: बिहार विधान परिषद के गेट पर 100 नवनियुक्त कर्मियों का हंगामा, जॉइनिंग की मांग पर अड़े; पुलिस बल तैनात

बिहार विधान परिषद के गेट पर 100 नवनियुक्त कर्मियों ने जॉइनिंग की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। नियुक्तियों में अनियमितता की आशंका के कारण योगदान रुका है।
: बिहार विधान परिषद के गेट पर 100 नवनियुक्त कर्मियों का हंगामा, जॉइनिंग की मांग पर अड़े; पुलिस बल तैनात
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बिहार की राजधानी पटना में शुक्रवार को बिहार विधान परिषद के मुख्य गेट पर नवनियुक्त कर्मियों ने जमकर हंगामा किया। करीब 100 चयनित अभ्यर्थी जल्द योगदान कराने की मांग को लेकर परिषद परिसर के बाहर पहुंचे थे। इनमें सुरक्षा प्रहरी, डेटा एंट्री ऑपरेटर और निजी सहायक के पदों पर चयनित अभ्यर्थी शामिल हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि चयन और नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी उन्हें अब तक योगदान का अवसर नहीं मिला है। जब वे विधान परिषद के अंदर जाने की कोशिश कर रहे थे तो उन्हें गेट पर रोक दिया गया। इसके बाद वहां विरोध और हंगामे की स्थिति बन गई। स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया।

जानकारी के अनुसार, प्रदर्शन कर रहे नवनियुक्त कर्मियों में सात निजी सहायक यानी आशुलिपिक, करीब 56 सुरक्षा प्रहरी और 33 डेटा एंट्री ऑपरेटर शामिल हैं। ये सभी जल्द से जल्द अपनी ड्यूटी शुरू कराने की मांग कर रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया में चयनित होने के बाद वे योगदान की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन अब उन्हें कार्यालय में काम शुरू करने की अनुमति नहीं मिल रही है। इसी नाराजगी के चलते वे शुक्रवार को एकजुट होकर विधान परिषद के गेट पर पहुंचे।

विधान परिषद सचिवालय में हुई नियुक्तियों को लेकर कुछ अनियमितताओं की आशंका जताई गई है। इसी वजह से चयनित कर्मियों के योगदान की प्रक्रिया रोक दी गई है। संबंधित पदों पर नियुक्त अभ्यर्थियों की शैक्षणिक योग्यता और कार्यकुशलता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। खासकर निजी सहायक के पदों पर चयनित अभ्यर्थियों की आशुलिपि यानी शॉर्टहैंड की दक्षता की जांच को लेकर मामला चर्चा में है। परिषद सचिवालय की ओर से चयनित अभ्यर्थियों की योग्यता और कौशल की दोबारा जांच कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

निजी सहायक के सात पदों पर हुई नियुक्तियों को लेकर विशेष रूप से सवाल उठे हैं। इन पदों पर चयनित अभ्यर्थियों को शॉर्टहैंड की दक्षता जांच के लिए बुलाया गया था। इसके लिए चार नवंबर को परीक्षा आयोजित की गई, लेकिन चयनित सातों अभ्यर्थियों में से कोई भी जांच परीक्षा में शामिल होने नहीं पहुंचा। इसके बाद भर्ती प्रक्रिया को लेकर संदेह और गहरा गया। परिषद सचिवालय ने अब इन अभ्यर्थियों को एक और मौका देने का निर्णय लिया है।

सातों निजी सहायकों को अब 18 नवंबर को दोबारा शॉर्टहैंड दक्षता परीक्षा में शामिल होने के लिए बुलाया गया है। इस परीक्षा में उनकी आशुलिपि की वास्तविक क्षमता की जांच की जाएगी। परीक्षा के दौरान सीसीटीवी कैमरों की निगरानी और विशेषज्ञों की मौजूदगी में प्रक्रिया पूरी कराने की तैयारी है। परिषद सचिवालय ने स्पष्ट किया है कि दूसरी निर्धारित तिथि पर भी यदि कोई अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल नहीं होता है तो उसकी उम्मीदवारी समाप्त की जा सकती है। ऐसे में इन सात अभ्यर्थियों के लिए 18 नवंबर की परीक्षा महत्वपूर्ण हो गई है।

निजी सहायक के पदों पर नियुक्ति पूर्व विधान परिषद सभापति अवधेश नारायण सिंह के कार्यकाल में हुई थी। नियुक्तियों में कथित अनियमितता की आशंका सामने आने के बाद परिषद सचिवालय ने चयनित अभ्यर्थियों की दक्षता की दोबारा जांच कराने का फैसला लिया। इस प्रक्रिया के बाद से नियुक्ति और योगदान को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। दूसरी ओर, चयनित अभ्यर्थी जल्द से जल्द काम शुरू कराने की मांग कर रहे हैं।

बिहार विधान परिषद की आधिकारिक वेबसाइट पर भी भर्ती से संबंधित कई सूचनाएं जारी की गई हैं। इनमें निजी सहायक के पदों के लिए दक्षता जांच परीक्षा से जुड़ा नोटिस और डेटा एंट्री ऑपरेटर तथा निम्नवर्गीय लिपिक के चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरण से संबंधित सूचना शामिल है। इससे स्पष्ट है कि अलग-अलग पदों की भर्ती प्रक्रिया के कुछ चरण पूरे किए जा चुके हैं, जबकि निजी सहायक के पदों पर दक्षता जांच को लेकर प्रक्रिया अभी जारी है।

शुक्रवार को परिषद के गेट पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस की तैनाती के कारण परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की मुख्य मांग यही थी कि उनकी नियुक्ति और योगदान से जुड़ी स्थिति जल्द स्पष्ट की जाए। उनका कहना है कि चयनित होने के बाद लंबे समय तक इंतजार करना उनके लिए परेशानी का कारण बन रहा है। वहीं, परिषद सचिवालय की ओर से नियुक्तियों में उठे सवालों और योग्यता जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई किए जाने की स्थिति है।

फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि नियुक्तियों की जांच कब तक पूरी होगी और चयनित कर्मियों को योगदान का अवसर कब मिलेगा। एक तरफ करीब 100 नवनियुक्त कर्मी जल्द जॉइनिंग की मांग कर रहे हैं, दूसरी तरफ नियुक्ति प्रक्रिया में सामने आई अनियमितताओं की आशंका के कारण सचिवालय की ओर से जांच और दक्षता परीक्षण पर जोर दिया जा रहा है। अब सभी की निगाहें परिषद सचिवालय के अगले फैसले पर टिकी हैं।

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