हिमाचल प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय बना हुआ है। राज्य के कई हिस्सों में लगातार बारिश के बीच मौसम विभाग ने भारी बारिश को लेकर चेतावनी जारी की है। बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और सड़कें बाधित होने का खतरा बढ़ गया है। इसी बीच सिरमौर जिले में नाहन-श्रीरेणुकाजी मार्ग पर पहाड़ दरकने की घटना सामने आई है। पहाड़ी से मलबा और पत्थर सड़क पर आने के कारण इस मार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ। लगातार बारिश के बीच प्रशासन और संबंधित विभागों को संवेदनशील सड़कों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में 3 सितंबर तक मानसून सक्रिय रह सकता है और इस दौरान कई जिलों में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। राज्य में पहले से ही बारिश के कारण सड़क संपर्क प्रभावित है। मंगलवार को प्रदेश में 98 सड़कें बंद बताई गई थीं, जबकि बिजली व्यवस्था से जुड़े 107 डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर क्षेत्र भी प्रभावित हुए थे। बारिश के कारण कुछ क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति पर भी असर पड़ा है।
नाहन-श्रीरेणुकाजी मार्ग पर पहाड़ दरकने की घटना ने पहाड़ी सड़कों पर बढ़ते खतरे को एक बार फिर सामने ला दिया है। बारिश के दौरान पहाड़ों की मिट्टी और चट्टानों में नमी बढ़ जाती है, जिससे कमजोर हिस्सों के खिसकने का खतरा बढ़ जाता है। कई बार पहाड़ से अचानक पत्थर और मलबा सड़क पर आ जाता है और कुछ ही मिनटों में वाहनों की आवाजाही रुक सकती है। ऐसे में इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों और यात्रियों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
सिरमौर हिमाचल के उन जिलों में शामिल है जहां मानसून के दौरान कई पहाड़ी और संपर्क मार्ग भूस्खलन की चपेट में आते हैं। नाहन और श्रीरेणुकाजी के बीच का इलाका भी पहाड़ी भूभाग वाला है। लगातार बारिश होने पर सड़क किनारे की मिट्टी कमजोर होने के साथ ऊपर की ढलानों से पत्थर गिरने की आशंका बढ़ जाती है। प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की जाती है कि बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और यदि किसी मार्ग पर भूस्खलन या पत्थर गिरने की सूचना मिले तो उस रास्ते से जाने से बचें।
राज्य में इस समय केवल सिरमौर ही नहीं, बल्कि कई अन्य जिलों में भी मौसम खराब रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में स्थानीय नाले और खड्ड अचानक उफान पर आ सकते हैं। नदियों और बरसाती नालों के आसपास रहने वाले लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है।
हिमाचल में इस मानसून के दौरान बारिश की वजह से सड़क संपर्क बार-बार प्रभावित हुआ है। मंगलवार तक 98 सड़कें बंद थीं। इससे पहले भी राज्य में सैकड़ों सड़कें भूस्खलन, बाढ़ और भारी बारिश की वजह से बाधित हो चुकी हैं। प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की टीमें लगातार बंद सड़कों को खोलने के लिए काम करती रही हैं। कई जगह मशीनरी के माध्यम से मलबा हटाकर यातायात बहाल किया जाता है, लेकिन लगातार बारिश होने पर दोबारा भूस्खलन की स्थिति पैदा हो जाती है।
नाहन-श्रीरेणुकाजी मार्ग पर पहाड़ दरकने की घटना के बाद स्थानीय लोगों की चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि बारिश का दौर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। मौसम पूर्वानुमान में अगले कुछ दिनों तक बारिश की संभावना बनी हुई है। ऐसे में किसी भी संवेदनशील सड़क पर अचानक मलबा आने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। सड़क पर यात्रा करने वालों के लिए जरूरी है कि वे मौसम और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी ट्रैफिक एडवाइजरी की जानकारी लेते रहें।
बारिश के दौरान पहाड़ी सड़कों पर वाहन चलाते समय तेज रफ्तार से बचना भी बेहद जरूरी है। सड़क पर मलबा, छोटे पत्थर या कीचड़ दिखाई देने पर वाहन को सावधानी से आगे बढ़ाना चाहिए। कई बार सड़क का एक हिस्सा ऊपर से देखने में सुरक्षित लगता है, लेकिन उसके नीचे की मिट्टी कमजोर हो सकती है। इसलिए भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में रुकने या वाहन खड़ा करने से भी बचने की सलाह दी जाती है।
राज्य के दूसरे हिस्सों में भी बारिश से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। लगातार बारिश के कारण कई जगह सड़कें बंद हुई हैं और बिजली आपूर्ति में व्यवधान आया है। ट्रांसफॉर्मर प्रभावित होने से कुछ क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था बाधित हुई है। जल आपूर्ति से जुड़ी योजनाओं पर भी बारिश और भूस्खलन का असर पड़ा है। संबंधित विभागों की टीमें प्रभावित सेवाओं को बहाल करने में जुटी हैं।
हिमाचल में इस वर्ष मानसून की कुल बारिश सामान्य से कम रही है, लेकिन बारिश का वितरण असमान रहा है। कुछ जिलों और समयावधियों में कम बारिश हुई, जबकि कुछ दिनों में अचानक तेज बारिश ने मुश्किलें बढ़ा दीं। यही स्थिति पहाड़ी क्षेत्रों के लिए चुनौती बनती है, क्योंकि कम अवधि में तेज बारिश होने पर जमीन में पानी का दबाव बढ़ जाता है और भूस्खलन का खतरा पैदा हो जाता है।
मौसम विभाग के मुताबिक हिमाचल में 3 सितंबर तक मानसून सक्रिय रहने की संभावना है। इसके बाद भी कुछ क्षेत्रों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। आने वाले दिनों में बारिश की तीव्रता और स्थानीय मौसम परिस्थितियों के आधार पर सड़क, बिजली और जलापूर्ति जैसी सेवाओं पर असर पड़ सकता है।
पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए इस समय सबसे जरूरी सावधानी यह है कि वे नदी, नालों और भूस्खलन संभावित स्थानों के नजदीक जाने से बचें। पर्यटकों को भी खराब मौसम के दौरान जोखिम वाले ट्रैक, नदी किनारे और ऐसे रास्तों पर जाने से बचना चाहिए जहां पहले भूस्खलन की घटनाएं हो चुकी हैं। प्रशासन की ओर से जारी चेतावनियों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
नाहन-श्रीरेणुकाजी मार्ग पर पहाड़ दरकने की घटना के बाद सड़क बहाली का काम संबंधित विभागों के लिए प्राथमिकता रहेगा। मलबा हटाने के बाद भी यदि बारिश जारी रहती है तो दोबारा पत्थर गिरने या पहाड़ खिसकने का खतरा बना रह सकता है। इसलिए सड़क को पूरी तरह सुरक्षित घोषित करने से पहले मौके का निरीक्षण करना जरूरी होगा।
हिमाचल के लिए सितंबर की शुरुआत बारिश और भूस्खलन की चुनौती के साथ हुई है। एक तरफ मौसम विभाग लगातार बारिश को लेकर चेतावनी दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ पहले से बारिश से प्रभावित सड़क नेटवर्क को बहाल करने का काम चल रहा है। ऐसे में प्रशासन के सामने एक साथ राहत, सड़क बहाली और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी की जिम्मेदारी है।
फिलहाल राज्य में मौसम पूरी तरह सामान्य नहीं हुआ है। अगले कुछ दिनों तक बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा बना रह सकता है। नाहन-श्रीरेणुकाजी मार्ग पर पहाड़ दरकने की घटना इसी खतरे की एक ताजा मिसाल है। प्रशासन और विभागों की ओर से सड़क संपर्क बहाल करने के साथ लोगों से सतर्क रहने की अपील की जा रही है। यात्रियों के लिए बेहतर यही है कि मौसम खराब होने पर गैरजरूरी यात्रा टालें और पहाड़ी मार्गों पर स्थानीय परिस्थितियों की जानकारी लेकर ही सफर करें।










