Uttar Pradesh के Ayodhya स्थित Shri Ram Janmabhoomi Temple में चढ़ावे से जुड़े कथित मामले में एसआईटी रिपोर्ट के आधार पर आठ आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किए जाने के बाद अब इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।
अयोध्या: उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन से जुड़े मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट के आधार पर आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद कांग्रेस ने दावा किया है कि यह कार्रवाई पार्टी के लगातार दबाव और विरोध-प्रदर्शनों का परिणाम है।
वहीं कांग्रेस ने यह भी मांग की है कि जांच केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों और ट्रस्ट से जुड़े लोगों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की जाए।
कांग्रेस ने सरकार पर लगाया दबाव में कार्रवाई करने का आरोप
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि राम मंदिर से जुड़ा मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का विषय है। उनका आरोप है कि कांग्रेस लगातार इस प्रकरण में पारदर्शी जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही थी। उन्होंने कहा कि हाल ही में पार्टी ने प्रदेशभर में विरोध-प्रदर्शन भी आयोजित किए थे, जिसके बाद सरकार को कार्रवाई करनी पड़ी।
अजय राय ने कहा कि यदि चढ़ावे में किसी भी प्रकार की अनियमितता हुई है तो दोषियों को कानून के दायरे में लाना जरूरी है। उनका कहना था कि श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर में अर्पित किया गया धन पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ उपयोग होना चाहिए।
केवल कर्मचारियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं: कांग्रेस
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कांग्रेस का कहना है कि यदि जांच केवल कुछ कर्मचारियों तक सीमित रहती है तो इससे पूरे मामले की सच्चाई सामने नहीं आएगी। पार्टी ने मांग की है कि जांच एजेंसियां उन सभी लोगों की भूमिका की भी जांच करें जो प्रशासनिक या प्रबंधन स्तर पर निर्णय लेने की स्थिति में थे। अजय राय ने कहा कि अगर किसी बड़े अधिकारी या जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी समान रूप से कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उनके अनुसार, किसी भी मामले में जवाबदेही तय किए बिना न्याय की प्रक्रिया अधूरी मानी जाएगी।
एसआईटी रिपोर्ट के बाद दर्ज हुई एफआईआर
जानकारी के अनुसार, विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी जांच पूरी करने के बाद 23 जून को राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट के आधार पर आठ आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। हालांकि, जांच रिपोर्ट के सभी निष्कर्ष और आरोपियों की विस्तृत भूमिका अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में कुछ लोगों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की सिफारिश भी की है। अब संबंधित जांच एजेंसियां मामले की कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही हैं।
एफआईआर दर्ज होने के बाद यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। विपक्ष इस पूरे प्रकरण में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है, जबकि सरकार और संबंधित संस्थाओं की ओर से अब तक इस मामले पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता का आरोप संवेदनशील माना जाता है। ऐसे मामलों में जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान दिया जाता है ताकि जनता का विश्वास बना रहे।











