बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के क्षेत्र के प्रभाव से झारखंड में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में अगले पांच दिनों तक बारिश और वज्रपात को लेकर यलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान कई जिलों में भारी बारिश के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। मौसम की सबसे बड़ी चिंता इस समय आकाशीय बिजली को लेकर है, क्योंकि पिछले 24 घंटे के दौरान वज्रपात की अलग-अलग घटनाओं में राज्य में 20 लोगों की मौत हुई है, जबकि एक दर्जन से ज्यादा लोग झुलसे और घायल हुए हैं।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 5 से 8 अगस्त के बीच झारखंड के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। उत्तर-पश्चिम, मध्य, दक्षिण और संथाल परगना के जिलों में अलग-अलग दिनों में भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने का खतरा भी बना रहेगा। ऐसे मौसम में लोगों को खुले मैदान, खेत, पेड़ और बिजली के खंभों के आसपास खड़े होने से बचने की सलाह दी गई है।
पिछले 24 घंटे में रांची समेत राज्य के कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। रांची के कांके में सबसे अधिक 76 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई। रांची शहर में करीब 35 मिलीमीटर बारिश हुई। इसके अलावा लोहरदगा में 45 मिलीमीटर, सिमडेगा में 23 मिलीमीटर, बोकारो में 11 मिलीमीटर और डालटनगंज में 10 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। बारिश के कारण कई क्षेत्रों में मौसम सुहाना हुआ, लेकिन वज्रपात की घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
5 अगस्त को रांची, जमशेदपुर, चाईबासा, सरायकेला-खरसावां, गोड्डा, साहिबगंज, दुमका, पाकुड़, देवघर और जामताड़ा में बारिश की संभावना जताई गई है। इन इलाकों में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। इसके साथ ही गरज और बिजली चमकने की स्थिति भी बन सकती है।
6 अगस्त को मौसम का असर रांची के अलावा हजारीबाग, कोडरमा, रामगढ़, लोहरदगा, गुमला, खूंटी, पलामू, गढ़वा और चतरा में देखने को मिल सकता है। इन जिलों में बारिश के साथ वज्रपात का खतरा बना रहेगा। ग्रामीण इलाकों में खेतों में काम करने वाले किसानों और मजदूरों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होगी।
7 अगस्त को सिमडेगा, जमशेदपुर, लोहरदगा, गुमला, रांची, खूंटी, गढ़वा, पलामू और लातेहार में बारिश की संभावना है। इसके बाद 8 अगस्त को लोहरदगा, गुमला, लातेहार, पलामू और गढ़वा में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। यानी अगले कई दिनों तक झारखंड के अलग-अलग हिस्सों में मौसम सक्रिय रहने वाला है।
इस बीच पिछले 24 घंटे में आकाशीय बिजली ने राज्य के कई परिवारों को गहरा सदमा दिया है। सबसे ज्यादा मौतें गिरिडीह जिले में हुई हैं। यहां अलग-अलग घटनाओं में 11 लोगों की जान चली गई, जबकि कई लोग घायल और झुलसे हैं। एक ही जिले में इतने लोगों की मौत के बाद प्रशासन और स्थानीय लोगों में भी चिंता बढ़ गई है।
गिरिडीह के देवरी थाना क्षेत्र के देवपहाड़ी स्थित गोसांई आहर के पास वज्रपात की सबसे गंभीर घटनाओं में से एक हुई। बताया गया कि कुछ युवक पेड़ के नीचे मोबाइल पर गेम खेल रहे थे। इसी दौरान अचानक बिजली गिर गई। हादसे में अर्जुन कुमार साव (17), विष्णुदेव साव (13), गजेंद्र साव (15) और कुश कुमार तिवारी (18) की मौत हो गई, जबकि उमेश यादव (17) गंभीर रूप से घायल हो गया। मृतकों में तीन चचेरे भाई बताए गए हैं।
इस घटना ने यह भी दिखाया कि बारिश के दौरान पेड़ के नीचे खड़ा होना कितना खतरनाक हो सकता है। आमतौर पर बारिश से बचने के लिए लोग पेड़ का सहारा लेते हैं, लेकिन गरज-चमक के दौरान पेड़ के नीचे खड़ा होना वज्रपात के लिहाज से बेहद जोखिम भरा होता है। बिजली गिरने की स्थिति में पेड़ के आसपास मौजूद लोगों के भी इसकी चपेट में आने का खतरा रहता है।
गिरिडीह के तिलयडीह गांव में खेत में काम कर रहे संतोष तिवारी (40) भी वज्रपात की चपेट में आ गए और उनकी मौत हो गई। उनके साथ मौजूद विक्रम तिवारी घायल हो गए। बारिश के मौसम में खेतों में काम करने वाले किसानों और मजदूरों के सामने यही सबसे बड़ा खतरा रहता है कि अचानक मौसम खराब होने पर सुरक्षित स्थान तक पहुंचने का समय नहीं मिल पाता।
बगोदर के अलगडीहा में कोनार नहर निर्माण स्थल पर भी वज्रपात की घटना हुई। वहां पेड़ के नीचे खड़े मजदूर समीर गिद (47) की मौत हो गई, जबकि महावीर तुरी झुलस गए। बारिश से बचने के लिए पेड़ के नीचे शरण लेना यहां भी जानलेवा साबित हुआ।
गिरिडीह के खेतको पंचायत में खेमिया देवी (50) वज्रपात से झुलस गईं। गांडेय के ओझाडीह में पप्पू हांसदा (32), गावां में पूनम देवी (35) और नवडीहा के बघेडीह में आरती देवी (28) की भी बिजली गिरने से मौत हुई। इस दौरान तीन चरवाहों के झुलसने की भी जानकारी सामने आई है।
दुमका में भी वज्रपात से कई लोगों की मौत हुई। आलतामुनी मरांडी, बाबूलाल हेंब्रम और रोहित कुंवर की जान चली गई। वहीं आलतामुनी के पति और उनके चार वर्षीय बेटे के झुलसने की जानकारी है। इसके अलावा छह से ज्यादा लोगों के घायल होने की बात सामने आई है। बारिश और बिजली गिरने की घटनाओं ने जिले के ग्रामीण इलाकों में डर का माहौल पैदा कर दिया है।
लातेहार में भी वज्रपात की घटनाओं ने दो परिवारों को प्रभावित किया। यहां उपेंद्र उरांव (18) और शिवनाथ उरांव की मौत की जानकारी सामने आई है। चतरा के लावालौंग में संजय भुइयां (30) की जान चली गई। गढ़वा के रंका में कदरून खातून (45) और पलामू के मोहम्मदगंज में पुष्पा देवी (38) की भी वज्रपात से मौत हुई।
इन घटनाओं में एक बात समान नजर आई कि ज्यादातर हादसे खेतों में काम करने, धान की रोपनी, निर्माण स्थल पर मजदूरी करने या बारिश से बचने के लिए पेड़ के नीचे खड़े होने के दौरान हुए। मानसून के दौरान आकाशीय बिजली अक्सर अचानक गिरती है और लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचने का मौका नहीं मिल पाता।
मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए ग्रामीण इलाकों में विशेष सतर्कता जरूरी है। जब आसमान में बादल गरजने लगें और बिजली चमकने लगे तो खेतों में काम कर रहे लोगों को तुरंत काम रोककर सुरक्षित पक्के भवन में चले जाना चाहिए। खुले खेत में खड़े रहना या पेड़ के नीचे बैठना जोखिम बढ़ा सकता है।
बारिश के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने को लेकर भी कई तरह की धारणाएं हैं, लेकिन वज्रपात से बचने के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि व्यक्ति खुले स्थान से निकलकर सुरक्षित भवन के अंदर जाए। पेड़, बिजली के खंभे, टावर, ऊंची संरचनाएं और पानी वाले स्थान बिजली गिरने के दौरान खतरनाक हो सकते हैं।
मौसम विभाग के मुताबिक आने वाले दिनों में झारखंड में मानसून सक्रिय रहेगा। बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के कारण नमी वाली हवाओं का प्रभाव राज्य पर पड़ रहा है। इससे कई इलाकों में बारिश का दौर तेज हो सकता है। मौसम की स्थिति के आधार पर कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश और गरज-चमक के साथ तेज हवा भी चल सकती है।
रांची में पिछले 24 घंटे में हुई बारिश ने शहर के तापमान में भी राहत दी है। कांके में 76 मिलीमीटर बारिश दर्ज होना बताता है कि राजधानी के आसपास बारिश का प्रभाव काफी मजबूत रहा। शहर में 35 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। हालांकि बारिश के साथ बिजली चमकने और तेज हवा का खतरा बना हुआ है।
बारिश के दौरान शहरों में जलभराव की समस्या भी पैदा हो सकती है। निचले इलाकों में पानी जमा होने के साथ यातायात प्रभावित हो सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में कच्ची सड़कें और खेतों तक जाने वाले रास्ते भी बारिश के कारण खराब हो सकते हैं। लगातार बारिश होने पर नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने की संभावना रहती है।
पिछले 24 घंटे में वज्रपात से हुई 20 मौतों ने मौसम की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। यह आंकड़ा लोगों के लिए चेतावनी है कि मानसून के दौरान केवल बारिश को सामान्य मौसम मानकर लापरवाही नहीं करनी चाहिए। बारिश के साथ आकाशीय बिजली सबसे खतरनाक प्राकृतिक घटनाओं में से एक है और इससे बचाव के लिए समय रहते सुरक्षित स्थान पर पहुंचना बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों और प्रशासन की ओर से आमतौर पर सलाह दी जाती है कि गरज-चमक शुरू होने पर लोग खुले मैदान में न रहें। यदि आसपास कोई पक्का भवन उपलब्ध नहीं है तो सुरक्षित आश्रय मिलने तक सावधानी बरतनी चाहिए। पानी के स्रोतों से भी दूरी बनाए रखना जरूरी है।
किसानों के लिए अगले कुछ दिन विशेष सावधानी वाले हैं। धान की रोपनी और खेतों में अन्य कृषि कार्य चल रहे हैं। ऐसे में बारिश देखकर किसान खेतों में काम जारी रखते हैं, लेकिन अचानक वज्रपात होने की स्थिति में खतरा बढ़ सकता है। बादल गरजने लगें तो खेत से बाहर निकलना और सुरक्षित जगह पर जाना ज्यादा जरूरी है।
निर्माण कार्यों में लगे मजदूरों को भी बारिश के दौरान खुले निर्माण स्थल पर नहीं रहना चाहिए। क्रेन, लोहे के ढांचे, ऊंची मशीनों और खुले स्थानों के आसपास बिजली गिरने का खतरा हो सकता है। इसलिए मौसम खराब होने पर काम रोककर सुरक्षित स्थान पर जाना जरूरी है।
पशुपालकों और चरवाहों को भी विशेष सावधानी बरतनी होगी। पिछले 24 घंटे में चरवाहों के झुलसने की घटनाएं सामने आई हैं। बारिश और गरज-चमक के दौरान पशुओं के साथ खुले मैदान में रहना जोखिमपूर्ण हो सकता है। ऐसे समय में सुरक्षित आश्रय की व्यवस्था करना जरूरी है।
आने वाले पांच दिनों में राज्य के कई हिस्सों में मौसम सक्रिय रहने के कारण प्रशासन को भी संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखनी होगी। भारी बारिश वाले इलाकों में निचले क्षेत्रों, नदी-नालों और कमजोर संरचनाओं की निगरानी जरूरी है। वज्रपात की चेतावनी वाले जिलों में लोगों को समय रहते अलर्ट करने की व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी।
मौसम विभाग का यलो अलर्ट लोगों को घबराने के लिए नहीं बल्कि सतर्क रहने के लिए जारी किया जाता है। लोगों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान देना चाहिए। मौसम खराब होने पर अनावश्यक यात्रा से बचना और विशेष रूप से पहाड़ी, ग्रामीण तथा खुले इलाकों में सावधानी बरतना बेहतर होगा।
झारखंड में मानसून की सक्रियता किसानों के लिए राहत भी लेकर आई है। अच्छी बारिश से खरीफ फसलों को फायदा मिल सकता है और खेतों में नमी बढ़ेगी। लेकिन अत्यधिक बारिश वाले क्षेत्रों में जलभराव और फसल खराब होने की समस्या भी पैदा हो सकती है। इसलिए बारिश का संतुलित होना कृषि के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।
राज्य में अगले कुछ दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना के बीच लोगों को मौसम के अचानक बदलने के लिए तैयार रहना होगा। दिन में धूप रहने के बाद अचानक बादल घिरना और तेज बारिश शुरू होना मानसून में सामान्य है। ऐसे में बाहर निकलते समय मौसम की जानकारी लेना और गरज-चमक की स्थिति में सुरक्षित स्थान चुनना जरूरी है।
वज्रपात से बचने के लिए सबसे जरूरी सावधानी यही है कि बिजली चमकने या गरज सुनाई देने पर खुले स्थान से हट जाएं। पेड़ के नीचे खड़े होने से बचें, खेत में काम बंद करें और किसी पक्के भवन के अंदर चले जाएं। नदी, तालाब, पोखर या अन्य जलस्रोतों से दूरी बनाए रखें। यदि किसी व्यक्ति के आसपास बिजली गिरती है तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेना भी जरूरी है।
झारखंड में अगले पांच दिन मौसम की दृष्टि से महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। एक तरफ बंगाल की खाड़ी के निम्न दबाव से मानसून सक्रिय हुआ है और कई जिलों में बारिश का फायदा मिलने की उम्मीद है, तो दूसरी तरफ वज्रपात का खतरा लोगों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। पिछले 24 घंटे में 20 लोगों की मौत इस खतरे की गंभीरता को साफ तौर पर दिखाती है।
फिलहाल रांची समेत राज्य के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी है। 5 से 8 अगस्त तक अलग-अलग जिलों के लिए जारी अलर्ट के बीच लोगों को मौसम की स्थानीय चेतावनियों पर नजर रखनी चाहिए। खासकर किसानों, मजदूरों, चरवाहों और खुले इलाकों में काम करने वाले लोगों को बारिश के साथ होने वाली गरज-चमक को बिल्कुल हल्के में नहीं लेना चाहिए।
झारखंड में मानसून की यह सक्रियता आने वाले दिनों में और बारिश ला सकती है। इससे जहां सूखे या कम बारिश वाले इलाकों को राहत मिलेगी, वहीं भारी बारिश वाले क्षेत्रों में जलभराव, तेज हवा और वज्रपात जैसी चुनौतियां बढ़ सकती हैं। ऐसे में प्रशासन के अलर्ट और सुरक्षा निर्देशों का पालन करना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।









