जनगणना-2027 के तहत बांदा जिले के लिए डिजिटल जिला जनगणना हस्तपुस्तिका तैयार की जा रही है। इसमें गांव और शहरों की शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तृत विवरण उपलब्ध होगा।
बांदा: जनगणना 2027 के तहत उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में डिजिटल जिला जनगणना हस्तपुस्तिका तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस दस्तावेज में जिले के प्रत्येक गांव और शहर की सामाजिक, आर्थिक और बुनियादी सुविधाओं का विस्तृत रिकॉर्ड होगा, जो भविष्य की विकास योजनाओं और नीति निर्माण में अहम भूमिका निभाएगा।
एक दस्तावेज में मिलेगी जिले की पूरी तस्वीर
जनगणना-2027 के तहत बांदा जिले के लिए डिजिटल जिला जनगणना हस्तपुस्तिका (DCHB) तैयार की जा रही है। इस दस्तावेज में जिले के प्रत्येक गांव और शहर से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध होगी। शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, बिजली, परिवहन, बैंकिंग, संचार और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तृत विवरण इसमें दर्ज किया जाएगा।
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जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग-अलग डिजिटल हस्तपुस्तिकाएं तैयार की जाएंगी, जिससे स्थानीय स्तर की जानकारी अधिक व्यवस्थित और उपयोगी रूप में उपलब्ध हो सके।
हर गांव और शहर का होगा विस्तृत रिकॉर्ड
बांदा जिले में पांच तहसील, आठ विकासखंड और 469 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इनमें सदर, पैलानी, बबेरू, अतर्रा और नरैनी तहसील के साथ तिंदवारी, बड़ोखर खुर्द, बिसंडा, जसपुरा, कमासिन, महुआ और अन्य विकासखंड शामिल हैं।
इन सभी क्षेत्रों की जनसंख्या, सामाजिक स्थिति, आर्थिक गतिविधियों और नागरिक सुविधाओं का विस्तृत लेखा-जोखा डिजिटल हस्तपुस्तिका में दर्ज किया जाएगा। इससे प्रत्येक क्षेत्र की वास्तविक स्थिति का आकलन करना आसान होगा।
विकास योजनाओं और नीति निर्माण में मिलेगी मदद
जिला जनगणना हस्तपुस्तिका को किसी भी जिले का महत्वपूर्ण संदर्भ दस्तावेज माना जाता है। इसमें उपलब्ध आंकड़ों का उपयोग केंद्र और राज्य सरकार की विकास योजनाएं तैयार करने, नई परियोजनाओं की योजना बनाने, शोध कार्यों और प्रशासनिक निर्णयों में किया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल स्वरूप में उपलब्ध यह जानकारी विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और योजनाओं को जरूरत के अनुसार लागू करने में भी मदद करेगी।
दो भागों में तैयार होगी डिजिटल हस्तपुस्तिका
जिला जनगणना हस्तपुस्तिका को दो भागों में प्रकाशित किया जाएगा। पहले भाग में जिले का इतिहास, भौगोलिक स्थिति, प्रशासनिक ढांचा, सामाजिक और आर्थिक स्वरूप, प्रमुख उद्योग तथा गांवों और शहरों में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं की जानकारी होगी।
इसके अलावा जनसंख्या, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, बैंकिंग, बिजली, पेयजल और अन्य आवश्यक सेवाओं से जुड़े विस्तृत आंकड़े भी शामिल किए जाएंगे। वर्ष 1951 से प्रत्येक जनगणना के बाद इस प्रकार का दस्तावेज तैयार किया जाता रहा है, जिसे अब आधुनिक तकनीक के साथ डिजिटल स्वरूप में और अधिक उपयोगी बनाया जा रहा है।









