नालंदा जिले में फाइलेरिया जैसी गंभीर, दीर्घकालिक और अपंगता तक पहुंचाने वाली बीमारी को जड़ से समाप्त करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग द्वारा 10 फरवरी से विशेष फाइलेरिया उन्मूलन अभियान चलाया जाएगा। यह अभियान जिले के सभी 11 प्रखंडों में एक साथ संचालित होगा, जिसमें करीब 18 लाख 12 हजार से अधिक लोगों को फाइलेरिया रोधी दवा खिलाने का लक्ष्य तय किया गया है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि यह अभियान केंद्र और राज्य सरकार की गाइडलाइन के तहत पूरी सख्ती और निगरानी के साथ चलाया जाएगा, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति दवा लेने से वंचित न रह जाए।
इस अभियान के तहत मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा। इसके लिए आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सेविकाएं, एएनएम, स्वास्थ्यकर्मी और अन्य प्रशिक्षित कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। ये सभी कर्मी घर-घर जाकर लोगों को दवा खिलाएंगे और यह भी सुनिश्चित करेंगे कि दवा स्वास्थ्यकर्मी की मौजूदगी में ही ली जाए। विभाग ने स्पष्ट किया है कि दवा खुद से नहीं, बल्कि स्वास्थ्यकर्मियों की देखरेख में ही सेवन कराई जाएगी, जिससे सही खुराक और सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित हो सके।
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार फाइलेरिया एक ऐसी बीमारी है, जो धीरे-धीरे शरीर को कमजोर बनाती है और समय के साथ हाथ-पैर या शरीर के अन्य हिस्सों में सूजन जैसी गंभीर समस्या पैदा कर सकती है। कई मामलों में यह बीमारी जीवनभर की परेशानी बन जाती है। इसी को देखते हुए सरकार ने यह अभियान चलाने का निर्णय लिया है, ताकि बीमारी की संक्रमण श्रृंखला को पूरी तरह तोड़ा जा सके और आने वाली पीढ़ियों को इससे सुरक्षित रखा जा सके।
अभियान के दौरान बच्चों, युवाओं, वयस्कों और बुजुर्गों को दवा खिलाई जाएगी। हालांकि गंभीर रूप से बीमार लोगों, गर्भवती महिलाओं और बहुत छोटे शिशुओं को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार दवा से अलग रखा जाएगा। स्वास्थ्यकर्मी दवा खिलाने के साथ-साथ लोगों को फाइलेरिया से जुड़ी पूरी जानकारी भी देंगे, जिसमें बीमारी के कारण, लक्षण, बचाव और इलाज के बारे में विस्तार से बताया जाएगा, ताकि लोगों में जागरूकता बढ़ सके।
दवा सेवन के बाद यदि किसी व्यक्ति को चक्कर आना, उल्टी, हल्की एलर्जी या अन्य कोई असुविधा होती है, तो उससे निपटने के लिए प्रशासन ने पहले से पूरी तैयारी कर रखी है। प्रत्येक प्रखंड में विशेष रिस्पॉन्स टीम तैनात की गई है, जो ऐसी किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मौके पर पहुंचकर सहायता करेगी। सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और रेफरल अस्पतालों को अलर्ट मोड पर रखा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत इलाज उपलब्ध कराया जा सके।
स्वास्थ्य विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा दी जा रही दवा को अवश्य लें। अधिकारियों का कहना है कि यह दवा पूरी तरह सुरक्षित है और वर्षों से देशभर में फाइलेरिया उन्मूलन के लिए इस्तेमाल की जा रही है। दवा न लेने से न सिर्फ व्यक्ति खुद जोखिम में रहता है, बल्कि समाज में बीमारी के फैलाव की आशंका भी बनी रहती है।
जिला प्रशासन की ओर से इस पूरे अभियान की लगातार निगरानी की जाएगी। प्रखंड स्तर से लेकर जिला स्तर तक अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो दवा वितरण, कवरेज और रिपोर्टिंग की नियमित समीक्षा करेंगे। अभियान समाप्त होने के बाद आंकड़ों का विश्लेषण किया जाएगा, ताकि यह आकलन किया जा सके कि लक्ष्य के अनुरूप कितने लोगों तक दवा पहुंचाई गई और कहां सुधार की जरूरत है।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि फाइलेरिया उन्मूलन अभियान केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनसहयोग से सफल होने वाला सामाजिक अभियान है। यदि सभी लोग इसमें सक्रिय रूप से भाग लें और दवा का सेवन करें, तो नालंदा जिला आने वाले समय में फाइलेरिया मुक्त बन सकता है और लोगों को इस गंभीर बीमारी से स्थायी राहत मिल सकती है।











