ओडिशा में बीजू जनता दल (BJD) की आंतरिक अस्थिरता राज्यसभा चुनावों के दौरान स्पष्ट रूप से सामने आई है। लंबे समय तक सत्ता में रहने के बाद पार्टी के भीतर बिखराव के संकेत दिखाई दे रहे हैं।
भुवनेश्वर: ओडिशा में हाल ही में हुए राज्यसभा चुनावों में क्रॉस वोटिंग के मामले ने राजनीति में हलचल मचा दी है। बीजू जनता दल ने राज्यसभा चुनाव के दौरान अपने छह विधायकों को “कारण बताओ नोटिस” जारी किया है। पार्टी ने विधायकों के इस कृत्य को विश्वासघात करार देते हुए उनसे स्पष्ट स्पष्टीकरण मांगा है।राज्यसभा चुनाव में चार सीटों के लिए मतदान हुआ।
इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने दो सीटें जीत लीं, BJD को एक सीट मिली, जबकि एक सीट पर भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप राय विजयी हुए। इस प्रक्रिया के दौरान बीजू जनता दल के कुछ विधायकों द्वारा क्रॉस वोटिंग किए जाने की खबर सामने आई, जिससे पार्टी नेतृत्व में असंतोष फैल गया।
BJD का जवाब: विश्वासघात और नोटिस
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बीजू जनता दल की मुख्य सचेतक प्रमिला मलिक ने चक्रमणि कन्हार (बालीगुडा), नबा किशोर मलिक (जयदेव), सौविक विश्वाल (चौद्वार-कटक), सुबासिनी जेना (बस्ता), रमाकांत भोई (तिरतोल) और देवी रंजन त्रिपाठी (बांकी) को नोटिस भेजकर 20 मार्च शाम पांच बजे तक जवाब देने के लिए कहा। पत्र में स्पष्ट किया गया कि यदि विधायकों से संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो पार्टी अपने संविधान और नियमों के अनुसार एकतरफा कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगी।
तिरतोल से BJD विधायक रमाकांत भोई ने एक निजी समाचार चैनल को बताया कि मतदान से एक रात पहले उन्हें उनके आवास से जबरन निकालकर नवीन निवास में रखा गया। उन्होंने कहा कि उन्हें पार्टी नेताओं ने रात भर निवास परिसर से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी। भोई ने यह भी कहा, "मैंने स्पष्ट कर दिया था कि अगर मुझे जाने नहीं दिया गया, तो मैं वोट नहीं दूंगा।"
यह बयान पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और विधायकों की नाराजगी का संकेत देता है। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटनाक्रम बीजू जनता दल के अंदरूनी तनाव को उजागर करता है।
कांग्रेस ने विधायकों को सस्पेंड किया
राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के चलते कांग्रेस पार्टी ने अपने तीन विधायकों को सस्पेंड कर दिया। इनमें सनाखेमुंडी के रमेश चंद्र जेना, मोहना के दशरथी गोमांगो और बाराबती-कटक की सोफिया फिरदौस शामिल हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास ने कहा कि यह विश्वासघात स्वीकार्य नहीं है और संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत उन्हें विधानसभा से अयोग्य घोषित करने के लिए कदम उठाए जाएंगे।
राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग का यह मामला राज्य की राजनीतिक स्थिरता के लिए गंभीर संकेत देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बीजू जनता दल के भीतर अनुशासन और नेतृत्व को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वहीं, कांग्रेस और भाजपा की रणनीति भी राज्य की राजनीति में बदलाव के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रही है।










