स्ट्रेट ऑफ होर्मुज विवाद पर ट्रंप भड़के, सहयोगियों को सुनाई खरी-खोटी

ईरान युद्ध के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने सहयोगी देशों पर नाराजगी जताई। बोले- अमेरिका को किसी की जरूरत नहीं, हमारी सेना दुनिया की सबसे ताकतवर है।

ईरान युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सहयोगी देशों से नाराज नजर आए। उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा के लिए कई देशों से मदद मांगी थी, लेकिन अमेरिका अपनी ताकत से ही हालात संभाल सकता है।

Trump News: ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव अब वैश्विक राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगी देशों को लेकर नाराजगी जाहिर की है। ट्रंप का कहना है कि उन्होंने कई देशों से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित बनाने के लिए वॉरशिप भेजने की अपील की थी, लेकिन ज्यादातर देशों ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। 

इस स्थिति से नाराज ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका को किसी की जरूरत नहीं है क्योंकि वह दुनिया का सबसे मजबूत देश है और उसकी सेना सबसे ताकतवर है। ट्रंप के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है और यह सवाल उठने लगा है कि क्या अमेरिका इस जंग में धीरे-धीरे अकेला पड़ता जा रहा है।

सहयोगी देशों को वॉरशिप भेजने का प्रस्ताव

डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि उन्होंने लगभग सात देशों से बातचीत की थी और उनसे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में वॉरशिप भेजने का अनुरोध किया था। इस प्रस्ताव का उद्देश्य यह था कि तेल से भरे जहाज सुरक्षित तरीके से इस समुद्री मार्ग से गुजर सकें।

हालांकि ट्रंप के अनुसार जर्मनी, स्पेन और इटली जैसे देशों ने इस प्रस्ताव को साफ तौर पर ठुकरा दिया। इन देशों का मानना था कि इस तरह के सैन्य कदम से क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।

ट्रंप ने यह भी बताया कि ब्रिटेन ने भी शुरुआत में अपने दो एयरक्राफ्ट कैरियर भेजने से इनकार कर दिया था। बाद में जब जंग खत्म होने के बाद मदद की पेशकश की गई तो ट्रंप ने उसे भी स्वीकार नहीं किया। उनका कहना था कि जब जरूरत थी तब सहयोग नहीं मिला, इसलिए बाद में मदद की कोई जरूरत नहीं रह जाती।

ट्रंप का सहयोगियों पर कड़ा बयान

सहयोगी देशों के रवैये से नाराज ट्रंप ने कड़ा बयान देते हुए कहा कि अमेरिका किसी पर निर्भर नहीं है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की मिलिट्री दुनिया में सबसे शक्तिशाली है और वह अकेले ही अपने हितों की रक्षा कर सकता है। ट्रंप ने यह भी कहा कि वह कई बार जानबूझकर ऐसे प्रस्ताव रखते हैं ताकि यह देखा जा सके कि सहयोगी देश संकट के समय कैसी प्रतिक्रिया देते हैं।

उनका कहना था कि वह कई वर्षों से यह कहते आ रहे हैं कि अगर अमेरिका को कभी सहयोगियों की जरूरत पड़ी तो संभव है कि वे आगे न आएं। मौजूदा स्थिति उनके इस संदेह को और मजबूत करती दिखाई दे रही है।

NATO पर भी उठाए सवाल

इस पूरे विवाद के दौरान ट्रंप ने NATO को लेकर भी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि अगर सहयोगी देश संकट के समय मदद करने के लिए तैयार नहीं होते तो NATO का भविष्य खतरे में पड़ सकता है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज विवाद पर ट्रंप भड़के, सहयोगियों को सुनाई खरी-खोटी

ट्रंप का कहना था कि सैन्य गठबंधन तभी मजबूत होता है जब सभी सदस्य देश एक-दूसरे का साथ दें। अगर सहयोगी देश केवल सामान्य परिस्थितियों में साथ रहें और संकट के समय पीछे हट जाएं तो ऐसे गठबंधन की उपयोगिता पर सवाल उठने लगते हैं।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्यों है इतना महत्वपूर्ण

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। यह समुद्री रास्ता पर्शियन गल्फ को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। इसी वजह से यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बेहद अहम है।

अगर इस समुद्री रास्ते में कोई बाधा आती है तो उसका असर पूरी दुनिया की तेल आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है। यही कारण है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर वैश्विक स्तर पर हमेशा चिंता बनी रहती है।

ईरान ने बंद किया समुद्री मार्ग

ईरान और अमेरिका के बीच जंग शुरू होने के बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने का फैसला किया। ईरान का कहना है कि जब तक स्थिति सामान्य नहीं होती तब तक इस मार्ग को खोलना संभव नहीं होगा। रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने अब तक 15 से ज्यादा जहाजों पर हमला किया है। इन हमलों के कारण तेल टैंकरों का आना-जाना लगभग बंद हो गया है और कई कंपनियों ने अपने जहाजों को इस क्षेत्र से दूर रखने का फैसला किया है।

ईरान की चेतावनी

ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने साफ कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिलहाल बंद ही रहेगा। उनका कहना है कि जब तक क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति नहीं बदलती तब तक इस मार्ग को खोलना संभव नहीं है। ईरानी सेना ने भी चेतावनी दी है कि अगर तनाव इसी तरह जारी रहता है तो तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।

अगर ऐसा होता है तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा क्योंकि तेल की कीमतों में वृद्धि से महंगाई और आर्थिक संकट की स्थिति पैदा हो सकती है।

जंग की शुरुआत कैसे हुई

यह पूरा संकट 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर बड़ा सैन्य हमला किया। इस अभियान को ऑपरेशन एपिक फ्यूरी (Operation Epic Fury) नाम दिया गया था।

इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई और कई वरिष्ठ अधिकारी मारे गए। इस घटना के बाद ईरान ने इसे बड़ा हमला बताते हुए जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। ईरान ने इजरायल और अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए। इसके बाद यह संघर्ष धीरे-धीरे पूरे मिडिल ईस्ट क्षेत्र में फैल गया।

जंग कितनी लंबी चलेगी

डोनाल्ड ट्रंप ने शुरुआत में कहा था कि यह जंग जल्द खत्म हो सकती है। हालांकि अब उनके बयान में बदलाव दिखाई दे रहा है। उन्होंने स्वीकार किया है कि यह संघर्ष जल्दी खत्म होने वाला नहीं है।

फिलहाल अमेरिका अपनी नौसेना के जरिए तेल जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने की योजना बना रहा है। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका अकेले ही अपने जहाजों को एस्कॉर्ट करेगा और जरूरत पड़ने पर अन्य देशों के जहाजों की सुरक्षा भी कर सकता है।

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