लद्दाख में हाल ही में पाँच नए जिलों के गठन के फैसले के बाद राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। केंद्र शासित प्रदेश में प्रशासनिक विस्तार को सरकार जहां विकास और सुशासन की दिशा में कदम बता रही है, वहीं कुछ नेताओं ने इसे लेकर आपत्ति जताई है।
Asaduddin Owaisi: लद्दाख में 5 नए जिलों के गठन को लेकर जहां एक ओर लोगों में खुशी का माहौल है, वहीं दूसरी ओर इस फैसले पर राजनीतिक विवाद भी खड़ा हो गया है।असदुद्दीन ओवैसी ने इस निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इसे सांप्रदायिक दृष्टिकोण से देखा जा रहा है और यह क्षेत्र की एकता को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि नए जिले बनाने का उद्देश्य लद्दाख की सामाजिक एकता को कमजोर करना है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने दावा किया कि कम आबादी वाले बौद्ध समुदाय को अधिक जिले दिए जा रहे हैं, जबकि अधिक आबादी वाले मुस्लिम समुदाय को अपेक्षाकृत कम प्रतिनिधित्व मिल रहा है। ओवैसी ने इसे चुनावी अधिकारों और प्रतिनिधित्व से जुड़ा मुद्दा भी बताया है।
लद्दाख में बने 5 नए जिले, प्रशासनिक ढांचे का विस्तार
लद्दाख में प्रशासनिक पुनर्गठन के तहत पाँच नए जिले बनाए गए हैं—नुब्रा, शाम, चांगथांग, ज़ांस्कर और द्रास। इस फैसले के बाद अब केंद्र शासित प्रदेश में कुल जिलों की संख्या दो से बढ़कर सात हो गई है। यह निर्णय उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना द्वारा मंजूर किया गया, जिसे गृह मंत्रालय ने पहले ही अगस्त 2024 में स्वीकृति दी थी। सरकार का कहना है कि यह कदम स्थानीय लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग और बेहतर प्रशासनिक सुविधा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
ओवैसी का आरोप: “एकता को तोड़ने की कोशिश”
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एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि यह लद्दाख के बौद्ध और मुस्लिम समुदायों की एकजुटता को प्रभावित करने की कोशिश है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि नए जिलों का गठन क्षेत्र की जनसंख्या संतुलन को प्रभावित कर सकता है और इसे राजनीतिक दृष्टि से भी देखा जाना चाहिए।
ओवैसी के अनुसार, 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर 39.65% बौद्ध आबादी को अधिक जिले मिले हैं, जबकि 46.40% मुस्लिम आबादी को कम जिले दिए गए हैं। उन्होंने इसे “असंतुलित प्रशासनिक पुनर्गठन” करार दिया।
जनसांख्यिकीय आंकड़ों पर बहस
लद्दाख की जनसंख्या संरचना लंबे समय से संवेदनशील विषय रही है। 2011 की जनगणना के अनुसार, कारगिल में मुस्लिम आबादी बहुमत में थी, जबकि लेह क्षेत्र में बौद्ध समुदाय की बहुलता थी। नए जिलों के गठन के बाद अब प्रशासनिक इकाइयों का पुनर्विभाजन हुआ है, जिसमें लेह, चांगथांग, नुब्रा, शाम और ज़ांस्कर जैसे जिलों में बौद्ध बहुलता मानी जा रही है, जबकि कारगिल और द्रास में मुस्लिम बहुमत बना हुआ है।
लद्दाख के उपराज्यपाल कार्यालय का कहना है कि यह कदम क्षेत्रीय विकास, प्रशासनिक पहुंच और सेवा वितरण को बेहतर बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। सरकार का मानना है कि छोटे जिलों से स्थानीय प्रशासन अधिक प्रभावी होगा और दूरदराज के क्षेत्रों तक सरकारी योजनाएं आसानी से पहुंच सकेंगी। प्रशासन ने इसे “Developed and Prosperous Ladakh” विज़न का हिस्सा बताया है।










