UP के परिषदीय स्कूल 25 जून से खुलेंगे, हर बच्चे के सीखने के स्तर पर रहेगा फोकस

यूपी के परिषदीय विद्यालय 25 जून से खुलेंगे। नए सत्र में निपुण लक्ष्य, पठन संस्कृति, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और हर बच्चे के सीखने के स्तर पर विशेष ध्यान रहेगा।

उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालय 25 जून से नए शैक्षिक सत्र के लिए खुलेंगे। इस बार छात्रों के सीखने के स्तर में सुधार, निपुण लक्ष्य, पठन संस्कृति और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

Lucknow: ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालय 25 जून से नियमित रूप से संचालित होंगे। बेसिक शिक्षा विभाग ने इस बार केवल पाठ्यक्रम पूरा करने के बजाय प्रत्येक बच्चे की सीखने की क्षमता, शैक्षणिक प्रगति और व्यक्तिगत जरूरतों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही स्कूल चलो अभियान और निपुण भारत मिशन को भी नई गति दी जाएगी।

25 जून से शुरू होगा नियमित शिक्षण कार्य

उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में ग्रीष्मकालीन अवकाश समाप्त होने के बाद 25 जून से नियमित कक्षाएं शुरू होंगी। बेसिक शिक्षा विभाग ने नए शैक्षिक सत्र को लेकर व्यापक तैयारी की है। अधिकारियों का कहना है कि इस वर्ष विद्यालयों में केवल उपस्थिति बढ़ाने पर नहीं, बल्कि बच्चों की वास्तविक सीखने की क्षमता को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।

UP के परिषदीय स्कूल 25 जून से खुलेंगे, हर बच्चे के सीखने के स्तर पर रहेगा फोकस

विद्यालय प्रशासनिक कार्यों के लिए 22 जून से ही खुल चुके हैं। इस दौरान शिक्षकों और स्कूल प्रशासन को नए सत्र की तैयारियां पूरी करने, नामांकन प्रक्रिया को मजबूत करने और शिक्षण योजनाएं तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

हर बच्चे की शैक्षणिक जरूरतों पर रहेगा ध्यान

बेसिक शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को निर्देश दिया है कि वे प्रत्येक छात्र की सीखने की स्थिति का लगातार आकलन करें। जिन बच्चों की पढ़ाई किसी कारणवश अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई है, उनके लिए विशेष "कैच-अप ट्रेनिंग" कार्यक्रम चलाया जाएगा।

शिक्षकों को नियमित फीडबैक देने, आधुनिक शिक्षण पद्धतियां अपनाने और बच्चों के साथ संवाद बढ़ाने के लिए कहा गया है। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा बुनियादी भाषा और गणितीय कौशल में पीछे न रह जाए।

स्कूल चलो अभियान का दूसरा चरण होगा शुरू

नए सत्र के साथ स्कूल चलो अभियान का दूसरा चरण भी शुरू किया जाएगा। इसके तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तीन वर्ष आयु के बच्चों के अभिभावकों से संपर्क कर उन्हें बाल वाटिका से जोड़ेंगी। वहीं छह वर्ष या उससे अधिक आयु के बच्चों का स्कूलों में नामांकन सुनिश्चित किया जाएगा।

कक्षा पांच से छह में प्रवेश लेने वाले बच्चों के लिए संक्रमण काल को आसान बनाने की जिम्मेदारी भी शिक्षकों को सौंपी गई है। विभाग चाहता है कि प्राथमिक से उच्च प्राथमिक स्तर पर जाने वाले बच्चों को किसी प्रकार की शैक्षणिक कठिनाई का सामना न करना पड़े।

पढ़ने की आदत और पुस्तकालय संस्कृति पर जोर

विद्यालयों में बच्चों के बीच पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए विशेष पहल की जाएगी। छात्रों को पुस्तकालय से नियमित रूप से पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी और प्रतिदिन कम से कम आधे घंटे का पठन सत्र आयोजित किया जाएगा।

इसके अलावा लेखन, कला, संस्कृति और रचनात्मक गतिविधियों में भी बच्चों की भागीदारी बढ़ाने की योजना बनाई गई है। विभाग का मानना है कि ऐसी गतिविधियां बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

निपुण अभियान का होगा विस्तार

निपुण भारत मिशन के तहत अब केवल कक्षा एक और दो ही नहीं, बल्कि कक्षा एक से पांच तक के विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। बच्चों के भाषा और गणितीय कौशल को मजबूत करने के लिए हिंदी, अंग्रेजी और गणित के सरल एवं स्पष्ट निपुण लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे।

राज्य स्तरीय रिसोर्स पर्सन का प्रशिक्षण 6 जुलाई से शुरू होगा, जबकि नवंबर और दिसंबर में निपुण आकलन कराया जाएगा। इसके आधार पर छात्रों की सीखने की प्रगति का मूल्यांकन किया जाएगा और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

शिक्षकों को भी मिलेगा प्रशिक्षण

शिक्षकों को डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे दीक्षा पोर्टल, आई-गॉट और टीचर ऐप के माध्यम से प्रशिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। उन्हें एनसीईआरटी की गाइडलाइन और आधुनिक शिक्षण तकनीकों का अध्ययन कर अपने शिक्षण कौशल को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित किया गया है।

विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि रिसोर्स पर्सन और मेंटर शिक्षक केवल निरीक्षण तक सीमित न रहें, बल्कि शिक्षकों की समस्याओं को समझकर उनका समाधान करने में सहयोग करें। उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों के अनुभवों को अन्य विद्यालयों के साथ साझा किया जाएगा।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर रहेगा पूरा फोकस

नए शैक्षिक सत्र में सरकार का लक्ष्य केवल स्कूलों का संचालन नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना है। वर्ष में कम से कम 220 शिक्षण दिवस सुनिश्चित करने के साथ-साथ यह भी देखा जाएगा कि वास्तविक रूप से कितने घंटे प्रभावी शिक्षण हुआ।

बेसिक शिक्षा विभाग का मानना है कि सकारात्मक माहौल, बेहतर शिक्षण पद्धति, नियमित मूल्यांकन और अभिभावकों की भागीदारी से परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाया जा सकता है। यही कारण है कि इस वर्ष हर बच्चे की सीखने की क्षमता को केंद्र में रखकर योजनाएं तैयार की गई हैं।

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