India Tightens FCRA Rules: विदेशी फंडिंग नियमों के उल्लंघन पर बढ़ी सख्ती, NGOs के लिए नए अनुपालन मानदंड लागू

India Tightens FCRA Rules: केंद्र सरकार ने विदेशी फंडिंग नियमों के उल्लंघन पर सख्ती बढ़ाते हुए NGOs के लिए नए अनुपालन मानदंड लागू किए हैं। जानें FCRA नियमों में

केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने विदेशी चंदा (Foreign Contribution) के प्राप्ति और उपयोग को नियंत्रित करने वाले विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 (FCRA) के विभिन्न उल्लंघनों पर लगाए जाने वाले जुर्माने में संशोधन किया है। 

नई दिल्ली: भारत सरकार ने गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) द्वारा विदेशी धनराशि प्राप्त करने और उसके उपयोग से जुड़े नियमों को और सख्त कर दिया है। गृह मंत्रालय (MHA) ने विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 (FCRA) के तहत विभिन्न उल्लंघनों पर लगाए जाने वाले जुर्मानों में संशोधन करते हुए जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

नए प्रावधानों के तहत विदेशी फंडिंग के दुरुपयोग, निर्धारित सीमा से अधिक प्रशासनिक खर्च और अनधिकृत गतिविधियों में धन लगाने पर अधिक आर्थिक दंड लगाया जाएगा। इसके साथ ही विदेशी फंड प्राप्त करने के लिए आवेदन प्रक्रिया और पात्रता मानदंडों में भी बदलाव किए गए हैं।

प्रशासनिक खर्च की सीमा पार करने पर बढ़ा जुर्माना

संशोधित नियमों के अनुसार, यदि कोई संगठन विदेशी अंशदान का 20 प्रतिशत से अधिक हिस्सा प्रशासनिक खर्चों पर खर्च करता है, तो उसे दंड का सामना करना पड़ेगा। ऐसे मामलों में एक लाख रुपये या निर्धारित सीमा से अधिक खर्च की गई राशि का 5 प्रतिशत, जो भी अधिक होगा, जुर्माने के रूप में देना होगा।सरकार का मानना है कि विदेशी फंड का उपयोग मुख्य रूप से सामाजिक, शैक्षिक, स्वास्थ्य या विकासात्मक उद्देश्यों के लिए होना चाहिए, न कि अत्यधिक प्रशासनिक खर्चों के लिए।

जोखिमपूर्ण निवेश और सट्टेबाजी पर कड़ी कार्रवाई

विदेशी फंड को सट्टेबाजी, अटकलों या उच्च जोखिम वाली वित्तीय गतिविधियों में लगाने पर अब कहीं अधिक कठोर कार्रवाई की जाएगी। नए नियमों के तहत ऐसे मामलों में एक लाख रुपये या संबंधित राशि का 30 प्रतिशत, जो भी अधिक हो, जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा, ऐसी गतिविधियों से अर्जित पूरी आय या लाभ भी सरकार द्वारा जब्त किया जा सकता है। यह प्रावधान विदेशी धन के वित्तीय दुरुपयोग को रोकने के उद्देश्य से लागू किया गया है।

यदि किसी संगठन को किसी विशेष परियोजना या उद्देश्य के लिए विदेशी धन प्राप्त हुआ है और वह उसे किसी अन्य कार्य में उपयोग करता है, तो उस पर भी कठोर दंड लगाया जाएगा। ऐसे मामलों में एक लाख रुपये या संबंधित राशि का 30 प्रतिशत, जो भी अधिक हो, जुर्माना देना होगा। इसी प्रकार, बिना वैध पंजीकरण के विदेशी धन स्वीकार करना, अनुमोदित क्षेत्र के बाहर उसका उपयोग करना या पंजीकरण में घोषित उद्देश्य से अलग गतिविधियों में धन खर्च करना भी दंडनीय होगा।

India Tightens FCRA Rules: विदेशी फंडिंग नियमों के उल्लंघन पर बढ़ी सख्ती, NGOs के लिए नए अनुपालन मानदंड लागू

विदेशी फंड प्राप्त करने के नियमों में बदलाव

गृह मंत्रालय ने विदेशी फंडिंग के लिए आवेदन प्रक्रिया को अधिक संरचित और पारदर्शी बनाने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब FCRA के तहत पंजीकरण या पूर्व अनुमति के लिए आवेदन करने वाले संगठनों को सरकार द्वारा निर्धारित सूची में से अपने कार्यक्षेत्र और उद्देश्यों का स्पष्ट चयन करना होगा।
इन उद्देश्यों में धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक गतिविधियां शामिल हैं। 

हालांकि, धर्मांतरण (Religious Conversion) से संबंधित गतिविधियों को पात्र श्रेणियों से बाहर रखा गया है। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य विदेशी फंडिंग के उपयोग को अधिक स्पष्ट और निगरानी योग्य बनाना है।

विदेशी नागरिकों की भूमिका पर नई शर्तें

संशोधित नियमों में संगठनों के प्रमुख पदाधिकारियों को लेकर भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। यदि किसी संस्था के शीर्ष प्रबंधन में विदेशी नागरिक शामिल हैं, तो ऐसे संगठनों को FCRA पंजीकरण या पूर्व स्वीकृति देने पर सामान्य परिस्थितियों में विचार नहीं किया जाएगा। हालांकि, केंद्र सरकार को विशेष परिस्थितियों में अपवाद प्रदान करने का अधिकार होगा। सरकार किसी विशिष्ट मामले में आदेश जारी कर विदेशी नागरिकों को संगठन के प्रमुख पदाधिकारी के रूप में कार्य करने की अनुमति दे सकती है।

नए नियमों के तहत “मुख्य पदाधिकारी” (Key Functionary) की परिभाषा को व्यापक बनाया गया है। अब इसमें कंपनी के निदेशक, साझेदारी फर्म के भागीदार, ट्रस्टी, हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) के कर्ता और संगठन के प्रबंधन या नीतिगत निर्णयों पर नियंत्रण रखने वाले अन्य व्यक्तियों को भी शामिल किया गया है।

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