते रहे हैं। लेकिन 2026 में दोनों नेताओं के बीच कई मुद्दों पर सार्वजनिक मतभेद सामने आए हैं।
सबसे चर्चित विवाद जून में फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के बाद सामने आया। ट्रंप ने एक इतालवी टेलीविजन इंटरव्यू में दावा किया था कि मेलोनी उनके साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए बेताब थीं और उन्होंने इसके लिए उनसे आग्रह किया था। मेलोनी ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा था कि यह बात पूरी तरह गढ़ी हुई है और उन्होंने या इटली ने कभी किसी से इस तरह आग्रह नहीं किया।
इस विवाद के बाद दोनों नेताओं के बीच संबंधों को लेकर सार्वजनिक चर्चा तेज हुई। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रकरण के बाद इटली के विदेश मंत्री ताजानी ने अमेरिका की एक यात्रा रद्द की थी और एक अमेरिकी-इतालवी कारोबारी सम्मेलन भी रद्द हुआ था। मेलोनी के सहयोगी जियोवानबातिस्ता फज्जोलारी ने भी ट्रंप के बयान की आलोचना की थी और कहा था कि ऐसे बयानों से अमेरिका-यूरोप संबंधों को नुकसान पहुंच सकता है।
ईरान युद्ध पर भी दोनों के रुख अलग रहे
अमेरिका और इटली के बीच ईरान को लेकर भी मतभेद सामने आए। अमेरिकी प्रशासन की ईरान नीति और सैन्य कार्रवाई के संदर्भ में मेलोनी का रुख ट्रंप से पूरी तरह समान नहीं रहा।
मेलोनी ने ईरान से जुड़े संकट के दौरान कूटनीतिक समाधान और यूरोपीय सहयोग पर जोर दिया। वहीं ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और दबाव की नीति का बचाव किया। इसी व्यापक अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच अमेरिका और यूरोप के बीच मध्य पूर्व नीति को लेकर मतभेद भी चर्चा का विषय रहे हैं।
हालांकि, इटली और अमेरिका के बीच सुरक्षा संबंध बने हुए हैं। इटली NATO का सदस्य है और देश में अमेरिकी सैन्य सुविधाएं मौजूद हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच राजनीतिक मतभेदों के बावजूद व्यापक रक्षा और सुरक्षा सहयोग जारी है।
G7 में साथ नजर आए थे ट्रंप और मेलोनी
जून 2026 में फ्रांस में हुए G7 शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप और मेलोनी कई मौकों पर साथ दिखाई दिए थे। दोनों नेताओं की बातचीत और तस्वीरों से उस समय यह संकेत मिला था कि अमेरिका और इटली के बीच संवाद जारी है।
हालांकि, G7 के बाद ट्रंप की तस्वीर संबंधी टिप्पणी ने दोनों नेताओं के रिश्तों को लेकर एक नया विवाद पैदा कर दिया। मेलोनी की ओर से सार्वजनिक प्रतिक्रिया आने के बाद यह मामला अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी चर्चा का विषय बना।
इसलिए इस बार UNGA में मेलोनी की अनुपस्थिति को कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों ने ट्रंप के साथ संभावित आमने-सामने की मुलाकात न होने के संदर्भ में भी देखा है। लेकिन इटली सरकार की ओर से आधिकारिक कारण के तौर पर व्यस्त कार्यक्रम और घरेलू जिम्मेदारियों का उल्लेख किया गया है।

मेलोनी पहले ट्रंप की करीबी यूरोपीय सहयोगी रही हैं
मेलोनी और ट्रंप के बीच राजनीतिक और वैचारिक समानताओं के कारण दोनों के संबंधों को पहले करीबी माना जाता था। मेलोनी जनवरी 2025 में ट्रंप के राष्ट्रपति पद के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने वाली प्रमुख यूरोपीय नेताओं में थीं।
इसके बाद उन्होंने अमेरिका और यूरोप के बीच संवाद बनाए रखने पर जोर दिया। कई मौकों पर मेलोनी ने अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच मतभेद कम करने के लिए बातचीत की वकालत की।
लेकिन 2026 में ईरान, NATO, यूरोपीय सुरक्षा और अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को लेकर दोनों सरकारों के रुख में अंतर दिखाई दिया। जून का G7 विवाद इस सार्वजनिक तनाव का सबसे चर्चित उदाहरण बना।
UNGA में इस बार कई बड़े नेता गैरमौजूद
इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र महासभा की हाई-लेवल बैठक में मेलोनी अकेली प्रमुख नेता नहीं हैं जो न्यूयॉर्क नहीं पहुंचीं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज भी व्यक्तिगत रूप से महासभा में मौजूद नहीं हैं। DW के अनुसार, 50 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख इस वर्ष UNGA में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो रहे हैं।
Reuters के अनुसार, इस साल लगभग 130 विश्व नेता UNGA के लिए जुटे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने महासभा में हिस्सा लिया और विभिन्न देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकों का कार्यक्रम भी बनाया।
भारत, चीन और रूस की ओर से भी शीर्ष नेतृत्व अनुपस्थित
भारत की ओर से भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस साल UNGA में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हुए हैं। चीन की ओर से राष्ट्रपति शी जिनपिंग की जगह उपराष्ट्रपति प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जबकि रूस की ओर से विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव महासभा में देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
ऐसे में 2026 की UNGA बैठक में शीर्ष नेताओं की गैरमौजूदगी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का एक महत्वपूर्ण विषय बनी हुई है। हालांकि, अधिकांश देशों ने अपने विदेश मंत्रियों, उपराष्ट्रपतियों या अन्य वरिष्ठ प्रतिनिधियों के माध्यम से महासभा में भागीदारी सुनिश्चित की है।
मेलोनी की गैरमौजूदगी का राजनीतिक संदर्भ
मेलोनी के न्यूयॉर्क नहीं पहुंचने का आधिकारिक कारण व्यस्त कार्यक्रम है। इटली सरकार ने स्पष्ट किया है कि उनकी अनुपस्थिति को संयुक्त राष्ट्र से दूरी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। विदेश मंत्री ताजानी ने भी कहा है कि इटली संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक शांति के लिए महत्वपूर्ण संस्था मानता है।
दूसरी ओर, मेलोनी की गैरमौजूदगी का समय ऐसा है जब उनके और ट्रंप के बीच कई सार्वजनिक मतभेद सामने आ चुके हैं। इसलिए अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इसे दोनों नेताओं की संभावित आमने-सामने मुलाकात से बचने के संदर्भ में भी रिपोर्ट किया गया है। हालांकि, मेलोनी की ओर से UNGA में न जाने के फैसले को ट्रंप से बचने की वजह बताया नहीं गया है।
इस वर्ष इटली की UNGA भागीदारी इसलिए महत्वपूर्ण बनी हुई है क्योंकि प्रधानमंत्री की जगह विदेश मंत्री ताजानी ने देश का प्रतिनिधित्व किया है। इससे इटली की कूटनीतिक भागीदारी जारी है, जबकि मेलोनी ने घरेलू और अन्य अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों पर ध्यान केंद्रित किया है।










