आंध्र हाईकोर्ट का फैसला, असाइन की गई जमीन पर अतिरिक्त दावा खारिज

आंध्र हाईकोर्ट ने DKT पट्टा भूमि के बढ़े हुए मुआवजे की मांग वाली अपीले खारिज की। कोर्ट ने कहा कि प्रभावितों को कानूनी प्रावधानों के तहत उचित भुगतान मिल चुका है।

Andhra Pradesh High Court ने DKT पट्टा भूमि के बढ़े मुआवजे की मांग वाली अपीलें खारिज करते हुए कहा कि प्रभावितों को बाजार मूल्य, अतिरिक्त मुआवजा, सोलेशियम और ब्याज सहित कानूनी प्रावधानों के अनुसार उचित भुगतान पहले ही किया जा चुका है।

अमरावती: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए सरकार द्वारा वापस ली गई ‘डीकेटी पट्टा’ (Assigned Land) के बदले अधिक मुआवजे की मांग करने वाली दो अपीलों को खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि याचिकाकर्ताओं को पहले ही बाजार मूल्य, सोलेशियम, अतिरिक्त मुआवजा और ब्याज सहित सभी वैधानिक लाभ दिए जा चुके हैं, इसलिए मुआवजा बढ़ाने का कोई आधार नहीं बनता।

जस्टिस रवि नाथ तिलहारी और जस्टिस महेश्वर राव कुंचेम की खंडपीठ ने यह निर्णय सुनाते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा किया गया भुगतान पूर्व न्यायिक निर्देशों और स्थापित कानूनी सिद्धांतों के अनुरूप है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला आंध्र प्रदेश के कडपा जिले के सी.के. दिन्ने मंडल स्थित सर्वे नंबर 846/1 और 846/2 की डीकेटी पट्टा भूमि से जुड़ा हुआ है। अपीलकर्ता वेमपल्ली कासिम साहेब और गुंडलुरु पीरम्मा इस भूमि के मूल असाइनी या उनके उत्तराधिकारी बताए गए।

साल 2004 में मंडल राजस्व अधिकारी (MRO) ने कमजोर वर्गों के लिए आवासीय स्थल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इन पट्टा भूमियों को रद्द कर सरकार के कब्जे में लेने का आदेश जारी किया था। इसके बाद प्रभावित पक्षों ने इस कार्रवाई को अदालत में चुनौती दी।

हाईकोर्ट ने पहले भी स्पष्ट किया था मुआवजे का अधिकार

इससे पहले दायर की गई रिट याचिका W.P.No. 1409/2008 में हाईकोर्ट ने कहा था कि राज्य सरकार को सार्वजनिक उद्देश्य के लिए आवंटित भूमि वापस लेने का अधिकार है, लेकिन प्रभावित पट्टाधारकों को पूर्ण भूमि मालिकों के समान मुआवजा मिलना चाहिए।

अदालत ने उस समय स्पष्ट किया था कि भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मिलने वाले सभी लाभ — जैसे बाजार मूल्य, अतिरिक्त मुआवजा, सोलेशियम और ब्याज — डीकेटी पट्टा धारकों को भी दिए जाने चाहिए।

जिला अदालत से लेकर हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला

राजस्व मंडल अधिकारी (RDO) द्वारा तय किए गए मुआवजे से असंतुष्ट होकर अपीलकर्ताओं ने कडपा जिला न्यायालय में दीवानी मुकदमे दायर किए। उनका तर्क था कि संबंधित भूमि शहरी क्षेत्र में स्थित है, इसलिए उसका मूल्य लगभग ₹600 प्रति वर्ग गज माना जाना चाहिए।

हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 2012 में उनके दावों को खारिज कर दिया था। इसके बाद अपीलकर्ता उच्च न्यायालय पहुंचे और मुआवजे की राशि बढ़ाने की मांग की।

आंध्र हाईकोर्ट का फैसला, असाइन की गई जमीन पर अतिरिक्त दावा खारिज

अदालत ने क्यों खारिज की अपील?

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि अपीलकर्ता बाजार मूल्य को लेकर पर्याप्त और ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करने में असफल रहे। अदालत ने पाया कि संबंधित अधिकारियों द्वारा तय किया गया मुआवजा उपलब्ध रिकॉर्ड और कानूनी प्रावधानों के अनुसार उचित था।

खंडपीठ ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं को पहले ही भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत मिलने वाले सभी वैधानिक लाभ दिए जा चुके हैं। इसलिए केवल अधिक राशि की मांग के आधार पर मुआवजा बढ़ाया नहीं जा सकता।

DKT पट्टा भूमि क्या होती है?

डीकेटी पट्टा या Assigned Land वह भूमि होती है जिसे सरकार आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, भूमिहीन किसानों या जरूरतमंद लोगों को विशेष शर्तों के तहत आवंटित करती है। आमतौर पर ऐसी भूमि को बिना सरकारी अनुमति के बेचा या हस्तांतरित नहीं किया जा सकता।

हालांकि, सार्वजनिक परियोजनाओं या सरकारी योजनाओं के लिए आवश्यकता पड़ने पर राज्य सरकार ऐसी भूमि को वापस ले सकती है। लेकिन अदालतों ने समय-समय पर यह सुनिश्चित किया है कि प्रभावित लाभार्थियों को उचित मुआवजा मिले।

फैसले का व्यापक प्रभाव

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला भविष्य में डीकेटी पट्टा भूमि से जुड़े मामलों के लिए महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है। इससे यह स्पष्ट संदेश गया है कि सरकार सार्वजनिक हित में भूमि वापस ले सकती है, लेकिन प्रभावित लोगों को कानून के अनुसार उचित और समान मुआवजा देना अनिवार्य होगा।

यह निर्णय भूमि अधिग्रहण और सामाजिक कल्याण योजनाओं के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है।

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