Blood Pressure Medicines: 18 बैच क्वालिटी टेस्ट में असफल, जानें असर और विवरण

भारत में 18 ब्लड प्रेशर दवाओं के बैच क्वालिटी टेस्ट में फेल, डिसॉल्यूशन में असफल होने से मरीजों को हार्ट, स्ट्रोक और किडनी का खतरा।

देश में ब्लड प्रेशर (BP) की दवाओं की गुणवत्ता पर चिंता बढ़ गई है। हाल ही में 18 दवाओं के बैच क्वालिटी टेस्ट में फेल पाए गए, मुख्य रूप से डिसॉल्यूशन टेस्ट में असफल होने के कारण। विशेषज्ञ इसे "साइलेंट फेलियर" कहते हैं, जो मरीजों के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है। इससे हार्ट, किडनी और स्ट्रोक जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

Quality Warnings For Blood Pressure Medications: भारत में हाल ही में 18 ब्लड प्रेशर की दवाओं के बैच क्वालिटी टेस्ट में फेल होने का मामला सामने आया है। CDSCO की रिपोर्ट के अनुसार, ये दवाएं असम, केरल समेत कई राज्यों में फेल पाई गईं। यह समस्या अप्रैल 2026 के दौरान सामने आई और मरीजों के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह "साइलेंट फेलियर" स्थिति मरीजों को बिना संकेत के हार्ट, स्ट्रोक और किडनी की बीमारियों के जोखिम में डाल सकती है।

ब्लड प्रेशर दवाओं में गुणवत्ता का संकट

देश में ब्लड प्रेशर (BP) की दवाओं की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है। हाल ही में 18 दवाओं के बैच क्वालिटी टेस्ट में फेल पाए गए हैं। CDSCO की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले महीने कुल 198 दवाओं के बैच फेल हुए, जिनमें सबसे अधिक ब्लड प्रेशर की दवाएं शामिल थीं। ये मामले असम से लेकर केरल तक सामने आए हैं, जिससे साफ होता है कि यह समस्या केवल किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है। मरीजों के लिए यह स्थिति खतरनाक हो सकती है क्योंकि दवा सही असर न देने पर बीपी नियंत्रण से बाहर जा सकता है।

डिसॉल्यूशन टेस्ट में फेल होना मुख्य कारण

इन 18 ब्लड प्रेशर दवाओं के फेल होने की सबसे बड़ी वजह डिसॉल्यूशन टेस्ट में असफल होना है। यह टेस्ट यह जांचता है कि दवा शरीर में कितनी तेजी से और कितनी मात्रा में घुलती है। अगर दवा सही तरीके से घुलती नहीं है, तो उसका असर कम होता है, और मरीज को पूरी दवा लेने के बावजूद लाभ नहीं मिलता। कई मामलों में ये दवाएं बाहर से सामान्य दिखती हैं, जिससे मरीज को शक नहीं होता।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की समस्या "साइलेंट फेलियर" कहलाती है। मरीज नियमित दवा लेने के बावजूद ब्लड प्रेशर कंट्रोल में नहीं रहता। लंबे समय तक इसका असर हार्ट की बीमारी, स्ट्रोक और किडनी से जुड़ी समस्याओं के रूप में दिखाई दे सकता है।

भारत में बीपी की गंभीर स्थिति

भारत में ब्लड प्रेशर एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। करोड़ों लोग इससे प्रभावित हैं, लेकिन बहुत कम लोग इसे सही तरीके से नियंत्रित कर पाते हैं। खराब लाइफस्टाइल, तनाव और खानपान इसके मुख्य कारण हैं। अगर दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठे, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि दवाओं की निगरानी और कड़े परीक्षण को और मजबूत करना जरूरी है। मरीजों को सलाह दी जा रही है कि वे केवल मान्यता प्राप्त ब्रांड और फार्मासिस्ट से ही दवा लें, और किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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