अमेरिकी चुनाव से पहले FEC पर साइबर हमले की कोशिश, चुनावी चंदे की रिपोर्टिंग प्रभावित

अमेरिका में 3 नवंबर के मध्यावधि चुनाव से पहले FEC का ऑनलाइन सिस्टम साइबर हमले के कारण बंद है। चुनावी खर्च की रिपोर्टिंग प्रभावित हुई, लेकिन मतदान पर असर नहीं।

अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले फेडरल इलेक्शन कमीशन के सिस्टम को हैक करने की कोशिश सामने आई है। इससे चुनावी खर्च की ऑनलाइन रिपोर्ट जमा नहीं हो पा रही हैं। हालांकि, मतदान प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी।

US FEC Cyberattack:अमेरिका में मध्यावधि चुनाव से कुछ दिन पहले फेडरल इलेक्शन कमीशन (FEC) के इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग सिस्टम में रुकावट आ गई है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स को मिले एक ईमेल के मुताबिक, हैकर्स ने आयोग के सिस्टम में सेंध लगाने की कोशिश की थी। इसके बाद कुछ ऑनलाइन सेवाएं अस्थायी रूप से बंद करनी पड़ीं। तकनीकी टीम सिस्टम को दोबारा शुरू करने में जुटी है। इस परेशानी के कारण राजनीतिक दलों और चुनावी संगठनों को खर्च की रिपोर्ट जमा करने में दिक्कत हो रही है।

FEC का ऑनलाइन सिस्टम कब से बंद है?

अमेरिका के फेडरल इलेक्शन कमीशन का इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग सिस्टम सोमवार, 26 अक्टूबर की रात करीब 10 बजे से बंद है। आयोग ने अपनी वेबसाइट पर इसकी जानकारी दी है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार रात चुनावी खर्च से जुड़ी रिपोर्ट जमा करने वाले कुछ अधिकारियों को ईमेल भेजा गया था। इसमें बताया गया कि एक संदिग्ध व्यक्ति या समूह FEC के सिस्टम में घुसने की कोशिश कर रहा है। सुरक्षा कारणों से आयोग को अपनी कुछ ऑनलाइन सेवाएं रोकनी पड़ीं।

अमेरिकी चुनाव से पहले FEC पर साइबर हमले की कोशिश, चुनावी चंदे की रिपोर्टिंग प्रभावित

मंगलवार, 27 अक्टूबर की शाम तक तकनीकी टीम ने समस्या की पहचान कर ली थी। इसके बाद उसे ठीक करने का काम शुरू किया गया। हालांकि, 28 अक्टूबर को उपलब्ध जानकारी के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग सिस्टम पूरी तरह बहाल नहीं हुआ था।

आयोग की वेबसाइट पर पहले जमा की गई चुनावी रिपोर्ट देखने और सर्च करने की सुविधा उपलब्ध रही।

चुनाव से ठीक पहले सिस्टम बंद होने से क्या परेशानी?

अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को मध्यावधि चुनाव होने हैं। इस चुनाव में प्रतिनिधि सभा की सभी सीटों और सीनेट की एक तिहाई सीटों पर मतदान होगा।

चुनाव से पहले राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और उनके समर्थन में काम करने वाले संगठनों के खर्च पर नजर रखी जाती है। इसके लिए FEC के पास समय-समय पर रिपोर्ट जमा करनी होती है।

खासकर मतदान के नजदीक आने पर कुछ राजनीतिक खर्चों की जानकारी 24 या 48 घंटे के भीतर देनी होती है। इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग सिस्टम बंद होने के कारण फिलहाल ऐसी नई रिपोर्ट ऑनलाइन जमा नहीं हो पा रही हैं।

इससे चुनाव में किस उम्मीदवार या अभियान पर कितना पैसा खर्च हो रहा है, इसकी ताजा जानकारी सार्वजनिक होने में देरी हो सकती है।

क्या साइबर हमले का असर वोटिंग पर भी पड़ेगा?

FEC के सिस्टम में आई परेशानी का मतदान प्रक्रिया से सीधा संबंध नहीं है। अमेरिका में चुनाव कराने की जिम्मेदारी राज्य और स्थानीय चुनाव अधिकारियों की होती है।

फेडरल इलेक्शन कमीशन मुख्य रूप से संघीय चुनावों में मिलने वाले चंदे और खर्च से जुड़े नियमों की निगरानी करता है।

इसलिए आयोग का फाइलिंग सिस्टम बंद होने से मतदाता सूची, वोट डालने की सुविधा या मतदान केंद्रों के संचालन पर असर पड़ने की जानकारी नहीं है।

अमेरिकी चुनाव अधिकारियों ने भी स्पष्ट किया है कि यह मामला चुनावी फंडिंग की रिपोर्टिंग से जुड़ा है, न कि वोटिंग सिस्टम से।

चुनाव प्रचार में खर्च हो रहे अरबों डॉलर

अमेरिका के इस मध्यावधि चुनाव में प्रचार पर बड़ी रकम खर्च की जा रही है। राजनीतिक विज्ञापनों पर नजर रखने वाली कंपनी AdImpact के मुताबिक, अब तक विज्ञापन खर्च और आगे के लिए बुकिंग मिलाकर लगभग 11.21 अरब डॉलर का आंकड़ा सामने आया है।

यह रकम 2024 के चुनावों के दौरान दर्ज करीब 11.2 अरब डॉलर के आंकड़े से भी अधिक है।

इस चुनाव में सुपर PAC और डार्क मनी समूहों की भूमिका भी चर्चा में है। सुपर PAC ऐसे राजनीतिक संगठन होते हैं, जो व्यक्तियों और कंपनियों से बड़ी रकम लेकर स्वतंत्र रूप से चुनाव प्रचार पर खर्च कर सकते हैं।

वहीं, डार्क मनी समूहों के जरिए होने वाले कुछ राजनीतिक खर्चों में पैसे देने वालों की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं होती।

चुनावी खर्च की निगरानी करने वालों ने क्या कहा?

गैर-पक्षपाती संगठन OpenSecrets के रिसर्च डायरेक्टर ब्रेंडन ग्लेविन के मुताबिक, पिछले सप्ताह सुपर PAC और डार्क मनी समूहों ने रोजाना औसतन पांच करोड़ डॉलर से ज्यादा खर्च किए हैं।

उन्होंने बताया कि 20 अक्टूबर को ही 25 करोड़ डॉलर से अधिक का राजनीतिक खर्च रिपोर्ट किया गया था।

चुनाव से पहले इस तरह के खर्च की जानकारी मिलना पत्रकारों, निगरानी संगठनों और मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण होता है।

राजनीतिक फंडिंग से जुड़े मामलों की सलाह देने वाली कंपनी MBA Consulting Group के स्टीवन मेले ने भी फाइलिंग सिस्टम बंद होने पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि अपने 26 साल के अनुभव में उन्होंने ऐसी स्थिति नहीं देखी।

साइबर हमले की जांच कहां तक पहुंची?

अब तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि FEC के सिस्टम में घुसने की कोशिश किसने की थी। यह भी पुष्टि नहीं हुई है कि हैकर्स किसी संवेदनशील जानकारी तक पहुंच पाए या नहीं।

अमेरिकी जांच एजेंसी FBI और साइबर सुरक्षा से जुड़ी सरकारी एजेंसी CISA ने इस मामले में पूछे गए सवाल FEC के पास भेजे हैं।

फिलहाल आयोग की प्राथमिकता इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग सेवा बहाल करना है, ताकि राजनीतिक संगठन समय पर अपनी खर्च रिपोर्ट जमा कर सकें।

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