जमशेदपुर के होटल कारोबारी निखार सबलोक की 24 अगस्त को हुई हत्या का पुलिस ने खुलासा किया है। जांच के मुताबिक जमीन विवाद और पुरानी दुश्मनी के चलते 15 लाख रुपये में हत्या की साजिश रची गई। पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
जमशेदपुर: झारखंड के जमशेदपुर में होटल कारोबारी और कदमा के विजया हेरिटेज निवासी 33 वर्षीय निखार सबलोक की हत्या के मामले में पुलिस ने कथित साजिश का खुलासा किया है। पुलिस जांच के मुताबिक, हत्या के पीछे जमीन कारोबार से जुड़ा विवाद, पुरानी दुश्मनी और बदले की भावना प्रमुख वजहों में शामिल थीं। पुलिस ने इस मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें उत्तर प्रदेश से बुलाए गए दो कथित शूटर भी शामिल हैं।
जमीन कारोबार और पुरानी दुश्मनी से जुड़ी हत्या
पुलिस के अनुसार, चांडिल के कांदरबेड़ा स्थित टेंथ माइल स्टोन के पीछे पिंडरापहाड़िया की करीब तीन एकड़ जमीन की खरीद-बिक्री को लेकर विवाद था। इसके अलावा सिदगोड़ा और सोनारी इलाके में जमीन के कारोबार में गणेश सिंह के करीबियों की बढ़ती गतिविधियों को लेकर भी तनाव था।
जांच में देहरादून में विक्रम शर्मा की हत्या से जुड़ी पुरानी दुश्मनी का एंगल भी सामने आया है। पुलिस का दावा है कि इसी पुराने विवाद और बदले की भावना ने निखार सबलोक की हत्या की साजिश को जन्म दिया।
पुलिस के मुताबिक, विक्रम शर्मा के करीबी बताए जा रहे अशोक सिंह उर्फ राघव ने कथित तौर पर निखार की हत्या की साजिश रची। इसके लिए करीब 15 लाख रुपये में हत्या का सौदा तय किया गया था। योजना के तहत स्थानीय अपराधियों की मदद से उत्तर प्रदेश से कथित शूटर बुलाए गए।
हत्या के लिए बनाई गई थी अलग-अलग लोगों की भूमिका
जांच एजेंसियों के अनुसार, हत्या की साजिश को अंजाम देने के लिए अलग-अलग लोगों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं। सोनारी की सिद्ध कान्हू बस्ती के रहने वाले सुशील केराई पर हथियार उपलब्ध कराने का आरोप है।
वहीं रितेश सिंह ने कथित तौर पर होटल जाकर निखार की रेकी की। पुलिस के मुताबिक, उसने निखार की गतिविधियों और पहचान से जुड़ी जानकारी शूटरों तक पहुंचाई, ताकि वारदात के दौरान उनकी पहचान में कोई गलती न हो।
उलीडीह के संजय पथ निवासी सुनील रजक पर भी साजिश में शामिल होने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, रितेश और सुनील, अभिमन्यु सिंह उर्फ सिंटू सिंह के माध्यम से राघव के संपर्क में आए थे।
इस तरह कथित तौर पर पहले स्थानीय स्तर पर हत्या की योजना तैयार की गई, फिर हथियार और रेकी की व्यवस्था की गई और आखिर में उत्तर प्रदेश से शूटर बुलाकर वारदात को अंजाम देने की तैयारी पूरी की गई।
सुल्तानपुर से बुलाए गए थे दो कथित शूटर
पुलिस के मुताबिक, निखार की हत्या को अंजाम देने के लिए उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर से अंकित सिंह और राजकुमार सिंह उर्फ प्रिंस को बुलाया गया था। पुलिस का दावा है कि दोनों ने 24 अगस्त को निखार पर गोली चलाई, जिससे उनकी मौत हो गई।
जांच में पुलिस ने स्थानीय आरोपियों और कथित शूटरों के बीच संपर्क की कड़ियों को खंगाला। पुलिस के अनुसार, वारदात से पहले निखार की गतिविधियों पर नजर रखी गई और उसके बाद आरोपियों को सुरक्षित तरीके से इलाके से बाहर निकालने की योजना भी बनाई गई थी।
हालांकि, मामले में हत्या की साजिश, भुगतान और प्रत्येक आरोपी की भूमिका को लेकर पुलिस की जांच अभी जारी है। अदालत में आरोपों की पुष्टि साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगी।
हत्या के बाद शूटरों को रांची पहुंचाया गया
पुलिस के अनुसार, हत्या के बाद कथित शूटरों को जमशेदपुर से बाहर निकालने के लिए लाल रंग की Hyundai i10 कार का इस्तेमाल किया गया। पुलिस का दावा है कि सुनील रजक दोनों शूटरों को कार से रांची के मेसरा इलाके तक लेकर गया।
मेसरा पहुंचने के बाद दोनों कथित शूटरों ने ट्रेन पकड़ी और उत्तर प्रदेश चले गए। पुलिस ने जांच के दौरान हत्या में इस्तेमाल बताई जा रही लाल रंग की i10 कार बरामद कर ली है। वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर जेएच05एएन-5503 बताया गया है।
जांच एजेंसियों ने हथियार और अन्य सामान भी बरामद करने का दावा किया है। इनमें दो देशी पिस्तौल, दो मैगजीन, सात जिंदा कारतूस और छह खोखे शामिल हैं। बरामदगी को पुलिस ने मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य बताया है।
मोबाइल फोन से मिले अहम सुराग
हत्या की जांच में आरोपियों के मोबाइल फोन से मिले डिजिटल साक्ष्यों ने भी पुलिस को आगे बढ़ने में मदद की। पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी बताए जा रहे राघव के मोबाइल फोन से पैसों के लेन-देन और कथित धमकी भरे पोस्ट से संबंधित जानकारी मिली।
इन डिजिटल सुरागों के आधार पर पुलिस ने राघव की गतिविधियों पर नजर रखी और उसकी तलाश तेज कर दी। जांचकर्ताओं ने वारदात से पहले और बाद में आरोपियों की गतिविधियों को जोड़कर कथित साजिश की कड़ियों को समझने की कोशिश की।
पुलिस के अनुसार, राघव कोलकाता से लौट रहा था और इसी दौरान उसे बहरागोड़ा में पकड़ा गया। गिरफ्तारी के बाद तबीयत खराब होने पर उसे पुलिस अभिरक्षा में टाटा मेन हॉस्पिटल यानी TMH में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है।
संयुक्त पुलिस टीम ने छह आरोपियों को पकड़ा
मामले की जांच सरायकेला और जमशेदपुर जिला पुलिस की संयुक्त टीम ने की। पुलिस ने मुख्य साजिशकर्ता बताए जा रहे अशोक कुमार सिंह उर्फ राघव के अलावा सुनील रजक, रितेश सिंह और सुशील केराई को गिरफ्तार किया है।
इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर से बुलाए गए कथित शूटर अंकित सिंह और राजकुमार सिंह उर्फ प्रिंस को भी पुलिस ने गिरफ्तार करने की जानकारी दी है।
पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ के आधार पर हत्या की पूरी योजना और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने में जुटी है। जांचकर्ताओं का फोकस कथित आर्थिक लेन-देन, हथियारों की व्यवस्था, शूटरों के संपर्क और वारदात के बाद उन्हें बाहर निकालने की योजना पर है।
गैंगवार की आशंका को लेकर भी पुलिस सतर्क
निखार सबलोक हत्याकांड के बाद पुलिस को इलाके में संभावित गैंगवार की आशंका भी है। पुलिस की नजर दुमका जेल में बंद अखिलेश सिंह और गणेश सिंह गिरोह से जुड़े लोगों की गतिविधियों पर है।
अधिकारियों को आशंका है कि पुरानी आपराधिक प्रतिद्वंद्विता और जमीन कारोबार से जुड़े विवाद के कारण घटना के बाद किसी तरह की प्रतिक्रिया हो सकती है। इसी वजह से पुलिस दोनों गुटों से जुड़े लोगों की गतिविधियों पर निगरानी रख रही है।
पुलिस का कहना है कि फिलहाल प्राथमिकता हत्याकांड से जुड़ी सभी कड़ियों को जोड़ना और यह पता लगाना है कि साजिश में गिरफ्तार आरोपियों के अलावा कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या नहीं।
जमीन कारोबार बना विवाद का अहम केंद्र
जांच से सामने आई जानकारी के मुताबिक, इस पूरे मामले में जमीन कारोबार एक महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर सामने आया है। पिंडरापहाड़िया की तीन एकड़ जमीन के अलावा सिदगोड़ा और सोनारी क्षेत्र में जमीन से जुड़ी गतिविधियों को लेकर भी विवाद की बात सामने आई है।
जमीन के कारोबार में अलग-अलग आपराधिक समूहों से जुड़े लोगों की कथित बढ़ती सक्रियता ने तनाव को और बढ़ाया। पुलिस अब इन जमीन सौदों और उनसे जुड़े लोगों के बीच संबंधों की भी जांच कर रही है, ताकि हत्या की वास्तविक पृष्ठभूमि स्पष्ट हो सके।
पुलिस जांच से सामने आएगी पूरी साजिश की तस्वीर
निखार सबलोक की हत्या के मामले में पुलिस ने कथित साजिश, रेकी, हथियारों की व्यवस्था, शूटरों की भूमिका और वारदात के बाद उनके भागने की योजना से जुड़ी कई कड़ियां जोड़ने का दावा किया है। हालांकि, हत्या के पीछे की पूरी वजह और सभी आरोपियों की भूमिका को अंतिम रूप से अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही तय किया जाएगा।
फिलहाल छह आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस उन संपर्कों और आर्थिक लेन-देन की जांच कर रही है, जिनके जरिए कथित तौर पर हत्या की योजना तैयार हुई। मामले की आगे की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि 24 अगस्त की इस हत्या में और कौन-कौन लोग शामिल थे और 15 लाख रुपये के कथित सौदे के पीछे वास्तविक मास्टरमाइंड कौन था।











