🇮🇳 शहीद जितेंद्र शर्मा के गांव में गूंज रहे जयकारे, मां अब भी बेटे की मौत से बेखबर; असम विमान हादसे में गई जान

असम विमान हादसे में शहीद हुए जितेंद्र शर्मा के गांव में श्रद्धांजलि का माहौल है। मां को अब तक बेटे की मौत की जानकारी नहीं दी गई है।
🇮🇳 शहीद जितेंद्र शर्मा के गांव में गूंज रहे जयकारे, मां अब भी बेटे की मौत से बेखबर; असम विमान हादसे में गई जान
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LIVE | असम में हुए विमान हादसे में जान गंवाने वाले शहीद जितेंद्र शर्मा के पैतृक गांव में शोक और गर्व का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। गांव की गलियों में एक ओर लोगों की आंखें नम हैं, तो दूसरी ओर "भारत माता की जय" और "शहीद जितेंद्र शर्मा अमर रहें" के जयकारे लगातार गूंज रहे हैं। हर कोई अपने वीर सपूत को अंतिम श्रद्धांजलि देने की तैयारी में जुटा हुआ है।

गांव के लोग सुबह से ही शहीद के घर के बाहर जुटने लगे। आसपास के इलाकों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जितेंद्र बचपन से ही देशसेवा का सपना देखते थे और उन्होंने अपने परिवार के साथ-साथ पूरे गांव का नाम रोशन किया। उनके शहीद होने की खबर से पूरा इलाका गमगीन है, लेकिन लोगों को इस बात का भी गर्व है कि गांव का बेटा देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देकर अमर हो गया।

परिजनों के मुताबिक, शहीद की मां को अभी तक बेटे की मौत की जानकारी नहीं दी गई है। परिवार को आशंका है कि यह खबर सुनकर उनकी तबीयत बिगड़ सकती है। इसलिए परिजन और रिश्तेदार उन्हें संभालने की कोशिश कर रहे हैं। घर में मौजूद लोग सामान्य माहौल बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि बाहर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा हुआ है।

उधर, शहीद की बहनें भी चाचा के घर पहुंच गई हैं। भाई की शहादत की खबर सुनने के बाद उनका रो-रोकर बुरा हाल है। रिश्तेदार और गांव की महिलाएं उन्हें ढांढस बंधा रही हैं। परिवार के करीबी लोगों का कहना है कि जितेंद्र अपने माता-पिता और बहनों से बेहद जुड़े हुए थे और छुट्टी मिलने पर अक्सर गांव आया करते थे।

असम में हुए विमान हादसे की खबर सामने आने के बाद पूरे इलाके में बेचैनी फैल गई थी। जैसे ही यह पुष्टि हुई कि हादसे में जितेंद्र शर्मा की जान चली गई है, गांव में शोक की लहर दौड़ गई। लोग एक-दूसरे के घर जाकर परिवार को सांत्वना दे रहे हैं। कई ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने जितेंद्र को बचपन से बड़ा होते देखा था और आज उनके न रहने की खबर पर यकीन करना मुश्किल हो रहा है।

गांव में प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की आवाजाही भी बढ़ गई है। शहीद को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई देने की तैयारियां की जा रही हैं। सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ श्रद्धांजलि सभा की भी तैयारी चल रही है। लोग अपने घरों पर तिरंगा लगाकर शहीद को नमन कर रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि जितेंद्र शर्मा की शहादत को हमेशा याद रखा जाएगा। गांव के युवाओं में भी उनके जीवन से प्रेरणा लेने की बात कही जा रही है। कई लोगों ने मांग की है कि गांव में शहीद के नाम पर स्मारक या किसी सार्वजनिक स्थान का नामकरण किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके बलिदान को याद रख सकें।

फिलहाल पूरे गांव की निगाहें उस पल पर टिकी हैं, जब देश का यह वीर सपूत अंतिम बार अपने घर लौटेगा। आंखों में आंसू हैं, लेकिन दिल में गर्व भी है कि गांव का बेटा देश की सेवा करते हुए शहीद हुआ और हमेशा के लिए अमर हो गया।

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