तमिलनाडु के मंत्री आर. निर्मलकुमार ने दावा किया कि डीएमके और बीजेपी के बीच पहले पर्दे के पीछे राजनीतिक समझ थी और अब दोनों सीधे गठबंधन की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कनिमोझी की ओम बिरला से मुलाकात और परिसीमन मुद्दे को लेकर डीएमके पर सवाल उठाए।
चेन्नई: तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राजनीतिक रिश्तों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। तमिलनाडु के ऊर्जा संसाधन एवं कानून मंत्री आर. निर्मलकुमार ने आरोप लगाया है कि डीएमके और बीजेपी के बीच पहले पर्दे के पीछे राजनीतिक समझ थी, लेकिन अब दोनों दल कथित तौर पर सीधे गठबंधन की दिशा में बढ़ रहे हैं। हालांकि, यह मंत्री का राजनीतिक आरोप है और इसे डीएमके की ओर से गठबंधन की आधिकारिक घोषणा के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
मंत्री निर्मलकुमार ने शुक्रवार, 14 अगस्त को चेन्नई स्थित सचिवालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बयान दिया। उनसे डीएमके की संसदीय दल की नेता कनिमोझी के लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से नई दिल्ली में मुलाकात के बारे में सवाल किया गया था। कनिमोझी ने इस मुलाकात को संसद में डीएमके सांसदों के बैठने की व्यवस्था से जुड़ा बताया था।
कनिमोझी की मुलाकात पर उठाए सवाल
निर्मलकुमार ने कनिमोझी के स्पष्टीकरण पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर मुलाकात केवल सांसदों की सीटिंग व्यवस्था पर चर्चा के लिए थी, तो इसकी जरूरत क्यों पड़ी, जबकि लोकसभा अध्यक्ष की ओर से सांसदों के लिए चाय का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया था।
उन्होंने इसी घटनाक्रम को डीएमके और बीजेपी के बीच कथित नजदीकी से जोड़ते हुए कहा कि दोनों दल पहले अप्रत्यक्ष रूप से साथ रहे हैं और अब सीधे राजनीतिक संबंध बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
मंत्री ने अपने दावे के समर्थन में डीएमके और बीजेपी से जुड़े कुछ नेताओं के हालिया बयानों का भी उल्लेख किया। उन्होंने पूर्व मंत्री अनिता आर. राधाकृष्णन के उस कथित बयान का हवाला दिया, जिसमें डीएमके सांसद तिरुचि शिवा के भविष्य में केंद्रीय मंत्री बनने की बात कही गई थी। इसके अलावा उन्होंने पूर्व डीएमके सांसद कनिमोझी एनवीएन सोमू और बीजेपी नेता वनाथी श्रीनिवासन के राजनीतिक रिश्तों को लेकर दिए गए बयानों का भी जिक्र किया।
2001 के राजनीतिक समीकरण की याद दिलाई
निर्मलकुमार ने अपने आरोपों को मजबूत करने के लिए वर्ष 2001 के राजनीतिक घटनाक्रम का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि डीएमके ने उस समय बीजेपी के साथ गठबंधन किया था और अब पार्टी कथित तौर पर उसी तरह की राजनीतिक दिशा में लौट रही है।
मंत्री ने आरोप लगाया कि डीएमके केंद्र सरकार के सामने इसलिए नरम रुख अपना रही है क्योंकि वह अपने हितों और कथित तौर पर अर्जित संपत्ति को बचाना चाहती है। हालांकि, उन्होंने जिन आरोपों का उल्लेख किया, उनके समर्थन में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कोई नया दस्तावेजी प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया।
इस तरह के राजनीतिक आरोपों को चुनावी और गठबंधन की राजनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है। डीएमके और बीजेपी तमिलनाडु की राजनीति में लंबे समय से अलग-अलग राजनीतिक खेमों में नजर आते रहे हैं और दोनों दलों के बीच वैचारिक मतभेद भी प्रमुख मुद्दा रहे हैं।
परिसीमन विधेयक को लेकर भी डीएमके पर निशाना
निर्मलकुमार ने परिसीमन के मुद्दे पर भी डीएमके को घेरा। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु विधानसभा में डीएमके ने परिसीमन के खिलाफ प्रस्ताव के समर्थन में मतदान किया है, लेकिन पार्टी ने अभी तक स्पष्ट रूप से यह नहीं कहा है कि संसद में प्रस्तावित परिसीमन विधेयक आने पर वह उसके खिलाफ मतदान करेगी।
परिसीमन का मुद्दा दक्षिण भारतीय राज्यों के लिए राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है। दक्षिणी राज्यों की प्रमुख चिंताओं में यह शामिल है कि जनसंख्या नियंत्रण में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को भविष्य में लोकसभा सीटों के पुनर्वितरण से नुकसान हो सकता है।
तमिलनाडु सहित कई दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक पार्टियां इस मुद्दे पर केंद्र से स्पष्ट आश्वासन की मांग करती रही हैं। ऐसे में निर्मलकुमार का बयान डीएमके के रुख को लेकर नए राजनीतिक सवाल खड़े करता है।
तमिलनाडु में निवेश को लेकर सरकार का दावा
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मंत्री निर्मलकुमार ने तमिलनाडु में निवेश को लेकर भी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने राज्य में लगभग एक लाख करोड़ रुपये के निवेश से जुड़े प्रस्तावों का जिक्र करते हुए कहा कि कंपनियां पहले से ही तमिलनाडु में निवेश करने की इच्छुक थीं।
उन्होंने दावा किया कि पिछली डीएमके सरकार के दौरान कंपनियों के साथ सार्वजनिक रूप से समझौता ज्ञापन यानी MoU पर हस्ताक्षर किए जाते थे, लेकिन कथित तौर पर इसके पीछे अलग समझौते करने की जरूरत पड़ती थी। मंत्री ने आरोप लगाया कि इसी कारण कुछ कंपनियां राज्य में निवेश करने से हिचकती थीं।
निर्मलकुमार के मुताबिक मौजूदा सरकार में पारदर्शिता बढ़ने के कारण कंपनियां तमिलनाडु में निवेश के लिए आगे आ रही हैं। उन्होंने निवेश में वृद्धि को सरकार की कार्यशैली और प्रशासनिक पारदर्शिता से जोड़कर पेश किया।
हालांकि, निवेश और औद्योगिक परियोजनाओं से जुड़े आंकड़ों का आकलन करते समय आधिकारिक निवेश समझौतों, परियोजनाओं के क्रियान्वयन और वास्तविक निवेश के बीच अंतर को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है।
दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक पर भी जानकारी
मंत्री निर्मलकुमार ने दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की प्रस्तावित बैठक को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बैठक अगले सप्ताह मामल्लपुरम में आयोजित होने की उम्मीद है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बैठक की आधिकारिक तारीख और कार्यक्रम अभी जारी नहीं हुआ है, लेकिन आयोजन से संबंधित तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद में दक्षिण भारत के राज्यों के बीच विभिन्न प्रशासनिक, आर्थिक और अंतरराज्यीय मुद्दों पर चर्चा होती है।
ऐसे मंचों पर राज्यों के बीच सहयोग, कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे, जल संसाधन और आर्थिक विकास जैसे मुद्दे उठाए जाते हैं।
बयान से तमिलनाडु की राजनीति में बढ़ी हलचल
निर्मलकुमार का बयान ऐसे समय आया है जब तमिलनाडु में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के बीच राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा तेज है। डीएमके और बीजेपी के बीच किसी संभावित प्रत्यक्ष गठबंधन को लेकर मंत्री का दावा फिलहाल राजनीतिक आरोप के स्तर पर है। डीएमके की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक ऐलान सामने नहीं आया है कि वह बीजेपी के साथ गठबंधन करने जा रही है।
कनिमोझी की लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात को लेकर डीएमके का पक्ष स्पष्ट है कि यह सांसदों की बैठने की व्यवस्था से संबंधित थी। ऐसे में इस मुलाकात को गठबंधन की शुरुआत के रूप में देखना अभी राजनीतिक अटकलों पर आधारित होगा।
फिलहाल निर्मलकुमार के आरोपों ने तमिलनाडु की राजनीति में डीएमके और बीजेपी के संबंधों को लेकर बहस जरूर तेज कर दी है। आने वाले दिनों में परिसीमन विधेयक, संसद में विपक्षी रणनीति और राज्य की चुनावी राजनीति से जुड़े फैसलों पर दोनों दलों के रुख से यह स्पष्ट हो सकता है कि उनके बीच राजनीतिक दूरी बनी रहती है या समीकरणों में कोई बड़ा बदलाव आता है।










