उत्तर प्रदेश के गोरखपुर की तीन बहनें पिता की बीमारी के बाद परिवार संभालने के साथ UPSC की तैयारी कर रही हैं। वे दिन में चाय की दुकान चलाती हैं और रात में IAS-IPS बनने के सपने के लिए पढ़ाई करती हैं।
UPSC Inspiring Story: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर की वर्तिका, वंदिता और अवंतिका विपरीत परिस्थितियों के बीच अपने परिवार का सहारा बनी हुई हैं। साल 2017 में पिता रामसकल उपाध्याय के पैरालाइज होने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई। इसके बाद तीनों बहनों ने ट्यूशन और अन्य काम किए और अब DDU गेट के सामने चाय की दुकान चलाने के साथ सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रही हैं।
पिता की बीमारी के बाद बदली परिवार की जिंदगी
गोरखपुर के महाराजगंज निवासी रामसकल उपाध्याय एक जानी-मानी इंश्योरेंस कंपनी में ब्रांच मैनेजर थे। परिवार में उनकी पत्नी, तीन बेटियां वर्तिका, वंदिता और अवंतिका तथा बेटा शिवम हैं। परिवार की जिंदगी सामान्य तरीके से चल रही थी, लेकिन साल 2017 में रामसकल पैरालाइज हो गए। बीमारी के बाद उनकी नौकरी चली गई और परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया।

रामसकल परिवार में अकेले कमाने वाले थे। उनकी बीमारी के इलाज और दवाओं में जमा पूंजी भी खर्च होने लगी। ऐसे समय में उनकी बेटियों ने परिवार की जिम्मेदारी संभालने का फैसला किया। उन्होंने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया और छोटी-मोटी नौकरियां भी कीं। हालांकि, इन कामों से होने वाली आमदनी परिवार के रोजमर्रा के खर्च और पिता के इलाज के लिए पर्याप्त नहीं थी।
ट्यूशन से चाय की दुकान तक का सफर
परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए तीनों बहनों ने अपनी मां से चाय की दुकान शुरू करने की बात कही। शुरुआत में मां को समाज और लोगों की प्रतिक्रिया की चिंता थी। उन्हें डर था कि लोग क्या कहेंगे और परिवार का मजाक बनाया जाएगा। इसके बावजूद परिस्थितियों को देखते हुए परिवार ने चाय की दुकान शुरू करने का फैसला किया।
किसी तरह 8,000 रुपये जुटाए गए और DDU गेट के सामने चाय की दुकान शुरू की गई। दुकान का नाम 'बिलीवर बिस्ट्रो' यानी 'आस्थावानों का कैफे' रखा गया। खास बात यह है कि दुकान उसी कॉलेज के सामने है, जहां परिवार की सबसे छोटी बेटी अवंतिका पढ़ाई कर रही हैं।
शुरुआत में दुकान पर केवल चाय बेची जाती थी। ग्राहकों की संख्या बढ़ने के साथ मेन्यू में मैगी भी शामिल कर ली गई। दुकान अब परिवार की आय का एक महत्वपूर्ण साधन बन गई है।
दिन में दुकान, रात में UPSC की पढ़ाई
तीनों बहनें UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रही हैं। दो बहनें सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक दुकान संभालती हैं। दिनभर काम करने के बाद घर लौटकर वे पढ़ाई करती हैं। कई बार उनकी पढ़ाई देर रात तक चलती है और वे आधी रात से लेकर सुबह 2 बजे तक भी तैयारी करती हैं।
बड़ी बहन वर्तिका घर के काम और पिता की देखभाल की जिम्मेदारी भी संभालती हैं। इसके साथ वह रोजाना करीब 5 से 6 घंटे UPSC की तैयारी करती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 22 साल की वर्तिका ने BSc की पढ़ाई पूरी कर ली है और वह ऑनलाइन क्लास के जरिए सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रही हैं। उनका लक्ष्य डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट यानी DM बनना है।
वंदिता BSc सेकेंड ईयर में पढ़ रही हैं और वह IPS ऑफिसर बनने का सपना देखती हैं। वहीं, 19 साल की अवंतिका DDU में BA फर्स्ट ईयर की छात्रा हैं और IAS ऑफिसर बनने की तैयारी कर रही हैं।
बड़ी बहन दोनों बहनों को देती हैं गाइडेंस
तीनों बहनों की पढ़ाई का सफर भी एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। बड़ी बहन वर्तिका अपनी छोटी बहनों को UPSC की तैयारी में गाइड करती हैं। वह उन्हें पढ़ाई के लिए नोट्स उपलब्ध कराने के साथ उपयोगी YouTube वीडियो और ऑनलाइन क्लास से जुड़ी जानकारी भी बताती हैं।
परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियां, पिता की देखभाल, दुकान चलाना और पढ़ाई—इन सभी जिम्मेदारियों के बीच तीनों बहनों ने सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य नहीं छोड़ा है। उनकी दिनचर्या बताती है कि परिवार की परिस्थितियों के बावजूद वे अपनी पढ़ाई और भविष्य के लक्ष्य के लिए लगातार मेहनत कर रही हैं।













