राम मंदिर में ट्रस्टियों के रिश्तेदारों पर जमीन खरीद के आरोप 17 गुना तक ज्यादा दाम देने और निर्माण सामग्री में कमीशन लेने की जांच

अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े लोगों पर जमीन खरीद में अनियमितता और निर्माण सामग्री में कमीशन लेने के आरोपों की SIT जांच जारी है।
राम मंदिर में ट्रस्टियों के रिश्तेदारों पर जमीन खरीद के आरोप 17 गुना तक ज्यादा दाम देने और निर्माण सामग्री में कमीशन लेने की जांच
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अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) अब जमीन खरीद और निर्माण सामग्री की खरीद प्रक्रिया की भी जांच कर रही है। आरोप हैं कि ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोगों के रिश्तेदारों और करीबी लोगों ने जमीनों की खरीद-फरोख्त में हिस्सा लिया और कई मामलों में बाजार भाव से कई गुना अधिक कीमत पर जमीनें खरीदी गईं।

सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान ऐसे मामलों की पड़ताल की जा रही है, जिनमें जमीनों के लिए बाजार मूल्य से काफी अधिक भुगतान किया गया। कुछ राजनीतिक दलों और विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि कुछ सौदों में जमीन की कीमतें 17 गुना तक बढ़ाकर दिखाई गईं। हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और SIT जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

जांच एजेंसी निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की खरीद प्रक्रिया की भी समीक्षा कर रही है। आरोप लगाए गए हैं कि कुछ आपूर्तिकर्ताओं और बिचौलियों के जरिए खरीद में भारी कमीशन लिया गया। SIT यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सामग्री की खरीद, भुगतान और सप्लाई से जुड़े दस्तावेज नियमों के अनुरूप हैं या नहीं।

उत्तर प्रदेश सरकार ने इन आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय SIT का गठन किया है। यह टीम मंदिर ट्रस्ट, चढ़ावे के प्रबंधन, जमीन खरीद और वित्तीय लेन-देन से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। सरकार के मुताबिक, यह जांच ट्रस्ट की ओर से की गई मांग के बाद शुरू की गई, ताकि आरोपों की सच्चाई सामने आ सके।

इस बीच, SIT ने ट्रस्ट और मंदिर से जुड़े कुछ पदाधिकारियों को जांच पूरी होने तक अयोध्या नहीं छोड़ने के निर्देश दिए हैं। टीम नियमित रूप से अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज रही है और अंतिम रिपोर्ट जल्द सौंपे जाने की संभावना जताई जा रही है।

वहीं, विपक्षी दलों ने मामले की न्यायिक जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जमीन सौदों, चढ़ावे और निर्माण कार्य से जुड़े सभी वित्तीय रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाने चाहिए। दूसरी ओर, ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोगों ने आरोपों को निराधार बताया है और कहा है कि जांच पूरी होने के बाद सच्चाई सामने आ जाएगी।

फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है। जमीन खरीद में 17 गुना ज्यादा दाम देने, रिश्तेदारों की भूमिका और निर्माण सामग्री में कथित कमीशन जैसे आरोपों पर अभी कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। SIT की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोप कितने सही हैं और मामले में आगे क्या कार्रवाई होगी।

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