ईरान का बड़ा ऐलान: ‘होर्मुज स्ट्रेट अब पहले जैसा नहीं रहेगा’, अमेरिका पर भरोसा नहीं; वार्ता के बीच भी सेना अलर्ट

ईरान ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट का प्रबंधन अब नए तरीके से होगा। अमेरिका पर अविश्वास जताते हुए तेहरान ने वार्ता के बीच भी सेना को पूरी तरह अलर्ट कर रखा है

ईरान ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट अब युद्ध से पहले जैसी स्थिति में नहीं रहेगा। अमेरिका के साथ बातचीत जारी रहने के बावजूद तेहरान ने अविश्वास जताया है और समुद्री मार्ग के प्रबंधन व सुरक्षा पर अपनी रणनीति लागू करने की बात कही है।

ईरान/अमेरका समझौता: मध्य पूर्व में हालिया तनाव के बीच ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बड़ा बयान दिया है। ईरान के संसद अध्यक्ष और अमेरिका के साथ चल रही बातचीत के प्रमुख चेहरों में शामिल मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट अब युद्ध से पहले जैसी स्थिति में नहीं लौटेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग की निगरानी और प्रबंधन भविष्य में ईरान अपने तरीके से करेगा, हालांकि अंतरराष्ट्रीय कानूनों और समुद्री नियमों का पालन जारी रहेगा।

गालिबाफ का यह बयान ऐसे समय आया है जब स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच तकनीकी स्तर की बातचीत का पहला दौर पूरा हुआ है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बावजूद वार्ता की प्रक्रिया जारी है, लेकिन तेहरान ने साफ कर दिया है कि उसे अब भी वॉशिंगटन पर भरोसा नहीं है।

अमेरिका पर भरोसा नहीं, सतर्क रहना जरूरी: गालिबाफ

ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार, गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत जारी रहने का मतलब यह नहीं है कि ईरान ने अपना रुख बदल लिया है। उन्होंने कहा कि ईरान ने कभी अमेरिकियों पर भरोसा नहीं किया और भविष्य में भी सावधानी बरतना ही समझदारी होगी।

उनका कहना था कि कूटनीतिक वार्ता एक अलग प्रक्रिया है, जबकि राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक हितों की रक्षा ईरान की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी। गालिबाफ ने यह भी संकेत दिया कि होर्मुज स्ट्रेट के भविष्य को लेकर ईरान अपनी सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुसार फैसले करेगा।

ट्रम्प के दावे को ईरान ने किया खारिज

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में दावा किया था कि ईरान अपने परमाणु ठिकानों की अंतरराष्ट्रीय जांच के लिए तैयार हो गया है। हालांकि ईरान ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया।

तेहरान का कहना है कि परमाणु कार्यक्रम को लेकर कोई नई सहमति नहीं बनी है और मौजूदा बातचीत का उद्देश्य व्यापक राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा करना है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका की ओर से किए जा रहे दावों और वास्तविक बातचीत के बीच काफी अंतर है।

पाकिस्तान ने वार्ता को बताया सकारात्मक

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने स्विट्जरलैंड में हुई अमेरिका-ईरान वार्ता को सकारात्मक बताया है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने अगले 60 दिनों के भीतर किसी संभावित समझौते की दिशा में काम करने पर सहमति जताई है।

इसके अलावा उच्चस्तरीय समिति के गठन और तकनीकी स्तर की बातचीत को जारी रखने पर भी सहमति बनी है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो क्षेत्र में लंबे समय से जारी तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है।

अमेरिका ने ईरानी तेल पर दी 60 दिन की राहत

ट्रम्प प्रशासन ने ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के उत्पादन तथा बिक्री पर लागू कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी ढील देने का फैसला किया है। यह राहत 21 अगस्त तक प्रभावी रहेगी।

अमेरिका का कहना है कि यह कदम होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही को सुचारू बनाए रखने और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित होने से बचाने के लिए उठाया गया है। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा को लेकर कुछ स्तर पर समझ बनी है।

बातचीत जारी, लेकिन सेना पूरी तरह तैयार

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के डिप्टी सेक्रेटरी गदीर नेजामी ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत के बावजूद सेना की तैयारियों में कोई कमी नहीं की गई है।

उन्होंने कहा कि ईरानी सशस्त्र बल किसी भी संभावित खतरे का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उनके अनुसार, बातचीत और सैन्य तैयारी दोनों समानांतर रूप से चल रही हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

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होर्मुज स्ट्रेट में फिर बढ़ने लगी तेल टैंकरों की आवाजाही

हालिया संघर्ष और सुरक्षा चिंताओं के कारण होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी। हालांकि अब स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होती दिखाई दे रही है।

रिपोर्टों के अनुसार, करीब 20 लाख बैरल तेल लेकर दो बड़े टैंकर इस समुद्री मार्ग को पार कर चुके हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि ये जहाज किस देश के थे। विशेषज्ञों का कहना है कि यातायात में सुधार जरूर हुआ है, लेकिन अभी भी यह स्तर संघर्ष से पहले की तुलना में काफी कम है।

ओमान पहुंचे गालिबाफ और अराघची

स्विट्जरलैंड में बातचीत के बाद ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची ओमान की राजधानी मस्कट पहुंचे हैं।

ओमान के विदेश मंत्री बद्र बिन हमद अलबुसैदी के साथ हुई बैठक में द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय स्थिरता और होर्मुज स्ट्रेट के प्रबंधन पर चर्चा की गई। दोनों पक्षों ने समुद्री मार्गों पर सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

ओमान लंबे समय से अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है और मौजूदा वार्ता प्रक्रिया में भी उसकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

परमाणु कार्यक्रम को लेकर विवाद बरकरार

ईरान का परमाणु कार्यक्रम पिछले कई वर्षों से अंतरराष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। ईरान का दावा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, जबकि अमेरिका और इजराइल को आशंका है कि तेहरान परमाणु हथियार क्षमता विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

2015 के परमाणु समझौते के तहत ईरान ने यूरेनियम संवर्धन की सीमा 3.67 प्रतिशत तक रखने पर सहमति दी थी। लेकिन 2018 में अमेरिका के समझौते से बाहर निकलने के बाद ईरान ने धीरे-धीरे संवर्धन स्तर बढ़ाना शुरू कर दिया।

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अनुसार, जून 2025 तक ईरान 60 प्रतिशत तक यूरेनियम संवर्धन कर रहा था और उसके पास बड़ी मात्रा में संवर्धित यूरेनियम का भंडार मौजूद था। यह स्तर परमाणु हथियारों के लिए आवश्यक 90 प्रतिशत से कम है, लेकिन नागरिक उपयोग की सामान्य जरूरतों से काफी अधिक माना जाता है।

वैश्विक बाजारों की नजर वार्ता पर

होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजारों, तेल कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित कर सकता है।

अमेरिका और ईरान के बीच जारी वार्ता से फिलहाल तनाव में कुछ कमी की उम्मीद जगी है, लेकिन दोनों देशों के बीच अविश्वास अभी भी कायम है। आने वाले 60 दिन यह तय करेंगे कि बातचीत किसी स्थायी समझौते तक पहुंचती है या क्षेत्र एक बार फिर अनिश्चितता और तनाव के दौर में प्रवेश करता है।

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