आजादी के शुरुआती दौर में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की सैलरी बेहद सीमित थी। समय के साथ महंगाई, जिम्मेदारियों और सरकारी व्यवस्थाओं में बदलाव के कारण प्रधानमंत्री के वेतन और सुविधाओं में बड़ा इजाफा हुआ है।
Prime Minister Salary:भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को आज के मुकाबले बेहद कम वेतन मिलता था। उस दौर में सरकारी खर्चों को लेकर सख्ती थी और नेहरू ने खुद अपनी सैलरी कम करवा ली थी। वहीं आज प्रधानमंत्री का वेतन लाखों रुपये में पहुंच चुका है, जिसके साथ सुरक्षा, आवास और आधिकारिक यात्रा जैसी कई आधुनिक सुविधाएं भी जुड़ी हुई हैं।
आजादी के बाद कितना था प्रधानमंत्री का वेतन?
भारत को आजादी मिलने के बाद देश आर्थिक और प्रशासनिक रूप से खुद को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा था। उसी दौरान मंत्रियों और सांसदों के वेतन को तय करने के लिए कानून बनाया गया। इसके तहत प्रधानमंत्री और कैबिनेट मंत्रियों का वेतन 3000 रुपये प्रति माह रखा गया था। इसके अलावा 500 रुपये का अतिरिक्त भत्ता भी दिया जाता था, जिसका उपयोग आधिकारिक जरूरतों के लिए किया जाता था।

हालांकि, पंडित जवाहरलाल नेहरू ने खुद अपने वेतन में कटौती करवाई थी। पहले उन्होंने सैलरी घटाकर 2250 रुपये कर दी और बाद में इसे 2000 रुपये प्रति माह तक सीमित कर दिया। उस समय सरकारी खर्चों को लेकर काफी अनुशासन रखा जाता था और सार्वजनिक धन के उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जाता था।
आज के प्रधानमंत्री को मिलती हैं कई आधुनिक सुविधाएं
समय के साथ देश की अर्थव्यवस्था, महंगाई और प्रशासनिक जिम्मेदारियों में बड़ा बदलाव आया है। यही वजह है कि आज प्रधानमंत्री का वेतन भी पहले की तुलना में काफी अधिक हो चुका है। वर्तमान में प्रधानमंत्री को हर महीने करीब 2.80 लाख रुपये वेतन मिलता है।
इसके अलावा प्रधानमंत्री को कई आधिकारिक सुविधाएं भी दी जाती हैं। इनमें विशेष सुरक्षा व्यवस्था, आधिकारिक आवास, एयर इंडिया वन विमान और उच्च स्तरीय प्रशासनिक सहायता शामिल है। प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) की टीम हर समय तैनात रहती है। वहीं दिल्ली स्थित लोक कल्याण मार्ग पर प्रधानमंत्री का आधिकारिक निवास मौजूद है।
प्रधानमंत्री की भूमिका क्यों मानी जाती है सबसे अहम?
भारत में प्रधानमंत्री सरकार के प्रमुख होते हैं और कैबिनेट का नेतृत्व करते हैं। देश की नीतियों, योजनाओं और बड़े फैसलों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अलग-अलग मंत्रालयों के कामकाज का समन्वय भी प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी का हिस्सा होता है।
प्रधानमंत्री लोकसभा में सरकार का नेतृत्व करते हैं और सदन की कार्यवाही को सुचारु बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। इसके साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व भी प्रधानमंत्री ही करते हैं।
देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर निर्णय लेने में प्रधानमंत्री की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। यही कारण है कि समय के साथ इस पद से जुड़ी जिम्मेदारियां और सुविधाएं दोनों लगातार बढ़ती गई हैं।













