राजस्थान के सीकर में पुलिस ने कंबोडिया से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क के कथित एजेंट को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर युवाओं को विदेश में नौकरी का झांसा देकर साइबर अपराध में शामिल कराने और प्रति व्यक्ति कमीशन लेने का आरोप है।
सीकर: राजस्थान के सीकर जिले में पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क से जुड़े एक कथित एजेंट को गिरफ्तार कर एक बड़े मानव तस्करी और साइबर ठगी रैकेट का खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी बेरोजगार भारतीय युवाओं को विदेश में आकर्षक वेतन, बेहतर नौकरी और सुविधाओं का लालच देकर कंबोडिया भेजता था, जहां उनसे कथित रूप से ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराध करवाए जाते थे। इस कार्रवाई को दक्षिण-पूर्व एशिया में सक्रिय साइबर अपराध सिंडिकेट के खिलाफ महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।
रामगढ़ सेठान से हुई गिरफ्तारी
जिला पुलिस के अनुसार आरोपी को सीकर जिले के रामगढ़ सेठान क्षेत्र से हिरासत में लिया गया। जांच के दौरान उसके पास से पासपोर्ट और मोबाइल फोन बरामद किए गए। प्रारंभिक पूछताछ के बाद उसे आगे की जांच के लिए जयपुर साइबर पुलिस को सौंप दिया गया है, जहां उसके खिलाफ पहले से दर्ज मामलों की जांच भी जारी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी का संबंध उन नेटवर्कों से है जो भारतीय युवाओं को रोजगार के नाम पर विदेश भेजकर उन्हें साइबर अपराध में शामिल करने का काम करते हैं।
कंबोडिया में एचआर के रूप में कर चुका था काम
जांच में सामने आया कि आरोपी अक्टूबर 2023 से जून 2026 के बीच तीन अलग-अलग अवसरों पर लगभग दो वर्षों तक कंबोडिया में रहा। वहां वह एक निजी कंपनी में मानव संसाधन (HR) विभाग में कार्यरत था। इसी दौरान उसने स्थानीय नेटवर्क से संपर्क स्थापित किए और कथित रूप से भारत से युवाओं की भर्ती शुरू कर दी। पुलिस का दावा है कि वह कंप्यूटर डेटा एंट्री, ग्राहक सेवा और अन्य कार्यालयी नौकरियों का झांसा देकर बेरोजगार युवाओं को विदेश भेजता था।
हर व्यक्ति पर मिलता था 300 डॉलर का कमीशन
पुलिस जांच के अनुसार आरोपी को प्रत्येक भर्ती किए गए व्यक्ति के बदले लगभग 300 अमेरिकी डॉलर (करीब 25 हजार रुपये) का कमीशन मिलता था। शुरुआत में वह स्वयं लगभग 400 डॉलर मासिक वेतन पर कार्य करता था, लेकिन बाद में भर्ती एजेंट की भूमिका निभाने लगा। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस मॉडल के जरिए कई युवाओं को झूठे रोजगार के वादों में फंसाकर विदेश भेजा गया।
फर्जी नौकरी के विज्ञापनों का इस्तेमाल
पुलिस के अनुसार साइबर अपराध नेटवर्क सोशल मीडिया, मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन जॉब पोर्टलों पर फर्जी भर्ती विज्ञापन जारी करते हैं। इनमें आकर्षक वेतन, मुफ्त आवास, वीजा सहायता और तेज भर्ती प्रक्रिया जैसे दावे किए जाते हैं। विदेश पहुंचने के बाद कथित तौर पर युवाओं के पासपोर्ट अपने कब्जे में ले लिए जाते हैं और उन्हें साइबर फ्रॉड गतिविधियों में काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। इनमें डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश योजनाएं, ऑनलाइन लोन, पार्ट-टाइम जॉब स्कैम, कस्टमर केयर फ्रॉड और अन्य ऑनलाइन ठगी शामिल होती हैं।
कई देशों में फैला है नेटवर्क
पुलिस जांच में सामने आया है कि ऐसे नेटवर्क केवल कंबोडिया तक सीमित नहीं हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया के लाओस, वियतनाम, म्यांमार और थाईलैंड सहित कई देशों में इसी प्रकार के साइबर फ्रॉड केंद्र संचालित होने की आशंका है। इन केंद्रों में विभिन्न देशों के नागरिकों से ऑनलाइन ठगी कराई जाती है और साइबर अपराध को संगठित तरीके से अंजाम दिया जाता है।
200 भारतीयों के काम करने का दावा
पूछताछ के दौरान आरोपी ने कथित रूप से बताया कि जिस केंद्र में वह कार्यरत था वहां लगभग 200 भारतीय मौजूद थे। इनमें 150 से अधिक लोग राजस्थान के ब्यावर और सीकर क्षेत्र से बताए गए, जबकि 30 से 40 लोग केरल से थे। पुलिस इस दावे का स्वतंत्र सत्यापन कर रही है और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर आगे की जांच कर रही है।
विशेष अभियान के दौरान हुई कार्रवाई
राजस्थान पुलिस साइबर अपराध के खिलाफ विशेष अभियान चला रही है। इसी अभियान के तहत सीकर साइबर थाना और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई की। जांच अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराध नेटवर्क को आर्थिक रूप से कमजोर करने के लिए बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट, वित्तीय लेनदेन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।
अन्य एजेंटों की तलाश जारी
पुलिस का कहना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकता। जांच के दौरान मिले डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन और संपर्कों के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्ध एजेंटों की पहचान की जा रही है। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बढ़ती वैश्विक चुनौती बना साइबर भर्ती नेटवर्क
विशेषज्ञों के अनुसार दक्षिण-पूर्व एशिया में सक्रिय साइबर अपराध नेटवर्क हाल के वर्षों में वैश्विक चिंता का विषय बने हैं। ये गिरोह बेरोजगारी और विदेश में नौकरी की इच्छा का फायदा उठाकर लोगों को फंसाते हैं। कई मामलों में पीड़ितों के दस्तावेज जब्त कर उन्हें साइबर ठगी करने के लिए मजबूर किया जाता है। ऐसे मामलों से यह स्पष्ट होता है कि विदेश में नौकरी स्वीकार करने से पहले उम्मीदवारों को कंपनी, भर्ती एजेंसी और रोजगार प्रस्ताव की पूरी जांच करनी चाहिए। केवल अधिकृत एजेंसियों और सत्यापित माध्यमों के जरिए ही विदेश रोजगार प्रक्रिया अपनाना सुरक्षित माना जाता है।













