कोलंबिया में सत्ता परिवर्तन की आहट: ट्रम्प बोले- नए नेतृत्व में अमेरिका-कोलंबिया संबंध होंगे और मजबूत

कोलंबिया के राष्ट्रपति चुनाव में एबेलार्डो डे ला एस्प्रिएला को बढ़त मिलने के बाद डोनाल्ड ट्रम्प ने दोनों देशों के बीच बेहतर संबंधों की उम्मीद जताई है।

कोलंबिया के राष्ट्रपति चुनाव में दक्षिणपंथी उम्मीदवार एबेलार्डो डे ला एस्प्रिएला को शुरुआती बढ़त मिलने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की उम्मीद जताई। हालांकि, विपक्षी उम्मीदवार इवान सेपेदा ने अभी हार स्वीकार नहीं की है।

बोगोटा: दक्षिण अमेरिका के महत्वपूर्ण देश कोलंबिया में हुए राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे चरण के बाद राजनीतिक तस्वीर तेजी से बदलती नजर आ रही है। शुरुआती मतगणना के अनुसार दक्षिणपंथी उम्मीदवार एबेलार्डो डी ला एस्प्रिएला बेहद मामूली अंतर से बढ़त बनाए हुए हैं। हालांकि अंतिम आधिकारिक परिणाम अभी घोषित नहीं हुए हैं, लेकिन इस संभावित जीत ने न केवल कोलंबिया बल्कि अमेरिका और पूरे लैटिन अमेरिकी क्षेत्र में नई राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चुनावी रुझानों के सामने आने के बाद कहा कि यदि डी ला एस्प्रिएला राष्ट्रपति बनते हैं तो अमेरिका और कोलंबिया के बीच संबंध पहले की तुलना में कहीं बेहतर होंगे। ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के संबंध हाल के वर्षों में कई बार तनावपूर्ण रहे हैं।

बेहद करीबी मुकाबले में आगे हैं डी ला एस्प्रिएला

रविवार को हुए राष्ट्रपति चुनाव के रन-ऑफ मतदान में दक्षिणपंथी नेता एबेलार्डो डी ला एस्प्रिएला और वामपंथी उम्मीदवार इवान सेपेदा आमने-सामने थे। प्रारंभिक मतगणना के अनुसार डी ला एस्प्रिएला को बहुत मामूली बढ़त मिली है।

दोनों उम्मीदवारों के बीच अंतर एक प्रतिशत से भी कम बताया जा रहा है, जो हाल के कोलंबियाई चुनावी इतिहास के सबसे करीबी मुकाबलों में से एक माना जा रहा है।

हालांकि इवान सेपेदा ने अभी हार स्वीकार नहीं की है। उनका कहना है कि अंतिम और सत्यापित परिणाम आने तक वे किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचेंगे। कोलंबिया में मतों की दोबारा जांच और सत्यापन की प्रक्रिया सामान्यतः कई दिनों तक चलती है।

ट्रम्प का खुला समर्थन बना चर्चा का विषय

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चुनाव प्रचार के दौरान खुलकर डी ला एस्प्रिएला का समर्थन किया था। उन्होंने वामपंथी उम्मीदवार इवान सेपेदा की आलोचना करते हुए उन्हें "कट्टर वामपंथी मार्क्सवादी" तक बताया था।

चुनाव परिणामों के शुरुआती संकेत मिलने के बाद ट्रम्प ने कहा कि डी ला एस्प्रिएला की जीत अमेरिका और कोलंबिया के संबंधों में नया अध्याय शुरू करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश मिलकर एक मजबूत रणनीतिक साझेदारी विकसित कर सकते हैं।

हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रम्प द्वारा जीत को "आसान जीत" बताना वास्तविक आंकड़ों से मेल नहीं खाता, क्योंकि दोनों उम्मीदवारों के बीच अंतर बेहद कम है।

पेट्रो सरकार के दौरान तनावपूर्ण रहे संबंध

पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका और कोलंबिया के रिश्तों में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले। वर्तमान राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो और डोनाल्ड ट्रम्प के बीच कई मुद्दों पर सार्वजनिक मतभेद सामने आए।

ट्रम्प ने कई मौकों पर पेट्रो की नीतियों की आलोचना की थी, जबकि पेट्रो ने अमेरिकी आव्रजन नीतियों और क्षेत्रीय रणनीतियों पर सवाल उठाए थे। दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी ने द्विपक्षीय संबंधों में तनाव पैदा किया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डी ला एस्प्रिएला सत्ता संभालते हैं तो विदेश नीति में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं और अमेरिका के साथ सहयोग बढ़ सकता है।

ड्रग तस्करी के खिलाफ सख्त कार्रवाई का वादा

चुनावी अभियान के दौरान डी ला एस्प्रिएला ने कानून-व्यवस्था और सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता बताया। उन्होंने देश में सक्रिय ड्रग कार्टेल, संगठित अपराध गिरोहों और अवैध सशस्त्र समूहों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का वादा किया।

कोलंबिया दुनिया में कोका उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। कोका पौधे से ही कोकीन तैयार की जाती है, जिसके कारण दशकों से देश ड्रग तस्करी और हिंसा की चुनौती का सामना कर रहा है।

डी ला एस्प्रिएला का कहना है कि उनकी सरकार ड्रग नेटवर्क को खत्म करने के लिए आधुनिक तकनीक, सैन्य सहयोग और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी का उपयोग करेगी।

"शील्ड ऑफ द अमेरिकाज" गठबंधन में शामिल होने की योजना

चुनाव अभियान के दौरान डी ला एस्प्रिएला ने घोषणा की थी कि उनकी सरकार "शील्ड ऑफ द अमेरिकाज" नामक क्षेत्रीय सुरक्षा गठबंधन में सक्रिय भूमिका निभाएगी।

यह पहल अमेरिका और कई लैटिन अमेरिकी देशों के सहयोग से बनाई गई है, जिसका उद्देश्य ड्रग कार्टेल, अंतरराष्ट्रीय अपराध और सीमा पार तस्करी से निपटना है।

पूर्व राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने इस गठबंधन की आलोचना की थी और कहा था कि इसमें शामिल कई देशों का ड्रग विरोधी अभियानों में सीमित अनुभव है। इसके विपरीत डी ला एस्प्रिएला इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मंच मानते हैं।

अमेरिकी सैन्य सहयोग बढ़ाने का प्रस्ताव

डी ला एस्प्रिएला की सबसे चर्चित नीतियों में अमेरिका के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने की योजना शामिल है। उन्होंने संकेत दिया है कि उनकी सरकार अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर ड्रग तस्करी के खिलाफ अभियान तेज करेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि कोलंबिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की अनुमति देने के विकल्प पर विचार किया जा सकता है। यह प्रस्ताव चुनाव के दौरान काफी विवादास्पद रहा और विपक्षी दलों ने इसे राष्ट्रीय संप्रभुता से जुड़ा मुद्दा बताया। हालांकि समर्थकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय अपराध से लड़ने के लिए वैश्विक सहयोग आवश्यक है।

मानवाधिकार संगठनों की बढ़ी चिंता

डी ला एस्प्रिएला की संभावित जीत ने मानवाधिकार समूहों के बीच भी चिंता बढ़ा दी है। कुछ संगठनों और विपक्षी समर्थकों का मानना है कि अत्यधिक सख्त सुरक्षा नीतियां अतीत की विवादास्पद घटनाओं को दोहरा सकती हैं।

विशेष रूप से "फॉल्स पॉजिटिव्स" कांड का जिक्र किया जा रहा है, जिसमें हजारों निर्दोष नागरिकों की हत्या कर उन्हें विद्रोही लड़ाकों के रूप में पेश किए जाने के आरोप लगे थे।

हालांकि डी ला एस्प्रिएला ने अपनी विजय सभा में स्पष्ट कहा कि उनकी सरकार कानून और संविधान के दायरे में रहकर ही अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि सुरक्षा और मानवाधिकार दोनों को समान महत्व दिया जाएगा।

आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डी ला एस्प्रिएला राष्ट्रपति बनते हैं तो कोलंबिया की आर्थिक नीति अधिक निवेश-उन्मुख और निजी क्षेत्र समर्थक हो सकती है।

अमेरिका के साथ बेहतर संबंध विदेशी निवेश, व्यापार और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा दे सकते हैं। दूसरी ओर, वामपंथी समूहों को आशंका है कि इससे सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों और प्रगतिशील नीतियों पर असर पड़ सकता है। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि नई सरकार आर्थिक विकास, सुरक्षा और सामाजिक संतुलन के बीच किस प्रकार संतुलन स्थापित करती है।

7 अगस्त को हो सकता है सत्ता हस्तांतरण

यदि अंतिम परिणाम शुरुआती रुझानों के अनुरूप रहते हैं, तो एबेलार्डो डी ला एस्प्रिएला 7 अगस्त को कोलंबिया के नए राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगे।

उनके सामने देश की सुरक्षा चुनौतियों, ड्रग तस्करी, आर्थिक विकास और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करने जैसी बड़ी जिम्मेदारियां होंगी। साथ ही उन्हें राजनीतिक ध्रुवीकरण को कम कर राष्ट्रीय एकता को भी बढ़ावा देना होगा।

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