मध्य प्रदेश सरकार ने विधानसभा के मानसून सत्र से पहले नौ महत्वपूर्ण विधेयकों को मंजूरी दी है। इनमें यूनिफॉर्म सिविल कोड, श्रम सुधार, निजी विश्वविद्यालयों के नए नियम, कोचिंग संस्थानों का नियमन और उद्योगों को बढ़ावा देने वाले कई बड़े सुधार शामिल हैं।
भोपाल: मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने विधानसभा के आगामी मानसून सत्र से पहले राज्य के प्रशासन, शिक्षा, उद्योग, श्रम और नागरिक कानूनों में व्यापक बदलाव लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। भोपाल के निकट आयोजित विशेष कैबिनेट बैठक में नौ महत्वपूर्ण विधेयकों को मंजूरी दी गई, जिनका उद्देश्य शासन व्यवस्था को आधुनिक बनाना, निवेश को बढ़ावा देना और नागरिकों के लिए अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी कानूनी ढांचा तैयार करना है। इन सभी विधेयकों को अब विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा, जहां इन पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।
यूनिफॉर्म सिविल कोड विधेयक सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव
कैबिनेट की बैठक में सबसे अधिक चर्चा मध्य प्रदेश यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) विधेयक 2026 को लेकर रही। इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य विवाह, तलाक, गोद लेने और उत्तराधिकार जैसे नागरिक मामलों में सभी समुदायों के लिए समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। विधेयक में लिव-इन रिलेशनशिप के अनिवार्य पंजीकरण और महिलाओं तथा पुरुषों को संपत्ति के समान अधिकार देने का प्रावधान किया गया है। हालांकि राज्य की अनुसूचित जनजातियों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है ताकि उनकी पारंपरिक सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था प्रभावित न हो।
निजी विश्वविद्यालयों के लिए नियमों में बड़ा बदलाव
कैबिनेट ने निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना और संचालन से जुड़े संशोधन विधेयक को भी मंजूरी दी है। नए नियमों के तहत विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए पहले से लागू 25 एकड़ भूमि की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। अब पर्याप्त भूमि उपलब्ध होने पर भी विश्वविद्यालय स्थापित किए जा सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे शहरों और उनके आसपास आधुनिक बहुमंजिला परिसरों का विकास होगा तथा नई शिक्षा नीति के अनुरूप उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा।
उद्योगों को मिलेगा आसान कारोबारी माहौल
राज्य सरकार ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम में भी महत्वपूर्ण बदलावों को मंजूरी दी है। इसके तहत मध्य प्रदेश इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के अंतर्गत एक समर्पित सचिवालय बनाया जाएगा, जो उद्योगों की स्थापना से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाएगा। निवेशकों को स्वयं-घोषणा के आधार पर स्थापना पत्र जारी किया जाएगा और प्रारंभिक चरण में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी जाएगी। सरकार का कहना है कि इससे निवेशकों का समय बचेगा और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।
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कोचिंग संस्थानों पर सख्त नियमन लागू होगा
कोचिंग संस्थानों के लिए प्रस्तावित नए कानून के तहत सभी निजी कोचिंग संस्थानों का पंजीकरण अनिवार्य किया जाएगा। इसके अलावा कक्षा 11 से नीचे के विद्यार्थियों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा और भ्रामक विज्ञापनों पर भी सख्ती से रोक लगाई जाएगी। यदि कोई छात्र पढ़ाई बीच में छोड़ता है तो संस्थान को निर्धारित समय सीमा के भीतर उसकी फीस वापस करनी होगी। सरकार का उद्देश्य शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और छात्रों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
श्रम कानूनों का होगा आधुनिकीकरण
कैबिनेट ने मध्य प्रदेश श्रम संहिता 2026 को भी मंजूरी दी है। इसके तहत राज्य के छह पुराने श्रम कानूनों को एकीकृत कर एक नया श्रम कानून बनाया जाएगा, जो केंद्र सरकार की श्रम संहिताओं के अनुरूप होगा। नए प्रावधानों के तहत थिएटर, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को तीन शिफ्टों में चौबीसों घंटे संचालन की अनुमति दी जाएगी। साथ ही नए प्रतिष्ठानों के लिए निरीक्षण संबंधी कई प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाएगा।
अन्य विधेयकों से भी होगा व्यापक बदलाव
कैबिनेट ने हाईवे संशोधन विधेयक, फायर एक्ट, धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय विधेयक, निरसन विधेयक तथा पंचायत राज एवं उपकर कानूनों में संशोधन को भी मंजूरी दी है। इन संशोधनों के तहत स्वामित्व योजना के अंतर्गत ग्रामीण संपत्तियों के पंजीकरण पर कुछ करों और शुल्कों से राहत देने का प्रस्ताव है। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति पंजीकरण आसान होगा और लोगों पर आर्थिक बोझ कम पड़ेगा।
मानसून सत्र पर रहेगी पूरे देश की नजर
20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में इन सभी विधेयकों को पेश किया जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड जैसे महत्वपूर्ण विधेयक पर व्यापक बहस देखने को मिल सकती है, जबकि शिक्षा, उद्योग और श्रम सुधारों से जुड़े प्रस्ताव राज्य के आर्थिक विकास की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। यदि ये सभी विधेयक पारित हो जाते हैं तो मध्य प्रदेश प्रशासनिक सुधारों और निवेश-अनुकूल नीतियों के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।









