नितिन नवीन ने उत्तराखंड की सैन्य विरासत का किया उल्लेख, कहा- 'पीएम मोदी के दिल में...'

Nitin Nabin in Uttarakhand: बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने उत्तराखंड की सैन्य विरासत और देश की सुरक्षा में राज्य के योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने प्रधानमंत्री

नैनीताल रोड स्थित गौरव सेनानी मिलन समारोह में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने उत्तराखंड की वीर सैन्य परंपरा और देश की रक्षा में सैनिकों के योगदान को नमन किया। उन्होंने कहा कि वीरों की भूमि उत्तराखंड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिल में बसती है।

Nitin Nabin Uttarakhand Visit: उत्तराखंड की सैन्य परंपरा और देश की सुरक्षा में सैनिकों के योगदान को लेकर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने हल्द्वानी में आयोजित एक कार्यक्रम में अपनी बात रखी। नैनीताल रोड पर आयोजित गौरव सेनानी मिलन समारोह में उन्होंने पूर्व सैनिकों, सैनिकों और उनके परिवारों को सम्मानपूर्वक याद किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड वीर सैनिकों और सैन्य अधिकारियों की भूमि है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन में इस राज्य के प्रति विशेष सम्मान है।

नितिन नवीन ने कहा कि देश के नागरिक सैनिकों के शौर्य, अनुशासन और बलिदान की वजह से सुरक्षित वातावरण में अपना जीवन जी पा रहे हैं। उन्होंने उत्तराखंड की सैन्य विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य ने भारतीय सशस्त्र बलों को बड़ी संख्या में सैनिक और अधिकारी दिए हैं।

उत्तराखंड की सैन्य विरासत का किया उल्लेख

कार्यक्रम में नितिन नवीन ने उत्तराखंड की सैन्य परंपरा के विभिन्न पहलुओं का जिक्र किया। उन्होंने घोड़ाखाल सैनिक स्कूल की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि इस संस्थान ने भारतीय सेना को अनेक अधिकारी दिए हैं। उन्होंने उत्तराखंड के उस गौरव का भी उल्लेख किया, जिसके तहत राज्य को देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) देने का गौरव प्राप्त हुआ। 

उनके संबोधन में कुमाऊं रेजिमेंट की ऐतिहासिक भूमिका का भी जिक्र आया। उन्होंने कहा कि कुमाऊं रेजिमेंट का गौरवशाली इतिहास उत्तराखंड की सैन्य पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। नितिन नवीन ने सैन्य धाम को उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों की तरह सम्मान दिए जाने का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार भी व्यक्त किया।

युवाओं को सीमा से जोड़ने पर जोर

भाजपा अध्यक्ष ने युवाओं में देशसेवा और सैन्य जीवन के प्रति समझ बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि युवाओं को सीमावर्ती क्षेत्रों का प्रत्यक्ष अनुभव कराने की व्यवस्था की जानी चाहिए। उनका कहना था कि यदि युवा सरहद पर जाकर सैनिकों के जीवन और वहां की परिस्थितियों को करीब से देखेंगे, तो उन्हें सैन्य सेवा के संघर्ष और जिम्मेदारियों को समझने का अवसर मिलेगा। 

उन्होंने सीमा दर्शन को शैक्षणिक गतिविधियों या पाठ्यक्रम से जोड़ने की संभावना पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक, इस तरह की पहल से युवाओं में सेना के प्रति रुचि और देशसेवा की भावना को बढ़ावा मिल सकता है।

नितिन नवीन ने उत्तराखंड की सैन्य विरासत का किया उल्लेख, कहा- 'पीएम मोदी के दिल में...'

सैनिकों और परिवारों को किया नमन

नितिन नवीन ने कार्यक्रम के दौरान वर्तमान सैनिकों के साथ-साथ पूर्व सैनिकों और उनके परिजनों के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि सैनिकों की सेवा केवल सीमा पर तैनाती तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके परिवार भी इस जिम्मेदारी और त्याग का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। उन्होंने स्थानीय आस्था से जुड़े गोल्ज्यू देवता का भी स्मरण किया और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त की। उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने राज्य की पहचान में सैनिक विरासत के महत्व को रेखांकित किया।

CM पुष्कर सिंह धामी ने गिनाईं रक्षा क्षेत्र की उपलब्धियां

कार्यक्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी रक्षा क्षेत्र में भारत की बदलती स्थिति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है और अब भारत दूसरे देशों को रक्षा उपकरण निर्यात करने की क्षमता विकसित कर चुका है। मुख्यमंत्री ने सैनिकों के सम्मान से जुड़े वन रैंक वन पेंशन (OROP) का भी उल्लेख किया। 

उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था के जरिए पूर्व सैनिकों और उनके योगदान को सम्मान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। धामी ने सैनिकों की सेवा को स्थायी सम्मान से जोड़ते हुए कहा कि कोई व्यक्ति सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद भी समाज की नजर में सैनिक ही रहता है।

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