DMK ने संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए विपक्ष के प्रस्ताव का समर्थन करने की बात कही है। पार्टी ने स्पष्ट किया कि वह I.N.D.I.A. ब्लॉक का हिस्सा नहीं है और मुद्दों के आधार पर विपक्ष के साथ खड़ी होगी।
चेन्नई: तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए संसद में लाए जाने वाले प्रस्ताव को समर्थन देने की बात कही है। हालांकि, पार्टी ने साथ ही स्पष्ट किया है कि वह विपक्षी I.N.D.I.A. ब्लॉक का हिस्सा नहीं है। DMK प्रवक्ता टीकेएस इलंगोवन ने 29 सितंबर को चेन्नई में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि संसद में यदि विपक्ष ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए प्रस्ताव लाता है तो उनकी पार्टी उसका समर्थन करेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस समर्थन का अर्थ यह नहीं है कि DMK दोबारा I.N.D.I.A. ब्लॉक में शामिल हो गई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर संसद में प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं। इसी बीच DMK ने विपक्षी गठबंधन से अपनी दूरी बनाए रखते हुए एक मुद्दे पर उसके साथ खड़े होने का संकेत दिया है।
DMK ने कहा- हम I.N.D.I.A. ब्लॉक का हिस्सा नहीं
टीकेएस इलंगोवन ने कहा कि DMK वैचारिक आधार पर विपक्षी दलों के साथ कुछ मुद्दों पर खड़ी हो सकती है, लेकिन इसे विपक्षी गठबंधन में शामिल होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि DMK I.N.D.I.A. ब्लॉक का हिस्सा नहीं है, लेकिन संसद में यदि ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए कोई प्रस्ताव लाया जाता है तो पार्टी उसका समर्थन करेगी। उन्होंने इसके पीछे DMK अध्यक्ष एमके स्टालिन के पहले दिए गए बयान का हवाला दिया।
DMK का यह रुख उस समय सामने आया है जब पार्टी ने 30 सितंबर को होने वाली विपक्षी गठबंधन की बैठक से दूरी बनाए रखने का फैसला किया है। रिपोर्टों के मुताबिक, बैठक में विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) और ज्ञानेश कुमार को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा होनी है।
एमके स्टालिन पहले ही कर चुके हैं हटाने की मांग
DMK अध्यक्ष और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने 23 सितंबर को ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की थी। स्टालिन ने कहा था कि CEC को अपने पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है।
इलंगोवन ने इसी बयान को पार्टी के मौजूदा रुख का आधार बताया। उनका कहना था कि संसद में ज्ञानेश कुमार को हटाने के प्रस्ताव का समर्थन करना पार्टी के INDIA ब्लॉक में शामिल होने का संकेत नहीं है।
इस तरह DMK ने एक ओर विपक्ष के प्रस्ताव को समर्थन देने की बात कही है, वहीं दूसरी ओर गठबंधन की औपचारिक स्थिति से खुद को अलग रखा है।
संसद में प्रस्ताव को लेकर विपक्ष की तैयारी
ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर विपक्षी दल संसद में एक प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, विपक्षी दलों की ओर से दोनों सदनों में प्रस्ताव के लिए नोटिस तैयार करने पर चर्चा चल रही है।
इस मुद्दे को लेकर विपक्ष की गतिविधियां विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर उठे विवाद से भी जुड़ी हैं। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में बदलावों को लेकर सवाल उठाए हैं।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने अपने कामकाज और निर्णय प्रक्रिया को लेकर लगाए गए आरोपों का खंडन किया है। इसलिए ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की राजनीतिक मांगों और चुनाव आयोग के आधिकारिक रुख को अलग-अलग समझना महत्वपूर्ण है।
कांग्रेस और DMK के रिश्तों में क्यों आई दूरी?
DMK और कांग्रेस के रिश्तों में हाल के दिनों में तनाव बढ़ा है। इसका असर राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दलों के समन्वय पर भी दिखाई दे रहा है।
DMK ने कांग्रेस के साथ तमिलनाडु में राजनीतिक संबंधों और तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के साथ कांग्रेस के रुख को लेकर आपत्ति जताई है। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस के कुछ राजनीतिक फैसलों के बाद दोनों दलों के बीच पहले जैसी स्थिति नहीं रही।
टीकेएस इलंगोवन ने कांग्रेस पर तमिलनाडु में TVK के साथ राजनीतिक रूप से नजदीकी बढ़ाने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ने TVK का समर्थन दो मंत्री पद हासिल करने के उद्देश्य से किया था। यह इलंगोवन का आरोप है; कांग्रेस की ओर से इस संदर्भ में अलग राजनीतिक व्याख्या सामने आ सकती है।
अखिलेश यादव की गैरमौजूदगी पर भी DMK का बयान
DMK प्रवक्ता ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के विपक्षी बैठकों से दूर रहने का भी उल्लेख किया। इलंगोवन ने दावा किया कि अखिलेश यादव भी DMK की तरह कुछ बैठकों में शामिल नहीं हो रहे हैं और इसके लिए उन्होंने कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया।
हालांकि, विपक्षी दलों के बीच अलग-अलग मुद्दों पर सहयोग और राजनीतिक गठबंधन की स्थिति लगातार बदल रही है। इसलिए किसी एक मुद्दे पर साथ आना जरूरी नहीं कि सभी दलों के बीच व्यापक गठबंधन की वापसी को दर्शाता हो।
DMK का तीसरे मोर्चे की दिशा में संकेत
DMK के मौजूदा रुख में राष्ट्रीय स्तर पर स्वतंत्र राजनीतिक स्थिति बनाए रखने के संकेत भी दिखाई दे रहे हैं। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वह I.N.D.I.A. ब्लॉक का हिस्सा नहीं है, लेकिन बीजेपी के खिलाफ किसी मुद्दे पर विपक्षी दलों के साथ संसद में खड़ी हो सकती है।
दूसरी ओर, हालिया रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि DMK अपने स्तर पर CEC को हटाने के लिए प्रस्ताव लाने की संभावना पर विचार कर सकती है।
यदि ऐसा होता है तो यह घटनाक्रम विपक्षी राजनीति में DMK की अलग भूमिका को और स्पष्ट कर सकता है। फिलहाल पार्टी ने जिस प्रस्ताव की बात की है, उसका समर्थन उसके पहले से घोषित रुख के अनुरूप है।
CEC के खिलाफ विवाद
ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद मुख्य रूप से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित है। विपक्षी दलों ने आयोग के फैसलों और मतदाता सूची में कथित बदलावों को लेकर सवाल उठाए हैं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, विपक्षी दल ज्ञानेश कुमार पर मतदाता सूची से जुड़े गंभीर आरोप लगा रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग ने अपने कामकाज का बचाव किया है। ऐसे आरोपों और उनके जवाबों को राजनीतिक दावों के रूप में देखा जाना चाहिए, जब तक संबंधित मामलों पर सक्षम संस्थाओं की अंतिम पुष्टि न हो।
इसी विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने भी ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली से जुड़ी एक याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई करने पर सहमति जताई है। याचिका में चुनाव आयोग की बहु-सदस्यीय संस्था के रूप में निर्णय प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
30 सितंबर की विपक्षी बैठक पर नजर
30 सितंबर को दिल्ली में विपक्षी दलों की बैठक प्रस्तावित है। बैठक में SIR से जुड़े मुद्दों और ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसद में प्रस्ताव की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं के इसमें शामिल होने की जानकारी सामने आई है।
हालांकि DMK ने इस बैठक से दूरी बनाए रखी है। इसके बावजूद पार्टी ने CEC को हटाने के प्रस्ताव का समर्थन करने की बात कही है। इससे यह स्पष्ट होता है कि DMK विपक्षी गठबंधन की औपचारिक संरचना से अलग रहते हुए कुछ मुद्दों पर विपक्षी दलों के साथ संसदीय समन्वय बनाए रखना चाहती है।
फिलहाल ज्ञानेश कुमार को हटाने की प्रक्रिया राजनीतिक और संसदीय स्तर पर आगे बढ़ने की स्थिति में है। DMK का समर्थन इस प्रस्ताव के लिए विपक्षी दलों के बीच व्यापक समर्थन जुटाने की कोशिश में एक महत्वपूर्ण संसदीय घटनाक्रम है, जबकि पार्टी का I.N.D.I.A. ब्लॉक से अलग रहने का रुख भी कायम है।










