राजस्थान के जयपुर में ग्रेड थर्ड शिक्षकों का ट्रांसफर आंदोलन दूसरे दिन भी जारी रहा। शिक्षकों के साथ उनके बच्चे भी पोस्टर लेकर धरने में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाया, जबकि शिक्षा मंत्री ने तत्काल तबादलों से इनकार किया।
जयपुर: राजस्थान में ग्रेड थर्ड शिक्षकों के तबादलों को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। राज्यभर से आए शिक्षक जयपुर स्थित शहीद स्मारक पर लगातार दूसरे दिन भी धरने पर डटे रहे। इस प्रदर्शन की सबसे भावुक तस्वीर तब सामने आई जब कई शिक्षक अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ धरना स्थल पर पहुंचे। बच्चों ने हाथों में पोस्टर लेकर अपने माता-पिता के ट्रांसफर की मांग की और सरकार से जल्द समाधान निकालने की अपील की। धरने में बड़ी संख्या में महिला शिक्षक भी शामिल हैं। कई शिक्षक अपने बच्चों के साथ पूरे दिन प्रदर्शन स्थल पर बैठे रहे, जिससे यह आंदोलन राज्यभर में चर्चा का विषय बन गया है।
ट्रांसफर नीति लागू करने की मांग पर अड़े शिक्षक
प्रदर्शन कर रहे ग्रेड थर्ड शिक्षकों का कहना है कि वे वर्षों से एक ही विद्यालय में कार्यरत हैं, लेकिन अब तक उनका तबादला नहीं किया गया। उनका आरोप है कि राज्य सरकार ने अन्य श्रेणी के शिक्षकों, जैसे प्रिंसिपल, प्रथम श्रेणी और द्वितीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले किए हैं, जबकि ग्रेड थर्ड शिक्षकों के मामले में लगातार देरी की जा रही है। शिक्षकों का कहना है कि समान कार्य करने वाले कर्मचारियों के साथ अलग-अलग व्यवहार उचित नहीं है। उनका मानना है कि पारदर्शी ट्रांसफर नीति लागू कर सभी पात्र शिक्षकों को समान अवसर मिलना चाहिए।
प्रदर्शन में बच्चों की मौजूदगी बनी चर्चा का विषय
धरना स्थल पर शिक्षकों के साथ उनके बच्चों की उपस्थिति ने आंदोलन को नया आयाम दिया। कई बच्चे पोस्टर लेकर अपने माता-पिता के तबादले की मांग करते नजर आए। कुछ बच्चे धरना स्थल पर खेलते दिखे, जबकि छोटे बच्चों को माता-पिता ने वहीं संभाला। प्रदर्शनकारी शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय तक परिवार से दूर रहने और स्थानांतरण नहीं होने का असर उनके पारिवारिक जीवन पर भी पड़ रहा है। उनका दावा है कि बच्चों की शिक्षा और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण ट्रांसफर नीति लागू करना आवश्यक है।
प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
ग्रेड थर्ड शिक्षक संघर्ष समिति के संयोजक सुनील महला ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने धरना स्थल पर प्रदर्शनकारियों को असुविधा पहुंचाने के लिए कई कदम उठाए। उनके अनुसार रात के समय धरना स्थल से जनरेटर हटाया गया, माइक सिस्टम बंद कर दिया गया और पुलिस उसे अपने साथ ले गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि धरना स्थल के पास स्थित सार्वजनिक शौचालय को बंद कर दिया गया, जिससे विशेष रूप से महिला शिक्षकों और उनके बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि इन आरोपों पर प्रशासन की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

पूरे राजस्थान से पहुंचे हजारों शिक्षक
संघर्ष समिति के अनुसार आंदोलन को पूरे प्रदेश से व्यापक समर्थन मिल रहा है। समिति का दावा है कि पहले दिन करीब पांच हजार शिक्षक धरने में शामिल हुए थे, जबकि दूसरे दिन इससे भी अधिक संख्या में शिक्षक जयपुर पहुंचे। प्रदर्शनकारी नेताओं ने कहा कि यदि सरकार ने जल्द कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले दिनों में प्रदेशभर में बड़े स्तर पर विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं।
शिक्षा मंत्री ने क्या कहा?
राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने ग्रेड थर्ड शिक्षकों की तत्काल ट्रांसफर की मांग पर कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में इसे तुरंत लागू करना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि विभाग विभिन्न प्रशासनिक और तकनीकी पहलुओं पर विचार कर रहा है और किसी भी निर्णय से पहले सभी पक्षों का अध्ययन आवश्यक है। शिक्षा मंत्री के इस बयान के बाद प्रदर्शनकारी शिक्षकों में नाराजगी और बढ़ गई। कई शिक्षकों ने मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से सीधे हस्तक्षेप करने की अपील की।
सरकार पर भेदभाव के आरोप
प्रदर्शनकारी शिक्षकों का आरोप है कि सरकार ने अन्य संवर्गों के शिक्षकों के तबादले कर दिए, लेकिन ग्रेड थर्ड शिक्षकों को इससे बाहर रखा गया। उनका कहना है कि यदि अन्य शिक्षकों के लिए स्थानांतरण संभव है, तो उनके लिए अलग नियम लागू करना उचित नहीं है। शिक्षकों ने मांग की कि राज्य सरकार एक पारदर्शी और समयबद्ध ट्रांसफर नीति लागू करे, जिससे सभी पात्र कर्मचारियों को समान अवसर मिल सके।
शिक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह विवाद लंबा खिंचता है तो इसका असर स्कूलों की शैक्षणिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। एक ओर शिक्षक अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार को प्रशासनिक संतुलन बनाए रखना है। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि इस तरह के विवादों का समाधान संवाद के माध्यम से निकालना सबसे बेहतर विकल्प होता है। इससे न केवल शिक्षकों की समस्याओं का समाधान होगा बल्कि छात्रों की पढ़ाई भी प्रभावित नहीं होगी।
आगे क्या?
फिलहाल शिक्षक संगठन अपनी मांगों पर कायम हैं और उन्होंने आंदोलन जारी रखने का संकेत दिया है। दूसरी ओर राज्य सरकार की ओर से तत्काल ट्रांसफर शुरू करने के कोई संकेत नहीं मिले हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार और शिक्षक संगठनों के बीच बातचीत होती है या नहीं। यदि दोनों पक्ष जल्द किसी सहमति पर नहीं पहुंचते हैं, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और व्यापक रूप ले सकता है।











