इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका समर्थित गाजा योजना को इजराइल ने अभी मंजूरी नहीं दी है। हमास के निरस्त्रीकरण, गाजा से सेना की संभावित वापसी और गठबंधन सहयोगियों के दबाव के बीच वार्ता जारी है।
तेल अवीव: इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका समर्थित गाजा शांति योजना को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इजराइल ने प्रस्तावित मसौदे पर अभी सहमति नहीं दी है और अमेरिकी पक्ष को अपनी टिप्पणियां भेज दी हैं। नेतन्याहू के अनुसार, मौजूदा मसौदा इजराइल का नहीं बल्कि अमेरिकी टीम का तैयार किया हुआ दस्तावेज है, जिस पर अभी बातचीत जारी है। यह बयान ऐसे समय आया है जब गाजा में युद्ध समाप्त करने, हमास के निरस्त्रीकरण और अंतरराष्ट्रीय शांति व्यवस्था स्थापित करने को लेकर कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं।
नेतन्याहू बोले- मसौदा हमारा नहीं
सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में नेतन्याहू ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टीम का मानना है कि वह हमास को हथियार छोड़ने और गाजा के पूर्ण सैन्यीकरण समाप्त करने के लिए तैयार कर सकती है। उन्होंने कहा कि इजराइल इस संभावना का मूल्यांकन कर रहा है, लेकिन अब तक किसी अंतिम समझौते पर सहमति नहीं बनी है। नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी पक्ष ने एक मसौदा भेजा था, जिसे इजराइल ने उसी रूप में स्वीकार नहीं किया। इसके बजाय सरकार ने अपनी टिप्पणियां और सुझाव वापस भेजे हैं।
हमास के निरस्त्रीकरण के बाद ही सेना हटाने की बात
प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें यह आश्वासन मिला है कि इजराइली सेना को गाजा में अपनी मौजूदा तैनाती से तभी हटना होगा जब हमास पूरी तरह से हथियार छोड़ देगा। इजराइल लंबे समय से यह कहता रहा है कि गाजा में किसी भी स्थायी राजनीतिक समाधान की पहली शर्त हमास का पूर्ण निरस्त्रीकरण और क्षेत्र का सैन्यीकरण समाप्त होना है। सरकार का मानना है कि यदि सुरक्षा संबंधी इन शर्तों को पूरा किए बिना सेना हटाई जाती है तो भविष्य में फिर से हिंसा भड़क सकती है।
गठबंधन सरकार के भीतर बढ़ा विरोध
नेतन्याहू को केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि अपनी गठबंधन सरकार के भीतर भी दबाव का सामना करना पड़ रहा है। सरकार में शामिल दो दक्षिणपंथी मंत्रियों ने इस योजना पर दोबारा मतदान कराने की मांग की है। उनका कहना है कि वर्तमान प्रस्ताव पहले हुई चर्चाओं से अलग है और इसमें इजराइल की सुरक्षा चिंताओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह दबाव आगामी चुनावों और दक्षिणपंथी मतदाताओं को ध्यान में रखते हुए भी देखा जा रहा है।
सुरक्षा कैबिनेट पहले दे चुकी है समर्थन
हालांकि इजराइल की सुरक्षा कैबिनेट पहले इस प्रस्ताव के प्रमुख सिद्धांतों को समर्थन दे चुकी है। योजना के अनुसार गाजा पट्टी में भविष्य में अंतरराष्ट्रीय शांति सैनिकों की तैनाती, चरणबद्ध सुरक्षा व्यवस्था और संभावित राजनीतिक संक्रमण की रूपरेखा शामिल है। फिर भी अंतिम निर्णय से पहले कई तकनीकी और राजनीतिक मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है।
कैबिनेट बैठक टली
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार नेतन्याहू ने इस मुद्दे पर सुरक्षा कैबिनेट की बैठक बुलाने की तैयारी की थी, लेकिन बाद में इसे स्थगित कर दिया गया। विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला घरेलू राजनीतिक परिस्थितियों और सत्तारूढ़ दल के आंतरिक कार्यक्रमों को देखते हुए लिया गया। अब इस विषय पर आगे की चर्चा आगामी बैठक में होने की संभावना है।

अमेरिका का बढ़ता दबाव
रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका चाहता है कि गाजा में हिंसा कम हो और किसी भी आंशिक सैन्य वापसी से पहले नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। इसी क्रम में इजराइली सेना के भीतर भी कुछ परिचालन प्रक्रियाओं में बदलाव की खबरें सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि बड़े सैन्य हमलों के लिए अब पहले की तुलना में उच्च स्तर की अनुमति आवश्यक हो सकती है। हालांकि इजराइली सरकार ने इस संबंध में आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
अंतरराष्ट्रीय शांति बल की भूमिका
प्रस्तावित योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा गाजा में अंतरराष्ट्रीय शांति सैनिकों की तैनाती भी है। इसका उद्देश्य संघर्ष विराम लागू होने के बाद सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना और क्षेत्र में स्थिरता स्थापित करना बताया जा रहा है। हालांकि इजराइल के कुछ राजनीतिक दलों का मानना है कि विदेशी शांति बलों की मौजूदगी भविष्य में सुरक्षा और सैन्य अभियानों को प्रभावित कर सकती है।
कूटनीतिक विकल्प सीमित
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में इजराइल के लिए अमेरिका समर्थित पहल को पूरी तरह अस्वीकार करना आसान नहीं होगा। अमेरिका इजराइल का प्रमुख रणनीतिक सहयोगी बना हुआ है और दोनों देशों के बीच सुरक्षा तथा रक्षा सहयोग लंबे समय से जारी है। इसी कारण अंतिम समझौते से पहले दोनों पक्षों के बीच मसौदे में कई संशोधन और नई शर्तें जुड़ सकती हैं।
गाजा संकट अब भी बरकरार
गाजा में महीनों से जारी संघर्ष ने व्यापक मानवीय संकट पैदा किया है। बड़ी संख्या में नागरिक विस्थापित हुए हैं और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार संघर्ष विराम, मानवीय सहायता और स्थायी राजनीतिक समाधान की मांग कर रहा है। ऐसे में अमेरिका समर्थित योजना को संभावित समाधान के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इजराइल, हमास और अंतरराष्ट्रीय पक्षकार प्रमुख सुरक्षा एवं राजनीतिक मुद्दों पर कितनी सहमति बना पाते हैं।
आगे क्या?
अब सभी की नजर इजराइल की अगली सुरक्षा कैबिनेट बैठक और अमेरिका के साथ जारी वार्ता पर रहेगी। यदि मसौदे में दोनों पक्षों की प्रमुख चिंताओं को शामिल कर लिया जाता है, तो गाजा में युद्धविराम और भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है। हालांकि फिलहाल नेतन्याहू के ताजा बयान से स्पष्ट है कि अंतिम समझौते तक पहुंचने से पहले अभी कई दौर की बातचीत और राजनीतिक सहमति आवश्यक होगी।











