कर्नाटक कैबिनेट विस्तार पर बढ़ा राजनीतिक विवाद, यतींद्र सिद्धारमैया ने पिता सिद्धारमैया का किया बचाव

कर्नाटक कैबिनेट विस्तार पर AHINDA नेताओ की नाराजगी के बीच मंत्री यतींद्र सिद्धारमैया ने पूर्व CM सिद्धारमैया का बचाव किया। फैसला कांग्रेस हाईकमान ने लिया

कर्नाटक कैबिनेट विस्तार को लेकर AHINDA नेताओं की नाराजगी के बीच मंत्री यतींद्र सिद्धारमैया ने पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का बचाव किया। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने का अंतिम फैसला कांग्रेस हाईकमान ने सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद लिया।

बेंगलुरु: कर्नाटक में हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद कांग्रेस के भीतर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विशेष रूप से AHINDA (अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित समुदाय) से जुड़े नेताओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलने के आरोपों ने पार्टी के अंदर असंतोष को जन्म दिया है। इसी विवाद के बीच राज्य के शहरी विकास मंत्री यतींद्र सिद्धारमैया ने अपने पिता और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का बचाव करते हुए कहा कि मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने का अंतिम निर्णय कांग्रेस हाईकमान ने लिया था।

यतींद्र सिद्धारमैया ने मैसूरु में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि उनके पिता पर लगाए जा रहे आरोप तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिद्धारमैया ने कई वरिष्ठ नेताओं के नाम कैबिनेट विस्तार के लिए सुझाए थे, लेकिन अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व ने विभिन्न पहलुओं पर विचार करने के बाद लिया।

महादेवप्पा का नाम भी सुझाया गया था

यतींद्र ने कहा कि पूर्व मंत्री एच.सी. महादेवप्पा का नाम भी सिद्धारमैया ने कैबिनेट में शामिल करने के लिए सिफारिश की थी। हालांकि कांग्रेस नेतृत्व ने नए चेहरे के रूप में नरेंद्र स्वामी को मंत्रिमंडल में शामिल करने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि कांग्रेस हाईकमान ने वरिष्ठ नेताओं, जिनमें एच.सी. महादेवप्पा और तनवीर सैत भी शामिल हैं, से बातचीत कर उन्हें इस फैसले के पीछे के कारणों की जानकारी दी है। यतींद्र ने कहा कि इससे यह स्पष्ट होता है कि कैबिनेट विस्तार का निर्णय सामूहिक रूप से लिया गया था और इसे किसी एक नेता से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

AHINDA नेताओं की अनदेखी के आरोपों को बताया गलत

हाल के दिनों में कांग्रेस के कुछ नेताओं और विधायकों ने आरोप लगाया कि सिद्धारमैया ने अपने समर्थक AHINDA नेताओं को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दी। इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए यतींद्र सिद्धारमैया ने कहा कि यह कहना गलत है कि उनके पिता ने अपने समर्थकों की अनदेखी की। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने सामाजिक संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और राजनीतिक परिस्थितियों सहित कई पहलुओं को ध्यान में रखकर मंत्रिमंडल का गठन किया। उनके अनुसार, किसी भी मंत्री के चयन का निर्णय केवल एक व्यक्ति की सिफारिश पर नहीं होता, बल्कि यह सामूहिक राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा होता है।

अपने मंत्री बनने पर भी दी सफाई

यतींद्र सिद्धारमैया ने अपने मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनके चयन के पीछे कुरुबा समुदाय की भावनाएं भी एक महत्वपूर्ण कारण थीं। उन्होंने कहा कि जब सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री पद छोड़ा था, तब कुरुबा समुदाय में असंतोष की भावना थी। इसी सामाजिक और राजनीतिक परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए उन्हें मंत्रिमंडल में जिम्मेदारी दी गई। यतींद्र ने कहा कि वह इस अवसर को जनता की सेवा के रूप में देखते हैं और अपनी जिम्मेदारियों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करेंगे।

मैसूरु में जिला प्रभारी मंत्री के रूप में किया दौरा

गुरुवार को यतींद्र सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के निर्देश पर मैसूरु जिले का दौरा भी किया। यह दौरा राज्य में सूखे की स्थिति के आकलन और प्रशासनिक समीक्षा के उद्देश्य से किया गया। इस दौरान उन्होंने उरुलिंगा पेड्डी मठ और सुत्तूर मठ पहुंचकर धार्मिक गुरुओं का आशीर्वाद लिया। यतींद्र ने बताया कि पहले वे अस्थायी रूप से मैसूरु जिले के प्रभारी मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, लेकिन अब आधिकारिक नियुक्ति के बाद उन्होंने पारंपरिक रूप से धार्मिक संस्थानों का दौरा किया।

कैबिनेट विस्तार के बाद कांग्रेस में बढ़ा असंतोष

कर्नाटक कांग्रेस में हालिया कैबिनेट विस्तार के बाद असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। सूत्रों के अनुसार, कई विधायक और वरिष्ठ नेता चयन प्रक्रिया से संतुष्ट नहीं हैं। उनका मानना है कि कुछ अनुभवी नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह मिलनी चाहिए थी। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि किसी भी बड़े दल में मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान सभी नेताओं की अपेक्षाओं को पूरा करना कठिन होता है, जिससे असंतोष की स्थिति बन जाती है।

महादेवप्पा के दिल्ली दौरे की चर्चा

राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री एच.सी. महादेवप्पा नई दिल्ली पहुंचे हैं, जहां उनकी पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व से मुलाकात हो सकती है। हालांकि इस मुलाकात के एजेंडे को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन इसे कैबिनेट विस्तार के बाद उत्पन्न राजनीतिक स्थिति से जोड़कर देखा जा रहा है।

AHINDA क्या है और क्यों है अहम?

कर्नाटक की राजनीति में AHINDA एक महत्वपूर्ण सामाजिक और राजनीतिक अवधारणा मानी जाती है। इसका अर्थ है—अल्पसंख्यक (Minorities), हिंदुलिदवरा या पिछड़ा वर्ग (Backward Classes) और दलित (Dalits)। पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया लंबे समय से इस सामाजिक गठजोड़ की राजनीति के प्रमुख चेहरों में रहे हैं। माना जाता है कि इस वर्ग का समर्थन कांग्रेस की चुनावी रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी कारण कैबिनेट विस्तार में AHINDA नेताओं के प्रतिनिधित्व को लेकर उठे सवाल राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

राजनीतिक संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस नेतृत्व के सामने विभिन्न सामाजिक समूहों, क्षेत्रीय नेताओं और वरिष्ठ विधायकों के बीच संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती है। कैबिनेट विस्तार में सीमित पदों के कारण कई नेताओं को जगह नहीं मिल सकी, जिससे असंतोष स्वाभाविक रूप से बढ़ा है। अब पार्टी नेतृत्व का प्रयास होगा कि संवाद के माध्यम से नाराज नेताओं को संतुष्ट किया जाए।

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