नोएडा में बनेगी AI सिटी आईटी कंपनियों और रिसर्च सेंटरों को मिलेगी जगह 7.5 साल में पूरा होगा प्रोजेक्ट

प्रस्तावित AI सिटी में आईटी कंपनियों रिसर्च सेंटरों स्टार्टअप और तकनीकी संस्थानों को जगह मिलेगी परियोजना से तकनीकी निवेश और रोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
नोएडा में बनेगी AI सिटी आईटी कंपनियों और रिसर्च सेंटरों को मिलेगी जगह 7.5 साल में पूरा होगा प्रोजेक्ट
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नोएडा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI पर आधारित तकनीकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए नई AI सिटी विकसित करने की योजना चर्चा में है। इस परियोजना का उद्देश्य आईटी कंपनियों, रिसर्च सेंटरों, स्टार्टअप और तकनीक आधारित संस्थानों को एक ही परिसर में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसके माध्यम से नोएडा को आधुनिक तकनीक, डिजिटल सेवाओं और अनुसंधान के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा। परियोजना को पूरा करने के लिए करीब साढ़े सात साल की समयसीमा निर्धारित किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, परियोजना की लागत, निर्माण के चरणों और अंतिम समयसीमा से जुड़ी विस्तृत जानकारी की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।

प्रस्तावित AI सिटी में ऐसी कंपनियों को प्राथमिकता मिलने की उम्मीद है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स, क्लाउड कंप्यूटिंग और अन्य आधुनिक तकनीकों पर काम करती हैं। यहां कंपनियों को कार्यालयों के साथ अनुसंधान और विकास से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इससे तकनीकी क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों को अपने उत्पाद विकसित करने, नई सेवाओं का परीक्षण करने और विशेषज्ञों के साथ मिलकर शोध करने में मदद मिल सकती है। एक ही स्थान पर अलग-अलग तकनीकी संस्थानों की मौजूदगी से कंपनियों के बीच सहयोग और नई तकनीकों के विकास की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।

AI सिटी में रिसर्च सेंटरों की भूमिका भी अहम रहने की उम्मीद है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, परिवहन, उद्योग, बैंकिंग और सरकारी सेवाओं समेत कई क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में शोध संस्थानों और कंपनियों के बीच बेहतर तालमेल से नई तकनीकों को विकसित करने और उन्हें व्यावहारिक इस्तेमाल तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है। रिसर्च सेंटरों के जरिए तकनीकी समस्याओं पर काम करने, नए सॉफ्टवेयर और उपकरण विकसित करने तथा प्रशिक्षित पेशेवरों को अवसर देने की संभावनाएं बनेंगी।

इस परियोजना से स्टार्टअप के लिए भी नए अवसर पैदा हो सकते हैं। नई तकनीक पर काम करने वाले छोटे उद्यमों को कार्यालय, तकनीकी संसाधन, विशेषज्ञों से संपर्क और निवेशकों तक पहुंच जैसी सुविधाओं की जरूरत होती है। यदि AI सिटी में इस तरह का ढांचा तैयार होता है, तो स्टार्टअप को अपने उत्पाद विकसित करने और बाजार तक पहुंचने में सहायता मिल सकती है। इसके अलावा बड़ी आईटी कंपनियों की मौजूदगी से स्थानीय कारोबार और सहायक सेवाओं की मांग बढ़ने की संभावना भी रहेगी।

नोएडा पहले से ही आईटी कंपनियों, इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग और कॉरपोरेट कार्यालयों का प्रमुख केंद्र है। दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से नजदीकी, सड़क संपर्क और औद्योगिक बुनियादी ढांचा इसे तकनीकी निवेश के लिए महत्वपूर्ण बनाते हैं। नई AI सिटी की योजना इसी औद्योगिक आधार को आगे बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखी जा सकती है। हालांकि, परियोजना का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि निर्माण कब शुरू होता है, कंपनियों को किस तरह की सुविधाएं मिलती हैं और निवेशकों की भागीदारी कितनी रहती है।

इस तरह की परियोजनाओं से रोजगार के अवसर भी पैदा होने की संभावना है। AI इंजीनियर, डेटा वैज्ञानिक, सॉफ्टवेयर डेवलपर, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ, शोधकर्ता और तकनीकी सहायता से जुड़े पेशेवरों की मांग बढ़ सकती है। निर्माण के दौरान भी विभिन्न क्षेत्रों में काम मिलने की संभावना रहती है। लेकिन रोजगार की वास्तविक संख्या परियोजना के आकार, कंपनियों के निवेश और संचालन शुरू होने के बाद सामने आएगी। इसलिए अभी किसी निश्चित संख्या में नौकरियों का दावा करना उचित नहीं होगा।

उत्तर प्रदेश में AI और डीप टेक्नोलॉजी से जुड़ी अन्य योजनाओं पर भी काम हो रहा है। अक्टूबर 2026 में राज्य मंत्रिमंडल ने ग्रेटर नोएडा में PRAGATI नाम से रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पार्क को मंजूरी दी है। यह परियोजना लगभग 69.52 एकड़ में विकसित की जानी है और इसमें रोबोटिक्स परीक्षण, प्रोटोटाइप निर्माण, AI कंप्यूटिंग और डेटा लैब जैसी सुविधाएं प्रस्तावित हैं। इस पार्क को नोएडा में प्रस्तावित AI सिटी से अलग परियोजना के रूप में समझना जरूरी है। दोनों योजनाएं तकनीकी निवेश और अनुसंधान को बढ़ावा देने के व्यापक प्रयास का हिस्सा हो सकती हैं, लेकिन इनके स्थान, स्वरूप और समयसीमा अलग-अलग हैं।

अब नोएडा की प्रस्तावित AI सिटी को लेकर आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। जमीन, मास्टर प्लान, निवेश मॉडल, निर्माण के चरणों और कंपनियों को दी जाने वाली सुविधाओं से जुड़ी आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद परियोजना की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी। यदि योजना तय समय के भीतर आगे बढ़ती है, तो इससे नोएडा में तकनीकी कंपनियों और अनुसंधान संस्थानों के लिए नया केंद्र विकसित हो सकता है। फिलहाल परियोजना की समयसीमा और सुविधाओं से जुड़े दावों की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।

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