CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि संगठन फिलहाल राजनीतिक पार्टी नहीं बनेगा और प्रेशर ग्रुप की तरह काम करेगा। छत्रपति संभाजीनगर में शुरू हुई दो दिवसीय बैठक में शिक्षा, छात्र आंदोलन, E20 ईंधन और संगठन विस्तार पर चर्चा की जा रही है।
छत्रपति संभाजीनगर: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया है कि उनका संगठन फिलहाल राजनीतिक पार्टी बनने की दिशा में नहीं बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि CJP का उद्देश्य चुनावी राजनीति में उतरना नहीं, बल्कि एक प्रभावी जन-दबाव समूह (प्रेशर ग्रुप) के रूप में काम करना है, जो लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही सुनिश्चित करने और जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाने का प्रयास करेगा।
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में शुरू हुई CJP की दो दिवसीय कोर कमेटी बैठक से पहले मीडिया से बातचीत में दीपके ने कहा कि भारत को इस समय नई राजनीतिक पार्टी से अधिक एक व्यापक जन-आंदोलन की आवश्यकता है। उनका कहना था कि संगठन विभिन्न सामाजिक और शैक्षणिक मुद्दों पर लोगों को एकजुट कर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को मजबूत करने का प्रयास करेगा।
राजनीतिक दल नहीं, जन-दबाव समूह बनने की रणनीति
अभिजीत दीपके ने कहा कि यदि CJP शुरुआत से ही राजनीतिक दल बनने की घोषणा करती, तो उसके आंदोलन को इतना व्यापक समर्थन नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि संगठन को विभिन्न विचारधाराओं, सामाजिक समूहों और राजनीतिक पृष्ठभूमि के लोगों का सहयोग इसलिए मिला क्योंकि उसका उद्देश्य किसी चुनावी लाभ के बजाय सार्वजनिक मुद्दों को उठाना था।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए नागरिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है और CJP इसी दिशा में कार्य करना चाहती है। उनके अनुसार, संगठन का फोकस जनहित के मुद्दों पर सरकार और संस्थाओं के सामने जवाबदेही सुनिश्चित करने पर रहेगा।
दो दिवसीय बैठक में कई राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा
छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित दो दिवसीय बैठक में संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों और कोर कमेटी के सदस्यों ने भाग लिया। बैठक के एजेंडे में हाल ही में समाप्त हुए जंतर-मंतर आंदोलन की समीक्षा, शिक्षा व्यवस्था में सुधार, E20 ईंधन नीति, छात्रों से जुड़े मुद्दे और संगठन के राष्ट्रीय विस्तार की रणनीति शामिल है।
दीपके ने बताया कि संगठन देश के विभिन्न राज्यों में अपनी गतिविधियों को मजबूत करने की योजना बना रहा है, ताकि स्थानीय स्तर पर भी जनसरोकार के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाया जा सके।
लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भरोसा बहाल करने की जरूरत
मीडिया से बातचीत के दौरान दीपके ने कहा कि लोगों का समर्थन केवल शिक्षा संबंधी मुद्दों तक सीमित नहीं था। उनके अनुसार, बड़ी संख्या में नागरिक लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को लेकर भी चिंता जता रहे हैं।
उन्होंने कहा कि न्यायपालिका, मीडिया, राजनीतिक व्यवस्था और अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर लोगों का विश्वास मजबूत होना चाहिए। उनका मानना है कि जनभागीदारी और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलनों के माध्यम से संस्थाओं की जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकती है।
झारखंड के छात्र आंदोलन को समर्थन देने का ऐलान
अभिजीत दीपके ने घोषणा की कि CJP का प्रतिनिधिमंडल झारखंड जाएगा और वहां आंदोलन कर रहे छात्रों से मुलाकात करेगा। उन्होंने कहा कि संगठन छात्रों की समस्याओं को समझेगा और उनकी मांगों के समर्थन में लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दे संगठन की प्राथमिकताओं में शामिल रहेंगे।
छात्रों पर दर्ज मामलों को लेकर सरकार से बातचीत
CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि छात्र प्रदर्शन के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग को लेकर सरकार से बातचीत जारी है। उन्होंने कहा कि संगठन प्रभावित छात्रों को कानूनी और चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने की तैयारी भी कर रहा है।
सौरव दास ने यह भी बताया कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक संगठन के मेंटर के रूप में जुड़े रहेंगे और समय-समय पर संगठन को मार्गदर्शन देते रहेंगे।
जंतर-मंतर आंदोलन से राष्ट्रीय पहचान
CJP ने 20 जून से 25 जुलाई तक नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर लगातार 36 दिनों तक प्रदर्शन किया। इस आंदोलन में देशभर से बड़ी संख्या में छात्र, अभिभावक और युवा शामिल हुए। आंदोलन के दौरान शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और युवाओं से जुड़े कई मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए।
20 जुलाई को आयोजित संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति भी बनी। बाद में आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की गई।

सोशल मीडिया अभियान से शुरू हुआ संगठन
CJP की शुरुआत एक ऑनलाइन अभियान के रूप में हुई थी। सुप्रीम कोर्ट की एक सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की एक टिप्पणी सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बनी। इसके बाद अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर व्यंग्यात्मक अभियान शुरू किया, जिसे बड़ी संख्या में छात्रों और युवाओं का समर्थन मिला।
धीरे-धीरे यह डिजिटल अभियान शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय छात्र आंदोलन में बदल गया। इसके बाद संगठन ने देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों और विरोध प्रदर्शनों का आयोजन किया।
अमेरिका से लौटकर आंदोलन का नेतृत्व
अभिजीत दीपके जून में अमेरिका से भारत लौटे और इसके बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। पेशे से डिजिटल मीडिया रणनीतिकार दीपके ने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वर्तमान में अमेरिका की बॉस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशंस विषय में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य युवाओं की आवाज को लोकतांत्रिक मंच प्रदान करना और सार्वजनिक नीतियों पर रचनात्मक संवाद को बढ़ावा देना है।
कानूनी सहायता के लिए बनाया गया लीगल डिफेंस फंड
संगठन ने छात्र प्रदर्शन के बाद कानूनी मामलों का सामना कर रहे छात्रों की सहायता के लिए लीगल डिफेंस फंड की भी घोषणा की है। CJP का कहना है कि इस फंड के माध्यम से जरूरतमंद छात्रों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
संगठन के अनुसार, देशभर में छात्रों से जुड़े मामलों की निगरानी की जा रही है और आवश्यक कानूनी सहयोग के लिए विशेषज्ञों से संपर्क बनाए रखा गया है।
आगे की रणनीति पर रहेगा फोकस
दो दिवसीय बैठक में संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने, नए राज्यों में विस्तार, शिक्षा सुधार, युवाओं की भागीदारी और लोकतांत्रिक संवाद को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की जा रही है। CJP का कहना है कि आने वाले समय में वह विभिन्न सामाजिक और जनहित के मुद्दों पर शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अभियान जारी रखेगा।











