UNGA में एर्दोगन ने फिर उठाया कश्मीर मुद्दा, बोले- बातचीत से हो समाधान; गाजा पर इजराइल की आलोचना

तुर्किये के राष्ट्रपति एर्दोगन ने UNGA में फिर कश्मीर का मुद्दा उठाया और बातचीत से समाधान की बात कही। गाजा पर इजराइल की आलोचना कर फिलिस्तीन का समर्थन किया।

तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने UN महासभा में फिर कश्मीर का मुद्दा उठाते हुए विवाद को बातचीत से सुलझाने की बात कही। उन्होंने गाजा और फिलिस्तीन का भी मुद्दा उठाया। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, भाषण के दौरान इजराइली प्रतिनिधि बाहर चले गए।

न्यूयॉर्क: तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में एक बार फिर कश्मीर मुद्दे का जिक्र किया। मंगलवार को UN महासभा के जनरल डिबेट में बोलते हुए एर्दोगन ने कहा कि दक्षिण एशिया में कश्मीर समेत सभी विवादों का समाधान बातचीत और संयुक्त राष्ट्र चार्टर तथा संबंधित प्रस्तावों के दायरे में होना चाहिए। एर्दोगन की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत लगातार कश्मीर को भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मुद्दा बताता रहा है और तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करता। तुर्किये के राष्ट्रपति इससे पहले भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर का मुद्दा उठा चुके हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, 2019 से 2026 के बीच उन्होंने 2024 को छोड़कर सात बार UN महासभा में कश्मीर का उल्लेख किया है।

एर्दोगन ने कश्मीर पर क्या कहा?

UN महासभा में अपने भाषण के दौरान एर्दोगन ने दक्षिण एशिया में विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कश्मीर सहित क्षेत्र के विवादों को बातचीत के जरिए और संयुक्त राष्ट्र के नियमों तथा संबंधित प्रस्तावों के अनुरूप हल किया जाना चाहिए। एर्दोगन का यह बयान तुर्किये की लंबे समय से चली आ रही कूटनीतिक स्थिति के अनुरूप है। तुर्किये पहले भी कश्मीर विवाद पर भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत तथा संवाद की वकालत करता रहा है।

भारत का रुख इससे अलग रहा है। नई दिल्ली कश्मीर मुद्दे पर किसी तीसरे देश की मध्यस्थता का विरोध करता है और इसे भारत-पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय विषय मानता है। इसलिए UNGA में एर्दोगन की टिप्पणी का भारत की विदेश नीति के संदर्भ में विशेष महत्व है। हालांकि, एर्दोगन का बयान किसी नए समझौते या संयुक्त राष्ट्र के नए प्रस्ताव की घोषणा नहीं था, बल्कि तुर्किये की मौजूदा कूटनीतिक स्थिति की पुनरावृत्ति था।

2019 से सातवीं बार कश्मीर का जिक्र

एर्दोगन ने 2019 के बाद से संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर कई बार कश्मीर का उल्लेख किया है। उपलब्ध सामग्री के अनुसार, 2019, 2020, 2021, 2022, 2023, 2025 और 2026 में उन्होंने इस मुद्दे को उठाया, जबकि 2024 में उन्होंने इसका जिक्र नहीं किया। इस तरह 2019 से अब तक यह सातवीं बार है जब उन्होंने UNGA में कश्मीर का मुद्दा उठाया।

कश्मीर का मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से विवाद का विषय रहा है। दोनों देश जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग हिस्सों पर प्रशासनिक नियंत्रण रखते हैं और क्षेत्र को लेकर उनके बीच कई दशकों से मतभेद हैं।

एर्दोगन का रुख पाकिस्तान के साथ तुर्किये के करीबी संबंधों के संदर्भ में भी देखा जाता है। हालांकि, किसी नेता के बयान और उसके पीछे के राजनयिक उद्देश्यों के बारे में निष्कर्ष निकालने के लिए अतिरिक्त प्रमाण की आवश्यकता होगी।

गाजा और फिलिस्तीन पर भी एर्दोगन का जोर

अपने भाषण में एर्दोगन ने कश्मीर के अलावा गाजा और फिलिस्तीन के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने गाजा में इजराइल की सैन्य कार्रवाई की आलोचना की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से फिलिस्तीनी राज्य की मान्यता के समर्थन का आग्रह किया।

एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की भी मांग की। उन्होंने कहा कि 190 से अधिक देशों की इच्छा पांच स्थायी सदस्यों के फैसलों पर निर्भर रहने वाली मौजूदा व्यवस्था प्रतिनिधित्व और वैश्विक भरोसे के लिहाज से पर्याप्त नहीं है। उन्होंने सुरक्षा परिषद के मौजूदा ढांचे में व्यापक बदलाव की आवश्यकता बताई।

उन्होंने फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास की UN महासभा में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं होने का भी जिक्र किया। अब्बास को लगातार दूसरे वर्ष अमेरिका ने न्यूयॉर्क आने के लिए वीजा नहीं दिया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने उन्हें वीडियो के जरिए संबोधित करने की अनुमति दी है।

इजराइली प्रतिनिधिमंडल के बाहर जाने का दावा

एर्दोगन के फिलिस्तीन और गाजा पर भाषण के दौरान इजराइली प्रतिनिधियों के UN महासभा हॉल से बाहर जाने की बात सामने आई। उपलब्ध स्रोत सामग्री में भी इस घटनाक्रम का उल्लेख है।

एर्दोगन लंबे समय से इजराइल की गाजा नीति के मुखर आलोचक रहे हैं। मंगलवार के भाषण में भी उन्होंने गाजा की मानवीय स्थिति पर कड़ा रुख अपनाया और फिलिस्तीनी राज्य को व्यापक अंतरराष्ट्रीय मान्यता देने की अपील की। रॉयटर्स के अनुसार, उन्होंने इजराइल पर गाजा में मानवीय संकट पैदा करने का आरोप लगाया, जबकि इजराइल ऐसे आरोपों को खारिज करता रहा है।

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी इस सप्ताह UN महासभा को संबोधित करने वाले हैं। उन्होंने पहले कहा है कि वह UN के मंच से इजराइल की सैन्य कार्रवाई का बचाव करेंगे और अपने देश के खिलाफ लगाए गए आरोपों का जवाब देंगे।

महमूद अब्बास को UN में व्यक्तिगत रूप से आने की अनुमति नहीं

फिलिस्तीन को लेकर UNGA के इस सत्र में एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी प्रशासन ने फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास और अन्य वरिष्ठ फिलिस्तीनी अधिकारियों के वीजा पर प्रतिबंध जारी रखा है।

अमेरिका ने इस कदम के पीछे फिलिस्तीनी प्राधिकरण की उन गतिविधियों का हवाला दिया है जिन्हें वह इजराइल-फिलिस्तीन विवाद को अंतरराष्ट्रीय संस्थानों तक ले जाने और शांति प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला मानता है। फिलिस्तीनी पक्ष ने अमेरिकी फैसले की आलोचना की है।

UN महासभा ने 152 मतों से अब्बास को वीडियो के जरिए संबोधित करने की अनुमति दी थी। तीन देशों ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया, जबकि चार देश मतदान से दूर रहे।

UNGA में मध्य पूर्व का संकट सबसे प्रमुख मुद्दों में

इस साल संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान मध्य पूर्व के कई संकट प्रमुख चर्चा में रहे हैं। गाजा में इजराइल-हमास संघर्ष, अमेरिका-ईरान युद्ध, यमन में हूती संघर्ष और लाल सागर की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विभिन्न देशों के नेताओं ने अपने विचार रखे हैं।

जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय और कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी ने भी गाजा और व्यापक मध्य पूर्व संकट को अपने भाषणों में प्रमुखता दी। एर्दोगन के भाषण में भी गाजा और फिलिस्तीन प्रमुख विषय रहे।

इससे UNGA के मौजूदा सत्र में मध्य पूर्व की सुरक्षा और फिलिस्तीन के भविष्य को लेकर अंतरराष्ट्रीय मतभेदों की व्यापक तस्वीर सामने आती है।

कश्मीर पर भारत का रुख क्या है?

कश्मीर के मुद्दे पर भारत की नीति लंबे समय से स्पष्ट रही है। नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा मानता है और पाकिस्तान के साथ विवादों को द्विपक्षीय बातचीत के जरिए सुलझाने की बात करता है।

भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर मुद्दे पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करता। एर्दोगन की मौजूदा टिप्पणी इसी वजह से भारत के आधिकारिक रुख से अलग दिखाई देती है। तुर्किये के राष्ट्रपति ने हालांकि अपने भाषण में बातचीत और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के दायरे में समाधान की बात कही।

एर्दोगन ने UN सुधार का मुद्दा भी उठाया

कश्मीर और फिलिस्तीन के अलावा एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना में सुधार की मांग की और कहा कि दुनिया के अधिकांश देशों की आवाज पांच स्थायी सदस्यों की निर्णय प्रक्रिया से प्रभावित होती है।

रॉयटर्स के अनुसार, एर्दोगन ने स्थायी सदस्यता और वीटो व्यवस्था की आलोचना करते हुए UN को अधिक प्रतिनिधित्व वाला बनाने की मांग की। रूस ने सुरक्षा परिषद में नए स्थायी सदस्यों को जोड़ने का समर्थन किया, लेकिन मौजूदा वीटो अधिकार बनाए रखने की बात कही।

UNGA में एर्दोगन के बयान का व्यापक संदर्भ

एर्दोगन का 2026 का UNGA भाषण तीन प्रमुख मुद्दों पर केंद्रित रहा—कश्मीर और दक्षिण एशिया में संवाद, गाजा और फिलिस्तीनी राज्य की मान्यता, तथा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार।

कश्मीर पर उनका बयान तुर्किये की पिछली स्थिति की निरंतरता है। दूसरी ओर, फिलिस्तीन को लेकर उनका रुख गाजा में जारी संघर्ष और फिलिस्तीनी राज्य की अंतरराष्ट्रीय मान्यता के सवाल से जुड़ा है।

भारत और इजराइल दोनों ही इन मुद्दों पर तुर्किये के रुख से अलग नीतियां रखते हैं। ऐसे में एर्दोगन के भाषण ने UN महासभा के मंच पर दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व के दो प्रमुख विवादों को एक साथ अंतरराष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया।

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