बचपन में हम सभी जादुई शक्तियों की कामना करते हैं। यह कहानी इसी कल्पना और रिया नाम की बच्ची की है। यह सिखाती है कि शक्ति के साथ ज़िम्मेदारी भी आती है। अच्छे हाथों में जादू वरदान है, लेकिन लालच में यह मुसीबत बन जाता है। रिया जादू से ज़्यादा अपनी नेकी पर भरोसा करती है।
कहानी
सुंदरपुर नाम का एक छोटा सा गाँव था, जो पहाड़ियों के बीच बसा हुआ था। उसी गाँव में रिया नाम की एक आठ साल की बच्ची रहती थी। रिया बहुत ही प्यारी और समझदार थी, लेकिन उसका परिवार बहुत गरीब था। रिया को चित्रकला (Drawing) का बहुत शौक था, मगर उसके पास न तो अच्छे रंग थे और न ही ड्राइंग बुक। वह अक्सर ज़मीन पर लकड़ी के टुकड़ों से या कोयले से चित्र बनाया करती थी।
एक दिन, रिया स्कूल से घर लौट रही थी। रास्ते में उसने देखा कि एक बूढ़ी औरत, जिसके कपड़े बहुत फटे-पुराने थे, सड़क किनारे बैठी काँप रही थी। उसे भूख और प्यास लगी थी। रिया के पास उसका टिफिन था, जिसमें एक रोटी बची थी। उसने बिना कुछ सोचे वह रोटी बूढ़ी औरत को दे दी और पास के हैंडपंप से पानी लाकर पिलाया।
बूढ़ी औरत ने खाना खाकर रिया के सिर पर हाथ फेरा और अपनी झोली से एक पुरानी, अजीब सी दिखने वाली नीले रंग की पेंसिल निकाली। उसने कहा, 'बेटी, तुम बहुत नेक हो। यह पेंसिल साधारण नहीं है। इसे संभाल कर रखना और हमेशा दूसरों की भलाई के लिए इस्तेमाल करना।' इतना कहकर वह बूढ़ी औरत वहाँ से चली गई।
रिया उस पेंसिल को लेकर घर आ गई। उसने सोचा, 'चलो, इसे चलाकर देखते हैं।' उसके पास एक पुराना रद्दी का कागज था। रिया को बहुत भूख लगी थी, इसलिए उसने मज़ाक-मज़ाक में उस कागज पर एक बड़े से लाल सेब का चित्र बनाया।
जैसे ही चित्र पूरा हुआ, एक चमत्कार हुआ! कागज से वह सेब निकलकर असली बनकर रिया के हाथ में आ गया। रिया की आँखें फटी की फटी रह गईं। उसने सेब खाकर देखा, वह बेहद मीठा और रसीला था। रिया समझ गई कि यह कोई मामूली पेंसिल नहीं है।
उसने तुरंत अपने माता-पिता के लिए कुछ गर्म कपड़े बनाए। फिर उसने अपने पिता की टूटी हुई चप्पल की जगह नई जूतों की जोड़ी बनाई। देखते ही देखते रिया के घर की गरीबी दूर होने लगी। लेकिन रिया ने यह बात किसी को नहीं बताई, वह चुपचाप रात में अपनी पेंसिल का इस्तेमाल करती और ज़रूरतमंद चीज़ें बनाती।
धीरे-धीरे रिया ने गाँव के दूसरे लोगों की मदद करना भी शुरू कर दिया। उसने एक गरीब किसान के लिए हल बनाया, एक बीमार बच्चे के लिए दवाइयाँ बनाईं और एक भूखे कुत्ते के लिए दूध का कटोरा बनाया। गाँव वाले हैरान थे कि यह सब मदद कहाँ से आ रही है।
लेकिन, गाँव में एक लाला धनीराम रहता था, जो बहुत लालची और चालाक था। उसे शक हो गया कि यह सब रिया कर रही है। एक रात, उसने रिया को खिड़की से जादुई पेंसिल का इस्तेमाल करते देख लिया।
अगले दिन, जब रिया स्कूल गई थी, लाला धनीराम उसके घर में घुस गया और वह पेंसिल चुरा ली। पेंसिल पाकर लाला खुशी से पागल हो गया। वह अपने घर भागा और दरवाज़ा बंद कर लिया।
उसने सोचा, 'अब मैं दुनिया का सबसे अमीर आदमी बनूँगा!' उसने जल्दी-जल्दी कागज पर सोने के सिक्कों का ढेर बनाना शुरू किया। जैसे ही चित्र पूरा हुआ, सच में वहाँ सिक्कों का ढेर लग गया। लेकिन लाला का लालच यहाँ नहीं रुका। उसने हीरे, जवाहरात और बड़े-बड़े महलों के चित्र बनाए। उसका पूरा कमरा धन-दौलत से भर गया।
लेकिन तभी एक गड़बड़ हो गई। उस पेंसिल में एक नियम था, वह केवल 'साफ दिल' की इच्छाएँ पूरी करती थी। अगर कोई लालच से उसका इस्तेमाल करता, तो वह चीज़ें मुसीबत बन जाती थीं।
अचानक, सोने के सिक्के पत्थरों में बदलने लगे। हीरों के हार सांप बन गए! लाला धनीराम डर के मारे चीखने लगा। वह जिस चीज़ को छूता, वह उसे डराने लगती। वह भागता हुआ रिया के पास पहुँचा और उसके पैरों में गिर पड़ा। उसने रोते हुए कहा, 'बेटी, अपनी यह बला वापस ले लो! मुझे माफ़ कर दो, मुझे नहीं चाहिए ऐसा जादू।'
रिया ने वह पेंसिल वापस ली। उसने तुरंत एक हवा का झोंका बनाया, जिसने लाला के कमरे से सारे सांप और पत्थर गायब कर दिए।
रिया ने लाला धनीराम को समझाया, 'काका, यह जादू लालच के लिए नहीं, ज़रूरत के लिए था। जब हम दूसरों के लिए कुछ मांगते हैं, तो बरकत होती है, लेकिन जब हम सिर्फ अपने लिए जमा करते हैं, तो वह बोझ बन जाता है।'
लाला धनीराम को अपनी गलती का एहसास हुआ। उस दिन के बाद उसने अपना लालच छोड़ दिया और अपनी दौलत से गाँव वालों की मदद करने लगा। रिया ने वह पेंसिल एक संदूक में बंद करके रख दी और तय किया कि वह उसका इस्तेमाल तभी करेगी जब किसी को बहुत बड़ी मुसीबत से बचाना होगा।
रिया आज भी गाँव में रहती है, और लोग कहते हैं कि जब भी गाँव पर कोई बड़ी मुसीबत आती है, वह अपने आप सुलझ जाती है। शायद, रिया की पेंसिल आज भी अपना काम कर रही है।
कहानी से सीख
- नेकी का फल: निस्वार्थ भाव से की गई मदद का फल हमेशा मीठा होता है।
- लालच बुरी बला है: अधिक पाने की चाहत और लालच हमेशा इंसान को मुसीबत में डालता है।
- शक्ति का सही उपयोग: अगर हमारे पास कोई विशेष हुनर या ताकत है, तो उसका इस्तेमाल दूसरों की भलाई के लिए करना चाहिए, न कि केवल अपने स्वार्थ के लिए।













