विपक्ष ने CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए फिर शुरू की मुहिम, राज्यसभा में 73 सांसदों ने सौंपा नोटिस

Gyanesh Kumar को हटाने की मांग को लेकर विपक्ष ने एक बार फिर मुहिम तेज कर दी है। राज्यसभा में 73 सांसदों ने इस संबंध में नोटिस सौंपा है। इस राजनीतिक घटनाक्रम

पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनावों के बीच राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (Gyanesh Kumar) को पद से हटाने की अपनी मुहिम को एक बार फिर तेज कर दिया है।

नई दिल्ली: भारत की चुनावी राजनीति में एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कई विपक्षी दलों के 73 राज्यसभा सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) Gyanesh Kumar को उनके पद से हटाने के लिए औपचारिक नोटिस सौंपा है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब देश के कई राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं।

विपक्ष का दावा है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठते हैं और निष्पक्षता को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। हालांकि, सरकार और चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर पहले भी कई बार सफाई दी जा चुकी है।

13 विपक्षी दलों का संयुक्त मोर्चा

इस नोटिस पर कुल 13 विपक्षी दलों के सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके, समाजवादी पार्टी, आरजेडी, सीपीआई, सीपीएम, एनसीपी (शरद पवार गुट), शिवसेना (यूबीटी), जेएमएम, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, नेशनल कॉन्फ्रेंस और आम आदमी पार्टी शामिल हैं। हालांकि, हाल ही में राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के कुछ सांसदों के राजनीतिक बदलाव के कारण विपक्षी खेमे की संख्या और स्थिति पर भी असर देखा गया है।

यह पहली बार नहीं है जब विपक्ष ने Gyanesh Kumar को हटाने की कोशिश की है। कुछ सप्ताह पहले भी संसद के दोनों सदनों में ऐसा प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति ने उसे प्रारंभिक जांच के बाद खारिज कर दिया था। उस समय यह कहा गया था कि प्रस्ताव कानूनी और प्रक्रियात्मक मानकों को पूरा नहीं करता है।

विपक्ष के 9 प्रमुख आरोप

विपक्ष ने CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए फिर शुरू की मुहिम, राज्यसभा में 73 सांसदों ने सौंपा नोटिस

कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद Jairam Ramesh ने इस ताजा नोटिस को लेकर कहा कि चुनाव आयुक्त के खिलाफ नौ गंभीर आरोप तैयार किए गए हैं। विपक्ष का दावा है कि ये आरोप विस्तृत दस्तावेजों और तथ्यों पर आधारित हैं। विपक्ष द्वारा लगाए गए प्रमुख आरोपों में शामिल हैं:

  • पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण व्यवहार
  • मतदाता सूची में अनियमितताएं और मताधिकार प्रभावित करना
  • चुनाव आचार संहिता के अनुपालन में असमानता
  • चुनावी शिकायतों पर कार्रवाई में देरी
  • प्रधानमंत्री के सार्वजनिक संबोधनों पर शिकायतों को नजरअंदाज करना
  • चुनावी प्रक्रिया में जांच को बाधित करना
  • मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में पक्षपात के आरोप
  • सत्ताधारी दल के प्रति कथित झुकाव

विपक्ष का कहना है कि इन आरोपों से चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

राजनीतिक टकराव और चुनावी माहौल

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। पश्चिम बंगाल में हाल ही में रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया, जिसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। वहीं विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव आयोग की कुछ नीतियों और प्रक्रियाओं से चुनावी निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।

इस बीच, देश की न्यायिक प्रणाली ने हाल ही में बढ़ते मतदान प्रतिशत को लोकतंत्र के लिए सकारात्मक संकेत बताया है। उच्चतम न्यायालय ने भी चुनावी भागीदारी को मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था का प्रतीक माना है। हालांकि, कुछ राजनीतिक दलों का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना अभी भी एक बड़ी चुनौती है।

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