भारत अगले पांच वर्षों में कार, टीवी, फ्रिज और बिजली क्षेत्र के लिए चिप डिजाइन और निर्माण क्षमता बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, सरकार घरेलू सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को वैश्विक स्तर तक विस्तार देना चाहती है।
नई दिल्ली: भारत अपनी सेमीकंडक्टर निर्माण क्षमता को केवल चिप असेंबली और टेस्टिंग तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि आने वाले वर्षों में कार, टीवी, फ्रिज, बिजली के बुनियादी ढांचे और दूसरे रोजमर्रा के उत्पादों में इस्तेमाल होने वाली चिप के डिजाइन और निर्माण की क्षमता विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि अगले पांच वर्षों में भारत में कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए चिप डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग की क्षमता विकसित होनी चाहिए। सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में मजबूत स्थान दिलाना है। इसके लिए देश में चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन, सेमीकंडक्टर उपकरण और जरूरी सामग्री से जुड़ा पूरा इकोसिस्टम तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।
सेमीकंडक्टर मिशन के दूसरे चरण में ₹1.27 लाख करोड़
सरकार ने सेमीकंडक्टर कार्यक्रम के दूसरे चरण के तहत घरेलू इकोसिस्टम को विस्तार देने और वैश्विक निवेश आकर्षित करने के लिए ₹1.27 लाख करोड़ की प्रतिबद्धता जताई है। सरकार के अनुसार, दूसरे चरण के तहत निवेशकों की ओर से करीब ₹1 लाख करोड़ की रुचि सामने आ चुकी है। हाल के दिनों में भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र को लेकर कई बड़ी घोषणाएं भी हुई हैं।
इनमें Applied Materials की 2035 तक भारत में 5 अरब डॉलर की योजना, Lam Research का प्रस्तावित ₹10,000 करोड़ का निवेश, Tata Electronics का धोलेरा में 363 एकड़ का वेंडर पार्क और Fujifilm का ₹800 करोड़ का सेमीकंडक्टर मैटेरियल्स प्लांट शामिल हैं। इन परियोजनाओं को भारत में सेमीकंडक्टर से जुड़े व्यापक औद्योगिक इकोसिस्टम के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कार और दोपहिया वाहनों के लिए भारत में बनेंगी चिप
PTI को दिए एक इंटरव्यू में अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत को अगले पांच वर्षों में ऑटोमोबाइल क्षेत्र के लिए इस्तेमाल होने वाली कई चिप को देश में डिजाइन और मैन्युफैक्चर करने में सक्षम होना चाहिए।
उन्होंने बताया कि कार, स्कूटर और मोटरसाइकिल में बड़ी संख्या में चिप का इस्तेमाल होता है। इनमें से कई चिप भारत में पहले से निर्मित हो रही हैं। सरकार का लक्ष्य इस क्षमता को और व्यापक बनाना है।
वैष्णव के मुताबिक, आने वाले वर्षों में भारत में डिजाइन की गई और भारत में निर्मित चिप का इस्तेमाल ऑटोमोबाइल क्षेत्र में बढ़ाया जाना चाहिए। इससे देश के सेमीकंडक्टर उद्योग को घरेलू मांग से जोड़ने में मदद मिल सकती है।
ऑटोमोबाइल उद्योग में इलेक्ट्रॉनिक्स की भूमिका लगातार बढ़ रही है। वाहन में अलग-अलग सिस्टम को नियंत्रित करने के लिए चिप का इस्तेमाल होता है। ऐसे में घरेलू चिप निर्माण क्षमता को वाहन उद्योग से जोड़ना सरकार की सेमीकंडक्टर रणनीति का एक प्रमुख हिस्सा है।
पावर सेक्टर के लिए भी चिप निर्माण पर जोर
सरकार की योजना केवल उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स या ऑटोमोबाइल तक सीमित नहीं है। वैष्णव ने बिजली क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली चिप का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि ट्रांसमिशन लाइनों, ट्रांसफॉर्मर और कन्वर्टर जैसे पावर सिस्टम में भी कई तरह की चिप का इस्तेमाल होता है। भारत को ऐसी कई चिप को देश में डिजाइन और निर्मित करने की क्षमता विकसित करनी चाहिए।
पावर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए चिप निर्माण की घरेलू क्षमता विकसित होने से महत्वपूर्ण बिजली प्रणालियों में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट की आपूर्ति के लिए बाहरी स्रोतों पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम किया जा सकता है।
सरकार का व्यापक उद्देश्य सेमीकंडक्टर डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग को देश के अलग-अलग औद्योगिक क्षेत्रों से जोड़ना है।
टीवी और फ्रिज में इस्तेमाल होने वाली चिप भी भारत में बनाने का लक्ष्य
वैष्णव ने उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स को भी भारत के सेमीकंडक्टर विस्तार का महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया। उन्होंने कहा कि टीवी, फ्रिज और अन्य घरेलू उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली कई चिप को भारत में डिजाइन और निर्मित किया जाना चाहिए।
उन्होंने समझाया कि आम उपभोक्ता जब टीवी खरीदता है तो उसे उसके अंदर मौजूद चिप दिखाई नहीं देती। उपभोक्ता को अंतिम उत्पाद दिखाई देता है, लेकिन उस उत्पाद को संचालित करने में चिप की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
मंत्री ने सेमीकंडक्टर को टीवी का ‘ब्रेन’ और ‘हार्ट’ बताते हुए कहा कि भारत को इस दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत है।
उत्तर प्रदेश में बन रहा डिस्प्ले कंट्रोल मॉड्यूल
वैष्णव ने उत्तर प्रदेश में स्थापित होने वाले एक डिस्प्ले-कंट्रोल मॉड्यूल प्लांट का उदाहरण देते हुए बताया कि भारत किस तरह की क्षमताएं विकसित करना चाहता है।
उनके अनुसार, डिस्प्ले कंट्रोल मॉड्यूल यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है कि टीवी पर अंतिम तस्वीर किस तरह दिखाई देगी। इस मॉड्यूल का निर्माण भारत में किया जाएगा।
मंत्री ने इसे टीवी के महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक बताते हुए कहा कि ऐसे कई उत्पाद हैं, जिन्हें भविष्य में भारत में डिजाइन और मैन्युफैक्चर किया जा सकता है।
यह पहल सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट निर्माण को अंतिम उपभोक्ता उत्पादों के साथ जोड़ने की दिशा में एक उदाहरण है।
LED डिस्प्ले निर्माण में भी बढ़ रही क्षमता
वैष्णव ने Crystal Matrix की प्रस्तावित LED डिस्प्ले फैब्रिकेशन सुविधा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कंपनी ने अपनी तकनीकी क्षमता को 90 माइक्रोन से घटाकर 40 माइक्रोन के स्तर तक पहुंचाया है।
कंपनी भारत में एक रिसर्च एंड डेवलपमेंट सुविधा भी स्थापित कर रही है। मंत्री के अनुसार, इसका उद्देश्य बड़े LED स्क्रीन और डिस्प्ले से जुड़े उत्पादों के डिजाइन तथा निर्माण की क्षमता को देश में विकसित करना है।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बड़े स्क्रीन और LED डिस्प्ले जैसे कई उत्पादों का डिजाइन और निर्माण भारत में किया जा सकेगा।
असेंबली से आगे बढ़ने की कोशिश
भारत लंबे समय से इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और असेंबली क्षमता बढ़ाने पर काम कर रहा है। अब सरकार सेमीकंडक्टर क्षेत्र में इससे आगे जाकर डिजाइन, फैब्रिकेशन, उपकरण और सामग्री जैसे क्षेत्रों में क्षमता विकसित करने पर जोर दे रही है।
इस रणनीति का एक प्रमुख उद्देश्य वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में भारत की भागीदारी बढ़ाना है। इसके लिए घरेलू कंपनियों के साथ-साथ वैश्विक कंपनियों को भी भारत में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
दूसरे चरण के सेमीकंडक्टर कार्यक्रम के तहत प्रस्तावित निवेश और परियोजनाएं इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है सेमीकंडक्टर निर्माण?
सेमीकंडक्टर आधुनिक अर्थव्यवस्था के लगभग हर प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल उत्पाद का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कारों से लेकर टीवी, फ्रिज, मोबाइल डिवाइस, बिजली प्रणालियों और औद्योगिक मशीनरी तक में अलग-अलग प्रकार की चिप का इस्तेमाल होता है।
इसी वजह से भारत घरेलू स्तर पर सेमीकंडक्टर डिजाइन और निर्माण की क्षमता को रणनीतिक महत्व दे रहा है। सरकार के अनुसार, आने वाले वर्षों में भारत को ऐसी चिप का डिजाइन और निर्माण देश में करने की क्षमता विकसित करनी चाहिए, जिनकी मांग घरेलू उद्योग में पहले से मौजूद है।
वैष्णव का लक्ष्य रोजमर्रा के उत्पादों से लेकर महत्वपूर्ण पावर इंफ्रास्ट्रक्चर तक चिप निर्माण का दायरा बढ़ाना है। इससे भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को केवल एक क्षेत्र तक सीमित रखने के बजाय व्यापक औद्योगिक आधार देने की कोशिश की जा रही है।
हालिया निवेश घोषणाओं, प्रस्तावित फैब्रिकेशन और मटेरियल प्लांट तथा डिस्प्ले से जुड़ी परियोजनाओं के बीच सरकार का जोर भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में अधिक व्यापक भूमिका दिलाने पर है। अगले पांच वर्षों में कार, पावर सिस्टम, टीवी और घरेलू उपकरणों के लिए डिजाइन एवं निर्माण क्षमता विकसित करना इस रणनीति का एक प्रमुख लक्ष्य है।











