अभिषेक बनर्जी के PA सुमित रॉय गिरफ्तार, सालबोनी जमीन मामले में CID की कार्रवाई

TMC नेता अभिषेक बनर्जी के PA सुमित रॉय को पश्चिम बंगाल CID ने कथित सालबोनी जमीन मामले में गिरफ्तार किया। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत खारिज की थी।

TMC नेता अभिषेक बनर्जी के PA सुमित रॉय को पश्चिम बंगाल CID ने कथित सालबोनी जमीन मामले में गिरफ्तार किया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत खारिज किए जाने के बाद CID और STF की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की।

कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (PA) सुमित रॉय को पश्चिम बंगाल CID ने कथित सालबोनी जमीन घोटाला मामले में गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट द्वारा रॉय की अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद हुई। गिरफ्तारी के साथ ही पश्चिम बंगाल में इस मामले को लेकर राजनीतिक टकराव बढ़ने के आसार हैं। रॉय को पश्चिम बंगाल क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की संयुक्त टीम ने कालीघाट स्थित अभिषेक बनर्जी के आवास से गिरफ्तार किया। अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद उन्हें चिकित्सकीय जांच के लिए सरकारी एसएसकेएम अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद उन्हें कोलकाता स्थित राज्य CID मुख्यालय भवानी भवन ले जाया गया।

सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत नहीं मिली

सुमित रॉय ने कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। कलकत्ता हाई कोर्ट ने 3 अगस्त 2026 को उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज की थी।

इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां रॉय को अग्रिम जमानत नहीं मिली। इसके बाद CID और STF की संयुक्त टीम ने उनकी गिरफ्तारी की।

पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दलील दी थी कि मामले की जांच के लिए रॉय से हिरासत में पूछताछ जरूरी है। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में जांच से जुड़े वित्तीय लेनदेन का उल्लेख किया था।

बैंक खाते में करीब 15 करोड़ रुपये के लेनदेन का दावा

सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दावा किया कि जांचकर्ताओं को सुमित रॉय के बैंक खाते से जुड़े करीब 15 करोड़ रुपये के वित्तीय लेनदेन का पता चला है।

उन्होंने कथित तौर पर 71 लाख रुपये की नकद जमा राशि का भी उल्लेख किया। सरकार ने यह भी आरोप लगाया कि पूछताछ के दौरान रॉय जांच में सहयोग करने के बजाय टालमटोल कर रहे थे।

हालांकि, बचाव पक्ष ने इन आरोपों का विरोध किया। बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि रॉय से की गई पूछताछ रिकॉर्ड की गई थी और उनकी हिरासत में पूछताछ की कोई आवश्यकता नहीं थी। बचाव पक्ष ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि रॉय ने जांच में सहयोग किया है।

इस तरह मामले में जांच एजेंसी और बचाव पक्ष की दलीलें एक-दूसरे से अलग हैं।

विधानसभा में गिरफ्तारी की जानकारी

रॉय की गिरफ्तारी की जानकारी राज्य विधानसभा में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने दी। गृह विभाग का प्रभार संभाल रहे अधिकारी ने विधानसभा में इस कार्रवाई का उल्लेख किया।

सुवेंदु अधिकारी ने रॉय को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें एक ‘कुख्यात जबरन वसूली करने वाला’ बताया। उन्होंने कहा कि CID ने सुमित रॉय को 121 कालीघाट रोड स्थित तृणमूल कांग्रेस कार्यालय से गिरफ्तार किया।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार रॉय की गिरफ्तारी अभिषेक बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास से की गई। गिरफ्तारी के स्थान को लेकर सामने आए इन बयानों के बीच आधिकारिक जांच रिकॉर्ड और आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

सालबोनी जमीन मामले की जांच

सुमित रॉय की गिरफ्तारी कथित सालबोनी भूमि धोखाधड़ी मामले की जांच के बीच हुई है। CID इस मामले में कथित जमीन लेनदेन और उससे जुड़े वित्तीय पहलुओं की जांच कर रही है।

जांच एजेंसी की कार्रवाई में रॉय की भूमिका को लेकर पूछताछ और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने भी हिरासत में पूछताछ को जांच के लिए आवश्यक बताया था।

दूसरी ओर, रॉय का बचाव करने वाले पक्ष ने जांच में उनके सहयोग का दावा किया है और हिरासत में पूछताछ की जरूरत पर सवाल उठाए हैं।

गिरफ्तारी के बाद मेडिकल जांच

गिरफ्तारी के बाद पुलिस और जांच प्रक्रिया के तहत सुमित रॉय को पहले कोलकाता के सरकारी एसएसकेएम अस्पताल ले जाया गया। वहां उनकी चिकित्सकीय जांच कराई गई।

मेडिकल परीक्षण के बाद उन्हें भवानी भवन स्थित राज्य CID मुख्यालय ले जाया गया। अधिकारियों के अनुसार, इसके बाद मामले में जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

अब जांच एजेंसी रॉय से कथित जमीन मामले और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन को लेकर पूछताछ कर सकती है। मामले में अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

गिरफ्तारी के बाद बढ़ सकता है राजनीतिक विवाद

सुमित रॉय की गिरफ्तारी का राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है। वह TMC नेता अभिषेक बनर्जी के PA के तौर पर काम करते हैं और ऐसे में उनकी गिरफ्तारी ने राज्य की सियासत में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।

पश्चिम बंगाल में TMC और BJP के बीच पहले से ही तीखा राजनीतिक संघर्ष चल रहा है। ऐसे में जमीन मामले में अभिषेक बनर्जी के करीबी सहयोगी की गिरफ्तारी दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप को और बढ़ा सकती है।

राज्य सरकार जहां जांच और हिरासत में पूछताछ की जरूरत पर जोर दे रही है, वहीं बचाव पक्ष ने आरोपों को खारिज करते हुए रॉय के जांच में सहयोग करने की बात कही है।

मामले में आगे क्या होगा?

सुमित रॉय की गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसी कथित सालबोनी जमीन मामले में उनके कथित संपर्कों, वित्तीय लेनदेन और अन्य संबंधित पहलुओं की पड़ताल करेगी। जांच के दौरान बरामद दस्तावेजों और बैंकिंग रिकॉर्ड की भी जांच की जा सकती है।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि कथित 15 करोड़ रुपये के लेनदेन का पूरा स्वरूप क्या था या 71 लाख रुपये की कथित नकद जमा राशि किस उद्देश्य से की गई थी। इन बिंदुओं पर जांच एजेंसी की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। फिलहाल सुमित रॉय की गिरफ्तारी को लेकर जांच जारी है और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप अदालत में विचाराधीन प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद तेज हुई कार्रवाई

पूरे घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज किया जाना महत्वपूर्ण मोड़ रहा। इसके बाद CID और STF की संयुक्त टीम ने रॉय को गिरफ्तार किया।

अब जांच एजेंसी की कार्रवाई और अदालत में होने वाली आगे की सुनवाई पर नजर रहेगी। सालबोनी जमीन मामले में सुमित रॉय की कथित भूमिका, वित्तीय लेनदेन और अन्य आरोपों की जांच के निष्कर्ष आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर और स्पष्ट होगी।

फिलहाल गिरफ्तारी ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक और संवेदनशील मुद्दा जोड़ दिया है। जांच एजेंसी की कार्रवाई और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं के बीच अब इस मामले की अगली कानूनी कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

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