टाटा समूह का अगला चेयरमैन कौन होगा? नोएल टाटा से TV नरेंद्रन तक, इन दिग्गज नामों पर नजर

Tata Group Next Chairman: एन चंद्रशेखरन के बाद टाटा समूह की कमान कौन संभालेगा? नोएल टाटा, TV नरेंद्रन और अन्य संभावित दावेदारों के नाम चर्चा में हैं।

एन. चंद्रशेखरन के फरवरी 2027 में टाटा संस के चेयरमैन पद से हटने के ऐलान के बाद Tata Group में नए नेतृत्व की तलाश तेज हो गई है। चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को स्पष्ट किया कि वह अपने मौजूदा कार्यकाल के पूरा होने के बाद दोबारा नियुक्ति नहीं मांगेंगे।

Tata Group Succession: एन चंद्रशेखरन ने टाटा संस के चेयरमैन पद पर तीसरा कार्यकाल लेने से इनकार कर दिया है। उनका मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को खत्म होगा। इसके साथ ही टाटा समूह के अगले चेयरमैन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। भारत के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित कारोबारी समूहों में शामिल टाटा ग्रुप में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया अब चर्चा के केंद्र में आ गई है। 

टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने बुधवार को स्पष्ट कर दिया कि वह 20 फरवरी 2027 को मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद इस पद के लिए दोबारा नियुक्ति की पेशकश नहीं करेंगे। टाटा संस ने 2022 में उन्हें पांच साल के दूसरे कार्यकाल के लिए नियुक्त किया था। चंद्रशेखरन के फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि अब टाटा समूह की कमान किसके हाथों में जाएगी। 

कंपनी की ओर से अभी तक किसी उत्तराधिकारी के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि, कारोबारी हलकों में टाटा परिवार से जुड़े वरिष्ठ नामों के साथ-साथ समूह के अनुभवी पेशेवरों पर भी चर्चा शुरू हो गई है।

नोएल टाटा की दावेदारी सबसे अहम

उत्तराधिकारी की संभावित सूची में नोएल टाटा का नाम सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वह टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन हैं। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस में करीब दो-तिहाई हिस्सेदारी है, इसलिए समूह की शीर्ष नेतृत्व व्यवस्था में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। नोएल टाटा रिटेल कारोबार में भी लंबा अनुभव रखते हैं। उनके नेतृत्व में ट्रेंट का कारोबार तेजी से आगे बढ़ा है। 

हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि वह टाटा संस के कार्यकारी चेयरमैन की भूमिका लेना चाहेंगे या किसी पेशेवर को रोजमर्रा के संचालन की जिम्मेदारी देकर खुद गैर-कार्यकारी चेयरमैन की भूमिका निभाएंगे।

सौरभ अग्रवाल भी मजबूत विकल्प

टाटा संस के ग्रुप चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर सौरभ अग्रवाल को भी संभावित अंदरूनी उम्मीदवार के तौर पर देखा जा सकता है। चंद्रशेखरन के कार्यकाल में टाटा समूह ने एयर इंडिया, सेमीकंडक्टर, डिजिटल और अन्य नए क्षेत्रों में बड़े निवेश किए हैं। ऐसे समय में पूंजी प्रबंधन और वित्तीय अनुशासन का अनुभव नए नेतृत्व के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

हालांकि, किसी बड़े कारोबारी समूह के मुख्य कार्यकारी के रूप में अग्रवाल का अनुभव सीमित है। यही वजह है कि उनकी संभावित दावेदारी को लेकर अंतिम तस्वीर अभी साफ नहीं है।

टीवी नरेंद्रन का नाम भी चर्चा में

टाटा स्टील के सीईओ और एमडी टीवी नरेंद्रन समूह के सबसे अनुभवी औद्योगिक नेताओं में से एक हैं। वह लंबे समय से टाटा समूह से जुड़े हुए हैं और स्टील कारोबार के वैश्विक संचालन का अनुभव रखते हैं। यदि टाटा समूह अपने अगले चरण में औद्योगिक विस्तार, विनिर्माण, ऊर्जा और ग्रीन टेक्नोलॉजी पर अधिक जोर देता है, तो नरेंद्रन का अनुभव उपयोगी साबित हो सकता है। 

हालांकि, टाटा समूह अब केवल स्टील और ऑटोमोबाइल तक सीमित नहीं है। एयरलाइन, आईटी, डिजिटल, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में भी उसका विस्तार है। इसलिए अगले चेयरमैन के लिए व्यापक कारोबारी अनुभव महत्वपूर्ण होगा।

क्या बाहरी उम्मीदवार को मिल सकती है कमान?

टाटा समूह की वैश्विक मौजूदगी को देखते हुए किसी बाहरी पेशेवर के नाम पर भी विचार संभव है। समूह का कारोबार तकनीक, ऑटोमोबाइल, स्टील, विमानन, रिटेल, वित्तीय सेवाओं और इलेक्ट्रॉनिक्स सहित कई क्षेत्रों में फैला है। ऐसे में वैश्विक स्तर पर बड़े संगठनों का नेतृत्व कर चुके किसी व्यक्ति को जिम्मेदारी देने का विकल्प पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।

हालांकि, टाटा समूह के लिए उत्तराधिकारी का चुनाव केवल कारोबारी क्षमता का सवाल नहीं होगा। समूह की संस्थागत संस्कृति, टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका और लंबे समय से चली आ रही मूल्यों की परंपरा भी इसमें महत्वपूर्ण होगी।

चंद्रशेखरन का सफर भी रहा खास

एन चंद्रशेखरन ने 1987 में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) से अपने करियर की शुरुआत की थी। वह 2009 में TCS के सीईओ और एमडी बने और जनवरी 2017 में टाटा संस के चेयरमैन नियुक्त किए गए। वह टाटा परिवार से बाहर से आने वाले पहले पेशेवरों में शामिल हैं जिन्होंने समूह की शीर्ष कमान संभाली।उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने एयर इंडिया का अधिग्रहण किया और नए कारोबारों में बड़े निवेश किए। 2022 में उन्हें पांच साल के दूसरे कार्यकाल के लिए फिर नियुक्त किया गया था, जो 20 फरवरी 2027 तक चलेगा।

चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल पर फैसला फरवरी 2026 में टल गया था। उस समय टाटा संस बोर्ड में उनके पुनर्नियुक्ति को लेकर चर्चा हुई थी, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। अब चंद्रशेखरन ने खुद उत्तराधिकारी के चयन की प्रक्रिया जल्द पूरी करने की जरूरत बताई है, ताकि समूह को नेतृत्व परिवर्तन के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

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