नैनीताल के ज्योलीकोट में दूषित पानी से पीलिया का प्रकोप, अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की भीड़

नैनीताल के ज्योलीकोट में दूषित पेयजल से पीलिया और अन्य जलजनित रोग फैलने की शिकायत है। स्वास्थ्य विभाग ने जांच और निगरानी बढ़ा दी है।
नैनीताल के ज्योलीकोट में दूषित पानी से पीलिया का प्रकोप, अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की भीड़
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नैनीताल के ज्योलीकोट और आसपास के ग्रामीण इलाकों में दूषित पेयजल को लेकर स्थिति गंभीर होती जा रही है। क्षेत्र में पीलिया समेत डायरिया, उल्टी-दस्त, बुखार और पेट से जुड़ी बीमारियों के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। पिछले कुछ दिनों में बड़ी संख्या में लोग इलाज के लिए अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंच रहे हैं। 3 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार ज्योलीकोट क्षेत्र में पीलिया के 50 से अधिक मरीज सामने आ चुके हैं और अकेले ज्योलीकोट गांव में ही मरीजों की संख्या 30 से ज्यादा बताई गई है।

स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों की जांच कर रही हैं। ज्योलीकोट, छीड़ा, वीरभट्टी और आसपास के इलाकों में स्वास्थ्य शिविर लगाए गए हैं। हालिया शिविरों में 26 लोगों की जांच की गई, जबकि ज्योलीकोट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 43 लोग उपचार और स्वास्थ्य जांच के लिए पहुंचे। चिकित्सकों ने मरीजों को दवाएं देने के साथ बीमारी से बचाव के लिए जरूरी सलाह भी दी।

बताया जा रहा है कि ज्योलीकोट और आसपास के कई गांवों में लंबे समय से पेयजल की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आ रही थीं। ज्योलीकोट, बेलुवाखान, वीरभट्टी और छीड़ा समेत कई क्षेत्रों में लोगों ने दूषित पानी की आपूर्ति का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी पीने के बाद कई परिवारों में एक से अधिक लोग बीमार हुए हैं। इस वजह से लोगों में संक्रमण को लेकर डर और नाराजगी दोनों बढ़ी है।

बीमारी की शुरुआत के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने संभावित संक्रमण के स्रोत की जांच शुरू की। पानी के नमूने लिए गए हैं और पेयजल टैंकों की सफाई तथा क्लोरीनेशन का काम कराया जा रहा है। जल संस्थान ने ज्योलीकोट की पेयजल आपूर्ति को दूसरी लाइन से जोड़ने की कार्रवाई भी की है। विभाग की ओर से पानी की गुणवत्ता की जांच और आपूर्ति व्यवस्था में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में नियमित स्वास्थ्य शिविर लगाने के निर्देश दिए हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रश्मि पंत ने टीमों को क्षेत्र में सक्रिय रहने और मरीजों की लगातार निगरानी करने को कहा है। गंभीर मरीजों को जरूरत पड़ने पर 108 एंबुलेंस की मदद से बीडी पांडे अस्पताल नैनीताल, बेस अस्पताल हल्द्वानी या राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी भेजने की व्यवस्था की गई है।

ग्रामीण क्षेत्रों में बीमारी फैलने की खबरों के बीच लोगों ने दूषित पानी की समस्या के स्थायी समाधान की मांग भी उठाई है। इससे पहले ग्रामीणों ने नैनीताल-हल्द्वानी राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्रदर्शन कर पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करने और प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने की मांग की थी। ग्रामीणों के अनुसार पीलिया के साथ-साथ डायरिया, टाइफाइड, उल्टी-दस्त और बुखार जैसी शिकायतें भी सामने आ रही हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से फिलहाल पानी को अच्छी तरह उबालकर पीने की अपील की है। फल और सब्जियों को साफ पानी से धोकर इस्तेमाल करने तथा उल्टी, दस्त, पेट दर्द, बुखार या पीलिया जैसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराने की सलाह दी गई है। विभाग की टीमें बेलुवाखान, छड़ा, गांजा, चोपड़ा, कृष्णापुर, वीरभट्टी और गेठिया समेत प्रभावित इलाकों पर विशेष नजर रख रही हैं।

इस बीच 3 सितंबर को प्रशासनिक स्तर पर भी प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया गया। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने स्वास्थ्य शिविरों तथा उपचार व्यवस्था का जायजा लिया। क्षेत्र की पेयजल समस्या को दूर करने के लिए अधूरी पेयजल योजना को पूरा करने की दिशा में भी आर्थिक सहयोग की घोषणा की गई है।

ज्योलीकोट में बीमारी के बढ़ते मामलों ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता संक्रमित लोगों की पहचान, समय पर उपचार और बीमारी को दूसरे इलाकों में फैलने से रोकना है। वहीं जल संस्थान के सामने पेयजल स्रोत और पाइपलाइन की समस्या को स्थायी रूप से दूर करने की चुनौती है। स्थिति पर स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए हैं।

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